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Jigari

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  • Pages: 116
  • Year: 2015, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728466
  •  
    'जिगरी' अशोक कुमार का सर्वाधिक चर्चित और पुरस्कृत उपन्यास है, जिसे इन्होने एक हफ्ते तक एक मदारी के साथ रहकर उसके पेशे और उसके भालू के स्वाभाव-व्यवहार का अध्ययन करने के बाद लिखा था ! 'अमेरिकन तेलुगु एसोसिएशन' की उपन्यास लेखन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार के लिए चुने जाने के बाद इसका यह हिंदी अनुवाद 2008 में साहित्य अकादेमी की पत्रिका 'समकालीन भारतीय साहित्य' में प्रकाशित हुआ ! उपन्यास की लोकप्रियता का यह प्रमाण है कि उस हिंदी अनुवाद के आधार पर इसके मराठी, पंजाबी, ओड़िया, कन्नड़, बांग्ला, मैथिली आदि भाषाओँ के अनुवाद पुस्तकाकार प्रकाशित हुए हैं ! बाद में इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ ! अति संवेदनशील कथानक से युक्त इस उपन्यास में एक भालू और एक मदारी की कथा है, जिसमे मदारी की जीविका का आधार बने भालू के हाव-भाव, क्रिया-कलापों, क्रोध, अपनत्व आदि का तथा मदारी के साथ उसके आत्मीय संबधों का मार्मिक चित्रण किया गया है ! यह है तो एक लघु उपन्यास पर सवाल बड़े खड़े कर देता है ! 'वन्य जीव संरक्षण कानून' वन्य प्राणियों के संरक्षण की दिशा में एक स्वागतयोग्य कदम है ! लेकिन यहाँ यह भी सत्य कि प्राणी और मनुष्य के बीच प्रेम और ममता का ऐसा मजबूत सम्बन्ध होता है जो कानून का उल्लंघन भी लग सकता है ! आज जब मानवीय संवेदनाएँ मंद-दुर्बल पड़ती जा रही हैं, अधिकांशतः औपचारिक मात्र रह गई हैं, यह उपन्यास इन संवेदनाओं को बचाए रखने की आवश्यकता की ओर बरबस हमारा ध्यान खींचता है ! जिवंत अनुवाद में प्रस्तुत एक अत्यंत पठनीय उपन्यास !

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    P. Ashok Kumar

    प. अशोक कुमार

    प. अशोक कुमार तेलुगु के एक ऐसे महत्तपूर्ण कथाकार हैं जिन्होंने तेलंगाना के जनजीवन को लेकर पीड़ा और आवेग के साथ विस्तृत लेखन किया है और तेलुगु साहित्य को समृद्ध किया है ! अब तक इनके दो उपन्यास और छह कहानी-संकलन प्रकाशित हैं ! जीविकोपार्जन के लिए इनके इलाके से खाड़ी के देशों में गए हुए लोगों की विवशता और यातनाओं को लेकर लिखा गया इनका उपन्यास 'रेगिस्तान की लपटें' तथा इसी विषय पर लिखी इनकी कई कहानियां बहुप्रशंसित एवं पुरस्कृत हैं !

    सन 1966 में जन्मे अशोक कुमार भारतीय भाषा परिषद् के 'युवा लेखक पुरस्कार', तेलुगु विश्वविद्यालय के 'धर्म्निधि पुरस्कार' तथा 'प्रतिभा पुरस्कार, अप्पाजोस्युला विष्णुभोट्ला फाउंडेशन के 'विशिष्ट उपन्यासकार पुरस्कार' समेट अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं !

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