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Khamosh Nange Hamam Mein Hain

Khamosh Nange Hamam Mein Hain

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  • Pages: 115
  • Year: 2015, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728558
  •  
    परसाई, शरद जोशी, रवीन्द्रनाथ त्यागी और श्रीलाल शुक्ल की पीढ़ी के बाद, यदि हिंदी-विश्व को कोई एक व्यंग्यकार सर्वाधिक आश्वस्त करता है तो वह ज्ञान चतुर्वेदी हैं ! वे क्या 'नया लिख रहे हैं'-इसको लेकर जितनी उत्सुकता उनके पाठकों को रहती है, उतनी ही आलोचकों को भी ! विशेष तौर पर, राजकमल द्वारा ही प्रकाशित अपने दो उपन्यासों नरक यात्रा और बारामासी के बाद तो ज्ञान चतुर्वेदी इस पीढ़ी के व्यंग्यकारों के बीच सर्वाधिक पठनीय, प्रतिभावान, लीक तोड़नेवाले और हिंदी-व्यंग्य को वहां से नई ऊँचाइयों पर ले जानेवाले माने जा रहे हैं, जहाँ परसाई ने उसे पहुँचाया था ! ज्ञान चतुर्वेदी में परसाई जैसा प्रखर चिंतन, शरद जोशी जैसा विट, त्यागी जैसी हास्य-क्षमता तथा श्रीलाल शुक्ल जैसी विलक्षण भाषा का अदभुत मेल है, जो उन्हें हिंदी-व्यंग्य के इतिहास में अलग ही खड़ा करता है ! ज्ञान को आप जितना पढ़ते हैं, उतना ही उनके लेखन के विषय-वैविध्य, शैली की प्रयोगधर्मिता और भाषा की धुप-छाँव से चमत्कृत होते हैं ! वे जितने सहज कौशल से छोटी-छोटी व्यंग्य-तेवर देखते ही बनते हैं ! ज्ञान चतुर्वेदी विशुद्ध व्यंग्य लिखने में उतने ही सिद्धहस्त हैं, जितना 'निर्मल हास्य' रचने माँ ! वास्तव में ज्ञान की रचनाओं में हास्य और व्यंग्य का ऐसा नापा-तुला तालमेल मिलता है, जहाँ 'दोनों ही' एक-दुसरे की ताकत बन जाते हैं ! और तब हिंदी की यह 'बहस' ज्ञान को पढ़ते हुए बड़ी बेमानी मालूम होने लगती है कि हास्य के (तथाकथित) घालमेल से व्यंग्य का पैनापन कितना कम हो जाता है ? सही मायनों में तो ज्ञान चतुर्वेदी के लेखन से गुजरना एक 'सम्पूर्ण व्यंग्य-रचना' के तेवरों से परिचय पाने के अद्धितीय अनुभव से गुजरना है !

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    Gyan Chaturvedi

    मऊरानीपुर (झाँसी) उत्तर प्रदेश में 2 अगस्त, 1952 को जन्मे डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी की मध्य प्रदेश में ख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ की तरह विशिष्ट पहचान। चिकित्सा शिक्षा के दौरान सभी विषयों में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले छात्र का गौरव हासिल किया। भारत सरकार के एक संस्थान (बी.एच.ई.एल.) के चिकित्सालय में कोई तीन दशक से ऊपर सेवाएँ देने के पश्चात् हाल ही में शीर्षपद से सेवा-निवृत्ति।

    लेखन की शुरुआत सत्तर के दशक से 'धर्मयुग’ से। प्रथम उपन्यास 'नरक-यात्रा’ अत्यन्त चर्चित रहा, जो भारतीय चिकित्सा-शिक्षा और व्यवस्था पर था। इसके पश्चात् 'बारामासी’ तथा 'मरीचिका’ जैसे उपन्यास आए और 'हम न मरब’ उनकी ताजा औपन्यासिक कृति।

    दस वर्षों से 'इंडिया टुडे’ तथा 'नया ज्ञानोदय’ में नियमित स्तम्भ। इसके अतिरिक्त राजस्थान पत्रिका और 'लोकमत समाचार’ दैनिकों में भी व्यंग्य स्तम्भ।

    अभी तक तकरीबन हजार व्यंग्य रचनाओं का प्रकाश। 'प्रेत कथा’, 'दंगे में मुर्गा’, 'मेरी इक्यावन व्यंग्य रचनाएँ’, 'बिसात बिछी हैं’, 'खामोश! नंगे हमाम में हैं’, 'प्रत्यंचा’ ओर 'बाराखड़ी’ व्यंग्य-संग्रह।

    शरद जोशी के 'प्रतिदिन’ के प्रथम खंड का अंजनी चौहान के साथ सम्पादन।

    'राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान’ म.प्र. सरकार। दिल्ली अकादमी का व्यंग्य लेखन के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित दिल्ली 'अकादमी सम्मान’। अन्तर्राष्ट्रीय इन्दु  शर्मा कथा-सम्मान (लन्दन) तथा 'चकल्लस पुरस्कार’ के अलावा कई विशिष्ट सम्मान।

    पुत्री नेहा डॉक्टर हैं तथा बेटा दुष्यन्त इंजीनियर। पत्नी शशि चतुर्वेदी भारत सरकार के चिकित्सा-संस्थान में स्त्रीरोग विशेषज्ञ।

    सम्पर्क  : ए-40, अलकापुरी, भोपाल : 402-024 दूरभाष : 0755-2450408

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