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Kavita Kya Hai

Kavita Kya Hai

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  • Pages: 95p
  • Year: 2018, 3rd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8171787053
  • ISBN 13: 9788171787050
  •  
    कबिता क्या है ?-इस प्रश्न के उत्तर में कोई एक सर्वसम्मत परिभाषा दे पाना कठिन है । जैसे हर मनुष्य का अपना एक रूप, स्वभाव और अंदाज होता है. वैसे ही हर भाषा और हर कविता का भी अपना रूप. स्वभाव और अंदाज होता है । इसलिए कविता के बारे में कोई सर्वमान्य निष्कर्ष, कोई ऐसी कसौटी, जिस पर हर काल और हर भाषा की कविता शत-प्रतिशत खरी उतरे. प्रस्तुत करना, और भी कठिन हो जाता है । अलग-अलग कालों में और अलग-अलग देशों में कविता के प्रतिमान भी बदलते रहे हैं । फिर भी. जिस प्रकार कुछ ऐसे सामान्य धर्म. होते हैं जहाँ विविध आकृति-प्रकृति के मनुष्य मिलते है और मनुष्य के रूप में अपनी पहचान सुरक्षित रखते हैं. उसी प्रकार कविता के भी कुछ बुनियादी तत्त्व होते हैं जिनके कारण विविध कालों, विविध भाषाओं में लिखी गई विविध भंगिमाओं वाली कविताएँ कविता के एक विशिष्ट रूप में पहचान ली जाती है । कविता के इन्हीं बुनियादी लक्षणों की चर्चा इस पुस्तक में हुई है । इस पुस्तक की सीमाओं में ज्यादा विस्तार की गुंजाइश न थी । पाठक केवल संकेत ग्रहण करेंगे और मानवता की महान कविता-परंपरा और काव्य-चिंतन के सूक्ष्म इतिहास में खुद घुसने और उसमें फुरसत से रमने की कोशिश करेंगे । -भूमिका से

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    Vishvnath Prasad Tiwari

    डा. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी (जन्म 1940) प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार हैं और इस समय वे साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष हैं। वे गोरखपुर से प्रकाशित होने वाली साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका दस्तावेज के संपादक हैं। यह पत्रिका रचना और आलोचना की विशिष्ट पत्रिका है, जो 1978 से नियमित प्रकाशित हो रही है। सन् 2011 में उन्हें व्यास सम्मान प्रदान किया गया।

    1940 में कुशीनगर के रायपुर भैंसही-भेडिहारी गांव में जन्में आचार्य विश्वनाथ प्रसाद तिवारी एक लोकप्रिय शिक्षक भी रहे। प्रो. तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद से वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए।

    आचार्य विश्वनाथ प्रसाद तिवारी साहित्य के अनवरत सहज साधक हैं। उन्होंने गांव की धूल भरी पगडण्डी से इंग्लैण्ड, मारीशस, रूस, नेपाल, अमरीका, नीदरलैण्ड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन और थाईलैण्ड की जमीन नापी है। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के कई सम्मान हासिल किये। रूस की राजधानी मास्को में साहित्य के प्रतिष्ठित पुश्किन सम्मान से नवाजे गये। उन्हें उत्तर प्रदेश की सरकार ने शिक्षक श्री का सम्मान दिया।

    रचनाएँ

    उनका रचनाकर्म देश और भाषा की सीमा तोड़ता है। उड़िया में कविताओं के दो संकलन प्रकाशित हुए। हजारी प्रसाद द्विवेदी पर लिखी आलोचना पुस्तक का गुजराती और मराठी भाषा में अनुवाद हुआ। इसके अलावा रूसी, नेपाली, अंग्रेजी, मलयालम, पंजाबी, मराठी, बांग्ला, गुजराती, तेलुगु, कन्नड़ व उर्दू में भी इनकी रचनाओं का अनुवाद हुआ।

    1978 से हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका 'दस्तावेज’ का लगातार प्रकाशन कर रहे हैं। वहीं इसके सम्पादक भी हैं। उनके शोध व आलोचना के 11 ग्रंथ, 7 कविता संग्रह, दो यात्रा संस्मरण, एक लेखकों का संस्मरण व एक साक्षात्कार पुस्तक प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने हिन्दी के कवियों, आलोचकों पर केन्द्रित 16 पुस्तकों का सम्पादन किया है।

    इसके लगभग दो दर्जन विशेषांक प्रकाशित हुए हैं, जो ऐतिहासिक महत्व के हैं। डा. तिवारी की प्रकाशित पुस्तकों की शृंखला में आलोचना की नौ पुस्तकें, 6 कविता संकलन, दो यात्रा संस्मरण, एक लेखक संस्मरण, एक साक्षात्कार संकलन तथा 147 विभिन्न पुस्तकों का संपादन शामिल है। साथ ही उनकी कई रचनाओं का विदेशी और भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान, भारत मित्र संगठन मास्को द्वारा पुश्किन सम्मान भी मिल चुका है। उनके द्वारा संपादित पत्रिका 'दस्तावेज’ को सरस्वती सम्मान भी मिल चुका है। उन्हें पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान 2007 से भी सम्मानित किया जा रहा है।

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