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Shikhar Ki Dhalan

Shikhar Ki Dhalan

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  • Pages: 440p
  • Year: 2013
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126724079
  •  
    धनहीन, लेकिन प्रेम की गरिमा से रचा-बसा एक नौजवान युगल छोटे से एक कस्बे से बड़े शहर में आता है। युवक यहाँ दिन-रात अपने उपन्यास को पूरा करने में जुटा है; अपनी खूबसूरत बीवी की इच्छा ही बीच-बीच में उसका हाथ रोकती है। कुछ समय बाद वे शहर को छोड़कर मध्य हिमालय के एक पुराने घर में चले जाते हैं। इस घर को रहने लायक बनाते समय युवक को एक पेटी मिलती है, जिसमें घर की पुरानी मालकिन की डायरियाँ भरी हैं और, तब खुलता है एक दूसरी दुनिया का, एक दूसरे ही वक्त का दरवाजा, और एक कहानी के अँधेरे रहस्यों का...। चर्चित पत्रकार तरुण तेजपाल का मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा उपन्यास ‘द अल्केमी ऑफ़ डिज़ायर’ दुनिया की एक दर्जन से ज्यादा भाषाओं में अनूदित हो चुका है, और विश्व के लाखों पाठकों तक पहँुच चुका है। नोबेल विजेता, भारतीय मूल के अंग्रेजी लेखक वी.एस. नायपाल ने इसे भारत में लिखा गया ‘प्रतिभापुष्ट मौलिकता’ से सम्पन्न उपन्यास कहा। शिखर की ढलान इसी उपन्यास का उत्तम अनुवाद है। ऐन्द्रिकता और आवेग से भरे इस उपन्यास को विश्व-भर के पत्र-पत्रिकाओं और आलोचकों ने सराहा है, और इसे भारत के किसी अंग्रेजी लेखक की अभूतपूर्व रचना माना है। ‘बोस्टन ग्लोब’ की टिप्पणी है: ‘‘तेजपाल ने एक तीव्रगामी और ऐंद्रिक उपन्यास लिखा है, जो भारत के जनसाधारण पर दशकों से काबिज समझदार और छिद्रान्वेषी नैतिकता को सही करने की कोशिश करता है। इसके स्पष्ट, रक्ताभ आवेग और इसकी विराट महत्त्वाकांक्षा की प्रशंसा किए बिना नहीं रहा जा सकता। यह उपन्यास उल्लास की चीख है। जो सशक्त और पुख्ता आन्तरिक जीवन के महत्त्व को उस समाज में रहते हुए रेखांकित करता है जो समाज किनारों से उधड़ने, छीजने लगा है। भारतीय जनजीवन के विषय में लिखने की ईश्वर-प्रदत्त क्षमता से सम्पन्न तेजपाल सम्भवतः समझते हैं कि ऐसे समाज में जहाँ टुटपुंजिया भ्रष्टाचार व्याप्त हो, युद्ध के नगाड़े पीटे जाते हों, परमाणु परीक्षण को लेकर शेखी बघारी जाती हो, और जहाँ गरीबों को लूटनेवाले और अमीरों की शरण पड़े साधु-संन्यासी हों, वहाँ घरेलू जीवन का क्या महत्त्व है, और एक ऐसी जगह बनाने की जरूरत भी कितनी है जहाँ व्यक्ति इस सबको छोड़कर अपने आत्म के साथ रह सके।’’

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    Tarun J. Tejpal

    तरुण जे. तेजपाल
    जन्म : 15 मार्च, 1963
    तरुण तेजपाल पत्राकार, प्रकाशक और उपन्यासकार हैं। अपने पत्राकारिता-जीवन की शुरुआत उन्होंने ‘इंडिया टुडे’ से की और तत्पश्चात् ‘आउटलुक’ के प्रबन्ध सम्पादक रहे। मार्च, 2000 में आपने जमीमसांण्बवउ की शुरुआत की, जिसे जनहितकारी पत्राकारिता के लिए विश्व-भर में प्रसिद्धि मिली। ‘इंडिया इंक’ नाम से उन्होंने एक प्रकाशन भी शुरू किया, जिससे 1998 में अरुंधति रॉय का चर्चित उपन्यास ‘गॉड ऑप़$ स्माल थिंग्स’ प्रकाशित हुआ था।
    पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्रा में स्नातक तरुण तेजपाल को 2001 में ‘बिजनिस वीक’ पत्रिका ने 50 ऐसे लोगों में एक घोषित किया था जो एशिया में परिवर्तन को गति देने में अग्रणी रहे। सन् 2009 में इसी पत्रिका ने उन्हें भारत के सर्वाधिक शक्तिशाली 50 लोगों में शुमार किया, तो 2007 में ‘द गार्जियन’ ने माना कि भारत के नए अभिजात वर्ग की रचना में जिन 20 लोगों की मुख्य भूमिका रही, उनमें तरुण तेजपाल भी हैं।
    ‘द अल्केमी ऑप़$ डिज़ायर’ (2006) तरुण तेजपाल का पहला उपन्यास था जिसे फ्रांस का ‘प्रिक्स मिलेपेजेज’ पुरस्कार मिला। उनका दूसरा उपन्यास ‘द स्टोरी ऑप़$ माय असेसिन्स’ 2010 में प्रकाशित हुआ और 2011 में ‘द वैली ऑप़$ मास्क्स’ आया।
    सम्प्रति : आप ‘तहलका’ के प्रमुख सम्पादक तथा प्रकाशक हैं और दिल्ली में रह रहे हैं।

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