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Madhyakalin Bharat Mein Prodhyogiki

Madhyakalin Bharat Mein Prodhyogiki

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  • Pages: 159
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126727919
  •  
    भारत का लोक इतिहास श्रृंखला की यह कड़ी भारतीय इतिहास के उस पहलू पर दृष्टिपात करती है जिस पर अभी तक बहुत कम काम हुआ है ! इसमें आम-जन के साधारणतम औजारों से लेकर खगोल-वैज्ञानिकों के उपकरणों और युद्ध में काम आनेवाले हथियारों तक के विकास को रेखांकित किया गया है ! अध्ययन का मुख्य तत्व यह है कि यह पूर्णतया ऐतिहासिक है, तकनीक के विकास-क्रम की खोज न सिर्फ प्रमाणों के साथ की गई है बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक परिणामों को भी विस्तार से समझा गया है ! श्रृंखला की अन्य पुस्तकों की तरह इसमें भी मूल दस्तावेजों के उद्धरणों और आधुनिक-पूर्व तकनीक के विषय में विशिष्ट सूचनाएँ दी गई हैं ! तकनीकी शब्दावली, तकनीक के ऐतिहासिक स्रोतों और भारत से बाहर विकसित होनेवाली मध्यकालीन तकनीक पर विशेष टिप्पणियाँ भी दी गई हैं ! छात्रों और सामान्य पाठकों को ध्यान में रखते हुए कोशिश की गई है कि प्रमाणिकता को हानि पहुंचाए बिना पुस्तक जितनी सरल हो सकती है उतनी हो सके ! उम्मीद है कि सिर्फ इतिहासकारों को ही नहीं हर उस पाठक को यह प्रस्तुति मूल्यवान लगेगी जो यह जानना चाहते हैं कि प्राचीन युग में जनसाधारण, आम स्त्री और पुरुषों ने अपने हाथों और औजारों से क्या कुछ किया !

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    Irfan Habib

    इरफान हबीब

    यशस्वी इतिहासकार। उन्नत इतिहास अध्ययन केन्द्र, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़  में  प्रोफेसर  एमेरिटस  हैं।

    प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित सैकड़ों लेखों के अलावा आप एग्रेरियन सिस्टम ऑफ मुगल इंडिया (1963), संशोधित संस्करण : 1999; एन एटलस ऑफ द मुगल इंपायर (1982); एस्सेज़ इन इंडियन हिस्ट्री; टुवड्र्स ए मार्किसस्ट परसेप्शन (1995) तथा मेडिवल इंडिया : द स्टडी ऑफ ए सिविलाइजेशन (2001) के लेखक हैं। आप कैम्ब्रिज इकॉनोमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया-खंड-ढ्ढ (1982), यूनेस्को की हिस्ट्री ऑॅफ ह्यूमेनिटी-खंड-ढ्ढङ्क व ङ्क तथा हिस्ट्री ऑफ सेंट्रल एशिया-खंड-ङ्क के सह-सम्पादक भी हैं।

    भारत का लोक इतिहास  ((People’s History of India)) शृंखला के प्रधान सम्पादक, जिसके तहत आपने पाँच पुस्तकों का लेखन व दो पुस्तकों में सहलेखन किया है।

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