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Main Hindu Hoon

Main Hindu Hoon

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  • Pages: 150
  • Year: 2013, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126712045
  •  
    असग़र वजाहत उन विरले कहानीकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने पूरी तरह अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए भाषा और शिल्प के सार्थक प्रयोग किए हैं। उनकी कहानियाँ एक ओर आश्वस्त करती हैं कि कहानी की प्रेरणा और आधारशिला सामाजिकता ही हो सकती है तो दूसरी ओर यह भी स्थापित करती हैं कि प्रतिबद्धता के साथ नवीनता, प्रयोगधर्मिता का मेल असंगत नहीं है। ‘मास मीडिया’ से आक्रांत इस युग में असग़र वजाहत की कहानियाँ बड़ी जिम्मेदारी से नई ‘स्पेश’ तलाश कर लेती हैं। राजनीति और मनोरंजन द्वारा मीडिया पर एकाधिकार स्थापित कर लेने वाले समय में असग़र की कहानियाँ अपनी विशेष भाषा और शिल्प के कारण अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई हैं। ‘मैं हिन्दू हूँ’ असग़र का चौथा कहानी-संग्रह है। वे न केवल अपनी गति बनाए हुए हैं बल्कि उनके रचना- संसार में संवेदना के धरातल पर कुछ परिवर्तन भी आए हैं। हास्य, व्यंग्य और खिलंदड़ापन के साथ-साथ अब उनकी कहानी में गहरा अवसाद और दुख शामिल हो गया है। बहुआयामी जटिल यथार्थ और आम आदमी की पीड़ा को व्यक्त करने के लिए वे नए ‘हथियारों’ की तलाश में दिखाई पड़ते हैं। विषय की विविधता के बावजूद उनकी कहानियों में साम्प्रदायिकता की समस्या तथा सामाजिक अवमूल्यन का अपना अलग महत्त्व है। उनकी कहानियाँ दरअसल उन लोगों की कहानियाँ हैं जो समाज के हाशिए पर पड़े हैं लेकिन बड़े सामाजिक संदर्भों से जुड़ने का जतन करते रहते हैं। इन कहानियों मे असग़र कल्पना और फैंटेसी के सम्मिश्रण से एक ऐसी भाव-भूमि की संरचना करते हैं जो कहानी को विस्तार देती है। उनकी कहानियाँ पाठकों से माँग करती हैं कि शब्दों और वाक्यों के समान्तर रचे गए अनकहे संसार की परतें भी खोलते रहें। रोचकता की तमाम शर्तों पर पूरा उतरते हुए असग़र वजाहत की कहानियाँ गम्भीर विश्लेषणात्मक रवैये की माँग करता है।

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    Asghar Wajahat

    जन्म : 1946, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश।

    शिक्षा : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए., पी-एच.डी. और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पोस्ट डाक्टोरल रिसर्च। 1971 से जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली के हिन्दी विभाग में अध्यापन। पाँच वर्षों तक ओत्वोश लोरांड विश्वविद्यालय, बुडापेस्ट, हंगरी में अध्यापन। यूरोप और अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में व्याख्यान।

    पाँच उपन्यास, दो लघु उपन्यास, छह पूर्णकालिक नाटक, यात्रा संस्मरण की तीन पुस्तकें, नुक्कड़ नाटकों का एक संग्रह और साहित्यिक आलोचना की एक पुस्तक प्रकाशित।

    प्रमुख प्रकाशन : सात आसमान, कैसी आगी लगाई, बरखा रचाई, मनमाटी (उपन्यास), मैं हिन्दू हूँ, डेमोक्रेसिया (कहानी संग्रह)।

    रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद। नाटकों के मंचन देश-विदेश की कई भाषाओं में हैं।

    रचनात्मक लेखन के अलावा नियमित रूप से विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेखन। 2007 में बीबीसी हिन्दी के अतिथि सम्पादक। 'हंस’ पत्रिका के लिए विशेष अतिथि सम्पादक के रूप में 'भारतीय मुसलमान : वर्तमान और भविष्य’ विषय पर और 'वर्तमान साहित्य’ के लिए 'प्रवासी साहित्य’ पर विशेषांकों का सम्पादन।

    फिल्मों के लिए पटकथाएँ लिखने के अलावा धारावाहिक और डॉक्यूमेंटरी फिल्में भी बनाई हैं।

    कथा यूके सम्मान और हिन्दी अकादेमी, दिल्ली से सम्मानित; कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित।

    चित्रकला और पर्यटन में गहरी रुचि।

    सम्प्रति : प्रोफेसर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली।

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