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Kaisi Aagi Lagai

Kaisi Aagi Lagai

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  • Pages: 391p
  • Year: 2016, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126708857
  •  
    उपन्यास का महत्त्व दरअसल आजकल भी इसलिए बना हुआ है कि उपन्यास एक समानान्तर जीवन की परिकल्पना करते हैं। इस सन्दर्भ में असग़र वजाहत के उपन्यास ‘कैसी आगी लगाई’ में जीवन की विशद व्याख्या है, जीवन का विस्तार है और तमाम अन्तर्विरोधों के बीच से मानव-गरिमा और श्रेष्ठता के कलात्मक संकेत मिलते हैं। पिछले तीस साल से कहानियाँ और उपन्यासों के माध्यम से अपनी विशेष पहचान बना चुके असग़र वजाहत ने ‘कैसी आगी लगाई’ में विविधताओं से भरा एक जीवन हमारे सामने रखा है। यह जीवन बिना किसी शर्त पाठक के सामने खुलता चला जाता है। कहीं-कहीं बहुत संवेदनशील और वर्जित माने जानेवाले क्षेत्रों में उपन्यासकार पाठक को बड़ी कलात्मकता और सतर्कता से ले जाता है और कुछ ऐसे प्रसंग सामने आते हैं जो सम्भवतः हिन्दी उपन्यास में इससे पहले नहीं आए हैं। उपन्यास का ढाँचा परम्परागत है लेकिन दर्शक के सामने विभिन्न प्रसंग जिस तरह खुलते हैं, वह अत्यन्त कलात्मक है, एक व्यापक जीवन में लेखक जिस प्रसंग को उठाता है उसे जीवन्त बना देता है। ‘कैसी आगी लगाई’ में साम्प्रदायिकता, छात्र-जीवन, स्वातन्त्रयोत्तर राजनीति, सामन्तवाद, वामपन्थी राजनीति, मुस्लिम समाज, छोटे शहरों का जीवन और महानगर की आपाधापी के साथ-साथ सामाजिक अन्तर्विरोधों से जन्मा वैचारिक संघर्ष भी हमारे सामने आता है। उपन्यास मानवीय सरोकारों और मानवीय गरिमा के कई पक्षों को उद्घाटित करता है। जीवन और जगत के विभिन्न कार्य-व्यापारों के बीच कथा-सूत्र एक ऐसा रोचक ताना-बाना बुनते हैं कि पाठक उनमें डूबता चला जाता है। ‘कैसी आगी लगाई’ उन पाठकों के लिए आवश्यक है जो उपन्यास विधा से अतिरिक्त आशाएँ रखते हैं।

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    Asghar Wajahat

    जन्म : 1946, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश।

    शिक्षा : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए., पी-एच.डी. और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पोस्ट डाक्टोरल रिसर्च। 1971 से जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली के हिन्दी विभाग में अध्यापन। पाँच वर्षों तक ओत्वोश लोरांड विश्वविद्यालय, बुडापेस्ट, हंगरी में अध्यापन। यूरोप और अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में व्याख्यान।

    पाँच उपन्यास, दो लघु उपन्यास, छह पूर्णकालिक नाटक, यात्रा संस्मरण की तीन पुस्तकें, नुक्कड़ नाटकों का एक संग्रह और साहित्यिक आलोचना की एक पुस्तक प्रकाशित।

    प्रमुख प्रकाशन : सात आसमान, कैसी आगी लगाई, बरखा रचाई, मनमाटी (उपन्यास), मैं हिन्दू हूँ, डेमोक्रेसिया (कहानी संग्रह)।

    रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद। नाटकों के मंचन देश-विदेश की कई भाषाओं में हैं।

    रचनात्मक लेखन के अलावा नियमित रूप से विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेखन। 2007 में बीबीसी हिन्दी के अतिथि सम्पादक। 'हंस’ पत्रिका के लिए विशेष अतिथि सम्पादक के रूप में 'भारतीय मुसलमान : वर्तमान और भविष्य’ विषय पर और 'वर्तमान साहित्य’ के लिए 'प्रवासी साहित्य’ पर विशेषांकों का सम्पादन।

    फिल्मों के लिए पटकथाएँ लिखने के अलावा धारावाहिक और डॉक्यूमेंटरी फिल्में भी बनाई हैं।

    कथा यूके सम्मान और हिन्दी अकादेमी, दिल्ली से सम्मानित; कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित।

    चित्रकला और पर्यटन में गहरी रुचि।

    सम्प्रति : प्रोफेसर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली।

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