• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Khadan Se Khwabon tak: Sangmarmar

Khadan Se Khwabon tak: Sangmarmar

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 300

Special Price Rs. 270

10%

  • Pages: 170p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126717897
  •  
    पत्थर न केवल बोलते हैं, वरन् खूब मीठा बोलते हैं। यही नहीं, पत्थर मनुष्य से ज्यादा धैर्यवान व सहनशील हैं। पत्थरों का बाह्य आवरण जितना सख्त व निर्मम है, उनका अंतर्मन उतना ही कोमल व उदार है। बिलकुल श्रीफल की तरह। परिस्थितियों के साथ बदलने में तो पत्थरों का कोई सानी ही नहीं है। हाँ, वे जरूरत से ज्यादा स्वाभिमानी और स्वावलंबी है, अत: उन्हें सावधानी व मजबूती से भू-गर्भ से निकालना व संवारना पड़ता है। पत्थर आसानी से अपना रंगरूप नहीं बदलते, पर एक बार जो बदलाव स्वीकार कर लेते हैं, उसे स्थायी रूप से आत्मसात् कर लेते हैं। हम सबने देखा है कि पत्थर जब किसी भवन की नींव बनते हैं तो सहस्रों साल के लिए स्थितप्रज्ञ (समाधि में लीन) हो जाते हैं। पत्थर अत्यंत मजबूत व मेहनती हैं और दूसरों से भी ऐसी ही अपेक्षा करते हैं। याद करें, पाषाण युग। 10 हजार साल पहले मनुष्य पशुवत् जीवन जी रहा था। पत्ािरों ने ही उसे सलीके से जीने व जिंदा रहने के लिए संघर्ष करना सिखाया। यही नहीं, पत्थर ही मनुष्य के पहले मित्र-परिजन व शुभचिंतक बने। पत्थरों ने मनुष्य को हथियार बनकर सुरक्षा प्रदान की। पत्थरों को मदद से श्किाार करके ही मनुष्य ने अपना पेट भरा। आभूषण बन पत्थरों ने मनुष्य को सजाया व संवारा। फर्श व छत बन उन्हें प्रकृति के प्रकोप से बचाया। पत्थरों ने ही मानव समुदाय को वैभव व कीर्ति प्रदान की है। वस्तुत: पत्थर ही वह नींव (बुनियाद) है, जिन पर कदमताल करते हुए मनुष्य सभ्य हुआ और आज आकाश में उड़ान भर रहा है। पत्थरों की धरती माँ की कोख में प्रसव पीड़ा से उनके हम तक पहुँचने की दिलचस्प कहानी है यह पुस्तक।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Prakash Biyani

    किशोरावस्था से सतत् लेखन कर रहे प्रकाश बियाणी मूलत: बैंकर हैं। भारतीय स्टेट बैंक में 25 साल (1968-1995) नौकरी करने के बाद वे आठ साल देश के अग्रणी समाचार पत्र समूह 'दैनिक भास्कर’ में कार्पोरेट संपादक रहे हैं। देश के औद्योगिक परिदृश्य व उद्योगपतियों पर उनके दो हजार से ज्यादा लेख/साक्षात्कार/समीक्षाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। इस दौरान उन्हें देश के कई अग्रणी उद्योगपतियों से प्रत्यक्ष मुलाकात का सुअवसर भी मिला है एवं राष्टï्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बिजनेस मीट/ इवेंट्स में शिरकत करने का मौका भी। इन दिनों वे कार्पोरेट जगत व कंपनी मामलों पर स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। आपकी पुस्तक 'शून्य से शिखर’ (35 भारतीय उद्योगपतियों की यशोगाथा) को पाठकों खासकर बिजनेस स्कूल के छात्रों ने खूब सराहा है। अपने किस्म की इस अनूठी पुस्तक का द्वितीय संशोधित संस्करण एवं पेपरबैक संस्करण भी एक साल में मार्केट में लांच हो चुके हैं।

    'जो समाज धनोपार्जन करने वाले लोगों को कोसता है वह दरिद्रता में जीता है’ - स्व. धीरूभाई अंबानी के इस कथन से सहमत होते हुए

    श्री बियाणी का मत है कि राष्टï्रीय संपदा का समाज के हर वर्ग में न्यायोचित वितरण होना चाहिए। वे मानते हैं कि प्रतिस्पर्धा के ताजा दौर में केवल सर्वश्रेष्ठï ही बचेंगे पर शिक्षित व अशिक्षित अथवा कुशल व अकुशल हर शख्स को रोजगार के अवसर मिलना चाहिए। तद्नुसार यदि अब कोई चूक न हुई तो उदारीकरण व आर्थिक सुधार कार्यक्रम का दूसरा दौर देश के हर वर्ग को उनके वाजिब हक दिलवाएगा। इतिहास से सबक लेने की मंशा से लिखी गई है यह पुस्तक : 'जी, वित्तमंत्रीजी!’

    सम्पर्क : (०७३१) २५६०७७७, ०९३०३२२३९२८

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144