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Kattarata Jitegi Ya Udarata

Kattarata Jitegi Ya Udarata

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  • Pages: 247p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 8126709383
  •  
    यह पुस्तक भारतीय राजनीति और समाज को पिछले दो दशकों से मथने वाली सांप्रदायिकता की परिघटना को समझने और उसके मुकाबले कीप्रेरणा औरसम्यक समझ विकसित करने के उद्देश्य से लिखी गई है। चार खंडों - वाजपेयी (अटलबिहारी), संघ संप्रदाय, जॉर्ज फर्नांडीज,गुराज - में विभक्त इस पुस्तक में सांप्रदायिकता के चलते पैदा होनेवाली कट्टरता, संकीर्णता और फासीवादी प्रवृथ्तियों और उन्हें अंजाम देने में भूमिका निभाने वाले नेताओं, संगठनों, शक्तियों आदि का घटनात्मक ब्यौरों सहित विवेचन किया गया है। इसमें मुख्यतः सांप्रदायिकता के राष्ट्रीय जीवन के सामाजिक-सांस्कृतिक-शैक्षिक-अकादमिक आयामों पर पड़ने वाल दुष्प्रभावों/दुष्परिणामों की भी शिनाख्त और आकलन किया गया है। सांप्रदायिकता की विचारधारा भूमंडलीकरण की विचारधारा के साथ मिल कर देश की आर्थिक और राजनैतिक संप्रभुता पर गहरी चोट कर रही है। पुस्तक में दोनों के गठजोड़ का उद्घाटन करते हुए, उसके चलते दरपेश नवसाम्राज्यवादी खतरे के प्रति आगाह किया गया है। पुस्तक की विषयवस्तु सांप्रदायिकता और उससे होने वाले बिगाड़ को चिन्हित करने तक सीमित नहीं है। इसमें धर्मनिरपेक्षता, उदारता, लोकतंत्र और समाजवाद की विचारधारा के पक्ष मेंलगातार जिरह की गई है। इस रूप में यह सरोकारधर्मी और हस्तक्षेपकारी लेखन का सशक्त उदाहरण है। भाषा की स्पष्टता और शैली को रोचकता पुस्तक को सामान्य पाठकों ंके लिए पठनीय बनाती है।

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    Dr. Prem Singh

    डॉ. प्रेम सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में रीडर हैं। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में बतौर फैलो तीन वर्ष (1991-94) हिन्दी और बंगला उपन्यास में क्रांति के विचार का अध्ययन किया है। अध्ययन का एक भाग क्रान्ति का विचार और हिंदी उपन्यास शीर्षक से प्रकाशित है। इस पुस्तक पर हिंदी अकादमी दिल्ली का वर्ष 2000-2001 का साहित्यिक कृति सम्मान मिला है। अन्य प्रकाशित पुस्तकंे हैं - अज्ञेय: चिंतन और साहित्य, निर्मल वर्मा: सृजन और चिंतन (संपा.), मधु लिमये: जीवन और राजनीति (संपा.), कट्टरता जीतेगी या उदारता, रंग प्रक्रिया के विविध आयाम (संपा.)। दो कविता-संग्रह अभिशप्त जियो और पीली धूप पीले फूल एवं एक कहानी-संग्रह काँपते दस्तावेज भी प्रकाशित हैं।

    पत्र-पत्रिकाओं में कई आलोचनात्मक लेख और समीक्षाएँ तथा राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक विषयों पर अनेक लेख प्रकाशित हो चुके हैं।

    शीघ्र प्रकाश्य पुस्तकें हैं: साहित्य, समाज और राजनीति तथा प्रगतिशील राजनीति का गतिरोध।

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