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Mughal Badshahon Ki Hindi Kavita

Mughal Badshahon Ki Hindi Kavita

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  • Pages: 135
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126729456
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    यह आश्चर्यजनक लगेगा, लेकिन तथ्य है, कि बाबर से लेकर बहादुरशाह जफ़र तक, लगभग सभी मुग़ल बादशाह शायर और कवि भी थे; और उन्होंने फारसी-उर्दू में ही नहीं, ब्रजभाषा और हिंदी में भी काव्य-रचना की ! यह पुस्तक प्रमाण है कि जिस भी बादशाह को राजनीति और युद्धों से इतर सुकून के पल नसीब हुए, उन्होंने कवियों-शायरों को संरक्षण देने के अलावा न सिर्फ कविताएँ-गजलें लिखी, अपने आसपास ऐसा माहौल भी बनाया कि उनके परिवार कि महिलाएँ भी काव्य-रचना कर सकें ! लिखित प्रमाण है कि बाबर की बेटी गुलबदन बेगम और नातिन सलीमा सुल्ताना फारसी में कविताएँ लिखती थीं ! हुमायूँ स्वयं कवि नहीं था, लेकिन काव्य-प्रेम उसका भी कम नहीं था ! अकबर का कला-संस्कृति प्रेम तो विख्यात ही है, वह फारसी और हिंदी में लिखता भी था ! 'संगीत रागकल्पदुम' में अकबर कि हिंदी कविताएँ मौजूद हैं ! जहाँगीर, नूरजहाँ, फिर औरंगजेब कि बेटी जेबुन्निसाँ, ए सब या तो फारसी में या फारसी-हिंदी दोनों में कविताएँ लिखते थे ! कहा जाता है कि शाहजहाँ के तो दरबार कि भाषा ही कविता थी ! दरबार के सवाल-जवाब कविता में ही होते थे ! दारा शिकोह का दीवान उपलब्ध है, जिसमे उसकी गजलें और रुबाइयाँ हैं ! अंतिम मुग़ल बादशाह जफ़र कि शायरी से हम सब परिचित हैं ! उल्लेखनीय यह कि उन्होंने हिंदी में कविताएँ भी लिखी जो उपलब्ध भी हैं ! कहना न होगा कि हिंदी के वरिष्ठ आलोचक डॉ. मैनेजर पाण्डेय द्वारा सम्पादित यह संकलन भारत में मुग़ल-साम्राज्य कि छवि को एक नया आयाम देता है; इससे गुजरकर हम जान पाते हैं कि मुग़ल बादशाहों ने हमें किले और मकबरे ही नहीं दिए, कविता की एक श्रेष्ठ परम्परा को भी हम तक पहुँचाया है !

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    Manager Pandey

    जन्म: 23 सितम्बर, 1941 को बिहार प्रान्त के वर्तमान गोपालगंज जनपद के एक गाँव ‘लोहटी’ में हुआ।

    शिक्षा: आरम्भिक शिक्षा गाँव में तथा उच्च शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हुई, जहाँ से उन्होंने एम.ए. और पी-एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं।

    प्रमुख पुस्तकें: शब्द और कर्म, साहित्य और इतिहास : ष्टि, साहित्य के समाजशास्त्र की भूमिका, भक्ति आन्दोलन और सूरदास का काव्य, अनभै साँचा, आलोचना की सामाजिकता, संकट के बावजूद (अनुवाद, चयन और सम्पादन) देश की बात (सखाराम गणेश देउस्कर की प्रसिद्ध बांग्ला पुस्तक ‘देशेर कथा’ के हिन्दी अनुवाद की लम्बी भूमिका के साथ प्रस्तुति), मुक्ति की पुकार (सम्पादन), सीवान की कविता (सम्पादन)।

    प्रमुख सम्मान/पुरस्कार: हिन्दी अकादमी द्वारा दिल्ली का साहित्यकार सम्मान, राष्ट्रीय दिनकर सम्मान, रामचंद्र शुक्ल शोध संस्थान, वाराणसी का गोकुल चन्द्र शुक्ल पुरस्कार और दक्षिण भारत प्रचार सभा का सुब्रह्मण्य भारती सम्मान।

    मैनेजर पाण्डेय ने हिन्दी में एक ओर ‘साहित्य और इतिहास : ष्टि’ के माध्यम से साहित्य के बोध, विश्लेषण तथा मूल्यांकन की ऐतिहासिक : ष्टि का विकास किया है तो दूसरी ओर ‘साहित्य के समाजशास्त्र’ के रूप में हिन्दी में साहित्य की समाजशास्त्रीय : ष्टि के विकास की राह बनाई है। उन्होंने भक्त कवि सूरदास के साहित्य की समकालीन संदर्भों में व्याख्या कर भक्तियुगीन काव्य की प्रचलित धारणा से अलग एक सर्वथा नई तर्काश्रित प्रासंगिकता सिद्ध की है। हिन्दी में दलित साहित्य और स्त्री स्वतंत्रता के समकालीन प्रश्नों पर बहसें हुई हैं, उनमें पाण्डेय जी की अग्रणी भूमिका को बार-बार रेखांकित किया गया है।

    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भाषा संस्थान के भारतीय भाषा केन्द्र से सेवानिवृत्त।

    सम्प्रति: स्वतंत्र लेखन।

    सम्पर्क: बी डी/8ए, डीडीए फ्लैट्स, मुनीरका, नई दिल्ली-67  

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