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Jugani

Jugani

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  • Pages: 126p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126717583
  •  
    अपनी दूसरी पुस्तक ‘जुगनी’ में पन्द्रह कहानियों के माध्यम से भावना शेखर ने आसपास घटती साधारण घटनाओं को भी असाधारण बनाने की अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है। सरल भाषा में परिपक्व भावनाओं को गूँथा गया है। अधिकांश कहानियाँ नारी पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती हैं और सफलतापूर्वक उनके अन्तर्मन में झाँकने का प्रयास करती हैं। भावना शेखर नारी-मन की कुशल चितेरी हैं - कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। सदियों से दमित-कुंठित और शोषित नारी का चित्रण करना लेखिका का अभीष्ट नहीं वरन् अन्याय से लोहा लेती नारी को अन्ततः विजयी दर्शाना इन्हें अवश्य प्रिय लगता है। प्रायः हर कहानी एक ‘पॉजिटिव नोट’ पर समाप्त होती है। वृन्दा हो या नीलांजना, देव या जुगनी - पात्रों का चरित्र-चित्रण तो प्रभावशाली है ही, पुरुष और नारी पात्रों की देहयष्टि का वर्णन भी लेखिका बेबाकी से कर जाती हैं - चाहे वह ‘त्रिकोण’ का हेमन्त हो या ‘वन्ध्या’ की अम्बिका या गोगो या ‘मलेच्छन’ की नैन्सी। भावना शेखर के लेखन में प्रकृति के साथ पात्रों का सहज ही साहचर्य स्थापित हो जाता है। पहाड़ों से अपने जुड़ाव के कारण वे पाठकों को भी प्रकृति-भ्रमण की ओर बरबस खींच लेती हैं। अपनी कहानियों के माध्यम से न केवल बचपन में बार-बार लौटती हैं अपितु सम्पूर्ण मानव जीवन की गतिविधियों पर एक दर्शनशास्त्री की तरह अपनी निश्छल टिप्पणी भी देती हैं। संक्षेप में, पुस्तक की सभी कहानियाँ धारदार और असरदार हैं। अतः निस्सन्देह पठनीय और संग्रहणीय हैं। डॉ. नरेन्द्रनाथ पांडेय

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    Bhavana Shekhar

    मूलत: हिमाचल प्रदेश से जुड़ी, दिल्ली में जन्मीं। 'लेडी श्रीराम कॉलेज’ से स्नातक व स्नातकोत्तर (द्वय) की पढ़ाई कर 'दिल्ली विश्वविद्यालय’ से संस्कृत में पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। गत पच्चीस वर्षों से अध्यापन के साथ-साथ आकाशवाणी व दूरदर्शन से जुड़ाव। रेडियो फीचर, वार्ताएँ, नाटक, समीक्षा, कविता व कहानी-लेखन में रुचि।

    प्रकाशित पुस्तकें : आस्तिक दर्शनों में प्रतिपादित मीमांसा सिद्धान्त (शोध-ग्रन्थ), सत्तावन पंखुड़ियाँ (कविता-संग्रह), जीतो सबका मन (बालगीत-संग्रह), जुगनी, खुली छतरी (कहानी-संग्रह)।

    अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न रचनाएँ प्रकाशित।

    2011 में राष्ट्रीय स्तर की बालकथा-प्रतियोगिता में कहानी 'गुलाब का फूल’ को सर्वश्रेष्ठ कहानी चुने जाने पर 'मधुबन सम्बोधन पुरस्कार’ से सम्मानित।

    सम्प्रति : पटना में निवास, बिहार।

    मो. : 09334708478

    ई-मेल : bhavnashekhar8@gmail.com

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