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Mamooli Cheezon Ka Devata

Mamooli Cheezon Ka Devata

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  • Pages: 296p
  • Year: 2019, 11th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126710188
  •  
    एक विशुद्ध व्यावहारिक अर्थ में तो शायद यह कहना सही होगा कि यह सब उस समय शुरू हुआ, जब सोफ़ी मोल आयमनम आई। शायद यह सच है कि एक ही दिन में चीज़ें बदल सकती हैं। कि चंद घंटे समूची ज़िन्दगियों के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। और यह कि जब वे ऐसा करते हैं, उन चंद घंटों को किसी जले हुए घर से बचाए गए अवशेषों की तरह - करियाई हुई घड़ी, आँच लगी तस्वीर, झुलसा हुआ फ़र्नीचर - खंडहरों से समेट कर उनकी जाँच-परख करनी पड़ती है। सँजोना पड़ता है। उनका लेखा-जोखा करना पड़ता है। छोटी-छोटी घटनाएँ, मामूली चीज़ें, टूटी-फूटी और फिर से जोड़ी गईं। नए अर्थों से भरी। अचानक वे किसी कहानी की निर्वर्ण हड्डियाँ बन जाती हैं। फिर भी, यह कहना कि वह सब कुछ तब शुरू हुआ जब सोफ़ी मोल आयमनम आई, उसे देखने का महज़ एक पहलू है। साथ ही यह दावा भी किया जा सकता था कि वह प्रकरण सचमुच हज़ारों साल पहले शुरू हुआ था। मार्क्सवादियों के आने से बहुत पहले। अंग्रेज़ों के मलाबार पर कब्ज़ा करने से पहले, डच उत्थान से पहले, वास्को डि गामा के आगमन से पहले, ज़मोरिन की कालिकट विजय से पहले। किश्ती में सवार ईसाइयत के आगमन और चाय की थैली से चाय की तरह रिसकर केरल में उसके फैल जाने से भी बहुत पहले हुई थी। कि वह सब कुछ दरअसल उन दिनों शुरू हुआ जब प्रेम के क़ानून बने। वे क़ानून जो यह निर्धारित करते थे कि किस से प्रेम किया जाना चाहिए, और कैसे। और कितना। बहरहाल, व्यावहारिक रूप से एक नितान्त व्यावहारिक दुनिया में...वह दिसम्बर उनहत्तर का (उन्नीस सौ अनुच्चरित था) एक आसमानी नीला दिन था। एक आसमानी रंग की प्लिमथ, अपने टेलफ़िनों में सूरज को लिये, धान के युवा खेतों और रबर के बूढ़े पेड़ों को तेज़ी से पीछे छोड़ती कोचीन की तरफ़ भागी जा रही थी...

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    Arundhati Roy

    अरुन्धति रॉय ने एक वास्तुकार के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने दो फि़ल्मों के लिए पटकथाएँ लिखीं और दो फिल्मों में अभिनय के साथ-साथ प्रोडक्शन डिज़ाइनर की भूमिका भी निभाई। पहला उपन्यास द गॉड ऑफ स्माल थिंग्स (मामूली चीजों का देवता हिन्दी में) बेहद चर्चित व प्रशंसित रहा।

    अन्य पुस्तकें: अलजेब्रा ऑफ इनफिनाइट जस्टिस, एन ऑर्डिनरी पर्सन्स गाईड टू एम्पायर।

    सम्मान: बुकर पुरस्कार से सम्मानित।

     

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