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Paanch Kahaniyan : Stree-Drishti

Paanch Kahaniyan : Stree-Drishti

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  • Pages: 112p
  • Year: 2020, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789389577747
  •  
    यह किताब UPPSC के नवीन पाठ्यक्रम पर आधारित पहली किताब है. हिंदी साहित्य, वैकल्पिक विषय, में लगाई गईं 5 कहानियाँ (माँ, आकाशदीप, रोज़, वापसी, जहाँ लक्ष्मी क़ैद है) प्रत्येक छात्र को अनिवार्य रूप से पढ़नी हैं। पुस्तक में पाँचों कहानियों का मूल पाठ लेखक परिचय के साथ संकलित है। साथ ही प्रख्यात लेखिका डॉ. अनामिका द्वारा प्रत्येक कहानी पर लिखा गया व्याख्यात्मक आलेख प्रश्नों को हल करने में सहायक होगा। लेख पढ़कर छात्र न केवल कहानी की व्याख्या कर सकेंगे बल्कि कहानी आधारित प्रश्नों को आसानी से हल भी कर सकेंगे।

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    Anamika

    अनामिका

    जन्म : 1961 के उत्तरार्द्ध में मुजफ्फरपुर, बिहार।

    शिक्षा : अंग्रेज़ी साहित्य से पी-एच.डी.।

    दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेज़ी साहित्य की लोकप्रिय प्राध्यापक, अनामिका के सात कविता-संकलन, पाँच उपन्यास, चार शोध-प्रबन्ध, छह निबन्ध-संकलन और पाँच अनुवाद बहुचर्चित हैं। इनके पाठकों का संसार बड़ा है। रूसी, अंग्रेज़ी, स्पेनिश, जापानी, कोरियाई, बांग्ला, पंजाबी, मलयालम, असमिया, तेलुगु आदि में इनकी कृतियों के अनुवाद कई पाठ्यक्रमों का हिस्सा भी हैं। फि़लहाल आप तीन मूर्ति में फेलो के रूप में सन्नद्ध हैं और यहाँ आपके शोध का विषय है : वीविंग अ नेशन : द प्रोटो-फेमिनिस्ट राइटिंग्ज इन उर्दू एंड हिन्दी।

    कृतियाँ : आलोचना—पोस्ट एलिएट पोएट्री : अ वॉएज फ्रॉम कांफ्लिक्ट टु आइसोलेशन, डन क्रिटिसिज़्म डाउन दि एजेज, ट्रीटमेंट ऑव लव एंड डेथ इन पोस्ट वार अमेरिकन विमेन पोएट्स; विमर्श—स्त्रीत्व का मानचित्र, मन माँजने की ज़रूरत, पानी जो पत्थर पीता है, स्वाधीनता का स्त्री-पक्ष; कविता—ग़लत पते की चिट्ठी, बीजाक्षर, समय के शहर में, अनुष्टुप, कविता में औरत, खुरदुरी हथेलियाँ, दूब-धान; कहानी—प्रतिनायक; संस्मरण—एक ठो शहर था, एक थे शेक्सपियर, एक थे चार्ल्स डिकेंस; उपन्यास—अवान्तर कथा, दस द्वारे का पींजरा; अनुवाद—नागमंडल (गिरीश कार्नाड), रिल्के की कविताएँ, एफ्रो-इंग्लिश पोएम्स, अटलान्त के आर-पार (समकालीन अंग्रेज़ी कविता), कहती हैं औरतें (विश्व साहित्य की स्त्रीवादी कविताएँ)।

    सम्मान : राजभाषा परिषद् पुरस्कार (1987), भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार (1995), साहित्यकार सम्मान (1997), गिरिजाकुमार माथुर सम्मान (1998), परम्परा सम्मान (2001) और साहित्य सेतु सम्मान (2004)।

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