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  • Pages: 111p
  • Year: 2011
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126720729
  •  
    श्रीकान्त वर्मा की लम्बी काव्य-यात्रा में उनका यह कविता-संग्रह एक ऐसा मोड़ है जिसमें उनकी जिन्दगी के पेंचों-खम का असर व्याप्त है। श्रीकान्त वर्मा कभी कविता की दुनिया छोड़कर राजनीति में सक्रिय हुए थे किन्तु राजनीति से उनका मोहभंग जल्दी ही हो गया और फिर उनकी वापसी कविता की दुनिया में हुई। ‘मगध’ उनके इस परिवर्तन की परिणति है। यह सच है कि मगध की कवतिाएँ इतिहास नहीं हैं मगर इसमें इतिहास के सम्मोहन और उसके भाषालोक की अद्भुत छटा है। ध्वस्त नगर एवं गणराज्य अतीत की कहानियाँ लिए हमारी स्मृतियों में कौंध जाते हैं अपने नायक और नायिकाओं के साथ! श्रीकान्त वर्मा की लेखनी का ऐसा चमत्कार ‘मगध’ में उभरता है कि ‘मगध’, ‘अवन्ती’, ‘कोशल’, ‘काशी’, ‘श्रावस्ती’, ‘चम्पा’, ‘मिथिला’ ‘कोसाम्बी’...मानो धूल में आकार लेते हैं और धूल में ही निराकार हो जाते हैं। कहते हैं कि मनुष्य की समग्र गाथा में महाकाव्य होता है, ‘मगध’ की कविताएँ उसी समग्रता और उसी महाकाव्य को प्रस्तुत करने का एक उपक्रम हैं। ये कविताएँ काल की एक झाँकी हैं और महाकाल की स्तुति भी। ये कविताएँ अतीत का स्मरण हैं, वर्तमान से मुठभेड़ और भविष्य की झलक भी।

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    Shrikant Verma

    जन्म: 18 सितम्बर, 1931, बिलासपुर (म.प्र.) में। 1956 में नागपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम.ए.। 1955-56 में बिलासपुर से नई दिशा का सम्पादन। फिर भविष्य की खोज में दिल्ली आ गए। कुछ दिनों भारतीय श्रमिक में उपसम्पादक। 1958 से 62 तक दिल्ली की विशिष्ट पत्रिका कृति का नरेश मेहता के साथ सम्पादन। 1964 से साप्ताहिक दिनमान से सम्बद्ध हुए। सन् 77 में दिनमान से त्यागपत्र।

    साहित्य के अलावा राजनीति में सक्रिय हस्तक्षेप। साठ के दशक में डॉ. राममनोहर लोहिया के सम्पर्क में आए। उनके विचार और कर्म से गहरे स्तर पर प्रभावित। डॉ. लोहिया के असामयिक निधन और समाजवादी आन्दोलन के बिखराव के बाद सन् 69 में श्रीमती इंदिरा गांधी से परिचय और कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय भागीदारी। सन् 67 में म.प्र. से राज्यसभा के सदस्य। सन् 80 में कांग्रेस (ई.) के चुनाव अभियान का संचालन। सन् 85 में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख महासचिव और प्रवक्ता।

    फरवरी 86 में अस्वस्थ। कैंसर के इलाज के लिए अमेरिका गए। 25 मई, 1986 को अमेरिका के स्लोन केटरिंग मेमोरियल अस्पताल में निधन।

    सम्मान: म.प्र. शासन द्वारा ‘उत्सव-73’ में विशिष्ट लेखन के लिए सम्मानित। जलसाघर के लिए तुलसी सम्मान। सन् 81 में म.प्र. शासन का प्रथम शिखर सम्मान। सन् 84 में कुमार आशान, यूनाइटेड नेशंस इंडियन कौंसिल आफ यूथ एवार्ड और म.प्र. के नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार से सम्मानित। सन् 86 में मरणोपरान्त साहित्य अकादमी पुरस्कार और सन् 85 में इंदिरा प्रियदर्शिनी सम्मान से सम्मानित।

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