• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Paskual Duarte Ka Pariwar

Paskual Duarte Ka Pariwar

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 60

Special Price Rs. 54

10%

  • Pages: 169p
  • Year: 2012, 2nd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126701048
  • ISBN 13: 9788126701049
  •  
    (पास्कुआल दुआर्ते का परिवार) स्पेन के युगांतरकारी कथाकार कामीलो खा़ेसे सेला के ‘पास्कुआल दुआर्ते का परिवार’ को वर्ष 1989 के नोबेल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह उपन्यास एक ऐसे सांस्कृतिक माहौल में सामने आया जब स्पेनी पाठक अपनी सामाजिक संघटना के किसी ऐसे पुनर्लेखन के लिए कतई तैयार नहीं था जो कैथोलिक स्पेन की ‘शुद्धता’, परिवार की ‘पवित्रता’, सामाजिक वर्गीकरण के ‘परोपकारी स्वभाव’ जैसी परिभाषाओं के विरुद्ध हो। लेकिन सेला के उपन्यास ने यूरोपीय टूरिस्टों को निर्यात किए जानेवाले फ्रांको के पौराणिक स्पेन की अतिकल्पनाओं का बखूबी पर्दाफाश किया। मध्यकालीन दुर्ग, पैर पटकते हुए बंजारा नर्तक-नर्तकियाँ, सजीली पोशाकों में तने हुए बुल फाइटर, खुशहाल परिवार, गोद में शिशु सँभाले माता मेरी जैसी ममतामयी माँएँ - इन सबका पास्कुआल दुआर्ते जैसे संघर्षरत अनेक लोगों के दैनिक जीवन से कोई संबंध नहीं था। हालाँकि पास्कुआल दुआर्ते का स्पेन परंपरावादी और पौराणिक स्पेन नहीं है, लेकिन उसकी भाषा में स्पेन की परंपरा और स्पेन के गाँवों-शहरों की मिट्टी की गंध है। इसीलिए उसमें असीम शाब्दिक ऊर्जा है। संक्षेप में, पास्कुआल दुआर्ते का निष्ठुर यथार्थवाद तत्कालीन स्पेनी जीवन की भयावहता का जबर्दस्त खुलासा करता है। यही कारण है कि स्पेनी साहित्य में सेरवांतेस के महान उपन्यास ‘दोन किख़ोते’ के बाद पास्कुआल दुआर्ते को ही सबसे ज्यादा पाठक मिले हैं।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Kamilo Khose Sela

    कामीलो खीसे सेला

    स्पेन के नोबेल पुरस्कार विजेता उपन्यासकार कमीलो खोसे सेला का जन्म 11 मई, 1916 को हुआ था ! स्पेनी ग्रहयुद्ध के बाद के वर्षो में जो लेखक सामने आये, उनमे सेला सर्वप्रमुख हैं और स्पेनी ही निअही, बल्कि विश्व-साहित्य में उनका नाम आदर के साथ लिया जाता है ! 1942 से अब तक उन्होंने 10 उपन्यासों की रचना की है, जिनमें सर्वाधिक चर्चित हैं : ला कैमिलिया डी पास्कुआल दुआर्ते (1942) और ला कोलमेना (1951) ! ला कैमिलिया डी पास्कुआल दुआर्ते में फांसी का इन्तजार करते एक खुनी की जीवन-गाथा उसी की जबानी प्रस्तुत की गई है ! ला कोलमेना उनका सशक्ततम उपन्यास माना जाता है ! इस उपन्यास में स्पेनी गृहयुद्ध के चार वर्ष बाद माद्रीद की जिंदगी के तीन दिनों का चित्रण है ! सेला ने इस उपन्यास में गृहयुद्धोत्तर स्पेनी समाज की दरिद्रता और पतनशीलता का चित्रण करने के साथ-साथ समाज-कल्याण के झूठे दंभ का पर्दाफाश किया है !

    उपन्यासों के अतिरिक्त सेला के 8 कहानी-संग्रह ! यात्रा वृत्तांतों का एक संग्रह और लगभग आधा दर्जन निबंध-संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं !

    सेला की संकलित रचनाएँ 1972 में आठ खंडो में प्रकाशित हुई थीं !

    1956 में सेला ने स्पेन की एक सर्वोत्कृष्ट साहित्यिक पत्रिका पैपेलेस डी सोन आरमेडेन्स की शुरुआत की थी ! इस पत्रिका का संपादन वे स्वयं करते हैं !

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144