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Lalmaniyan Tatha Anya Kahaniyan

Lalmaniyan Tatha Anya Kahaniyan

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  • Pages: 138p
  • Year: 2015, 3rd Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126704799
  • ISBN 13: 9788126704798
  •  
    नब्बे के दशक में जिन रचनाकारों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और जिन्हें पाठकों ने भी हाथों-हाथ लिया, मैत्रेयी पुष्पा का नाम उनमें प्रमुख है ! बहुत समय नहीं बीता, और आज वे हिंदी साहित्य-परिदृश्य की एक महत्त्पूर्ण उपस्थिति हैं ! उन्होंने हिंदी कथा-धारा को वापस गाँव की ओर मोड़ा और कई अविस्मर्णीय चरित्र हमें दिए ! इन चरित्रों ने शहरी -मध्यवर्ग को उस देश की याद दिलाई जो धीरे-धीरे शब्द की दुनिया से गायब हो चला था ! 'इदन्नमम' की मंदा, 'चाक' की सारंग, 'अल्मा कबूतरी' की अल्मा और 'झूला नट' की शीलो, ऐसे अनेक चरित्र हैं जिन्हें मैत्रेयी जी ने अपनी समर्थ दृश्यात्मक भाषा और गहरे जुडाव के साथ आकार दिया है ! यहाँ प्रस्तुत कहानियों में भाषागत बिम्बों और दृश्यों को सजीव कर देने की अपनी अदभुत क्षमता के साथ वे जिस पाठ की रचना करती हैं, उसे पढना कथा-रस के एक विलक्षण अनुभव से गुजरना है ! 'ललमनियाँ' की मौहरो, 'रिजक' कहानी की लल्लन, 'पगला गई है भागवती !' की भागो या 'सिस्टर' की डोरोथी, ये सब स्त्रियाँ अपने परिस्थितिगत गहरे करुणा भाव के साथ पाठक के मन में गहरे उतर जाती हैं, और यह चीज लेखिका की भाषा-सामर्थ्य और गहरे चरित्र-बोध को सिद्ध करती है !

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    Maitriye Pushpa

    जन्म : 30 नवम्बर, 1944, अलीगढ़ जि़ले के  सिकुर्रा गाँव में।

    आरम्भिक जीवन : जि़ला झाँसी के खिल्ली गाँव में।

    शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य), बुंदेलखंड कॉलेज, झाँसी।

    कृतियाँ : चिन्हार, गोमा हँसती है, ललमनियाँ तथा अन्य कहानियाँ, पियरी का सपना, प्रतिनिधि कहानियाँ, समग्र कहानियाँ (कहानी-संग्रह); बेतवा बहती रही, इदन्नमम, चाक, झूला नट, अल्मा कबूतरी, अगनपाखी, विजन, कही ईसुरी फाग, त्रिया हठ, गुनाह-बेगुनाह, फ़रिश्ते निकले (उपन्यास); कस्तूरी कुंडल बसै, गुड़िया भीतर गुड़िया (आत्मकथा); खुली खिड़कियाँ, सुनो मालिक सुनो, चर्चा हमारा, आवाज़, तब्दील निगाहें (स्त्री विमर्श); फाइटर की डायरी (रिपोर्ताज)।

    फैसला कहानी पर टेलीफिल्म वसुमती की चिट्ठी।

    प्रमुख सम्मान : सार्क लिट्रेरी अवार्ड, 'द हंगर प्रोजेक्ट’ (पंचायती राज) का सरोजिनी नायडू पुरस्कार, मंगला प्रसाद पारितोषिक, प्रेमचन्द सम्मान, हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान, मध्यप्रदेश साहित्य परिषद का वीरसिंह जूदेव पुरस्कार, कथाक्रम सम्मान, शाश्वती सम्मान एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का महात्मा गांधी सम्मान।

    सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हस्तक्षेप।

    सम्पर्क : 104, महागुन मार्फियस, प्लाट नं. ई-4, सेक्टर 50, नोएडा-201303 (उ.प्र.)।

    मोबाइल : 09910412680

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