• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Jee Haan Likh Raha Hoon

Jee Haan Likh Raha Hoon

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 150

Special Price Rs. 135

10%

  • Pages: 168p
  • Year: 2012
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126722600
  •  
    व्यक्ति के मन, जीवन की छटपटाहट और असन्तोष कैसे कविता में आकर अभिव्यक्ति के फार्म्स और साहित्य की संस्थाबद्धताओं के विरुद्ध संघर्ष में बदल जाता है, यह देखना हो तो निशान्त की ये कविताएँ पढ़नी चाहिए। यह हाशिए से चलकर केन्द्र तक आए एक रचना-विकल मन का आक्रोश है जो इस संग्रह की, विशेषकर तीन लम्बी कविताओं में अपना आकार पाने, अपनी पहचान को एक रूप देने की अथक और अबाध कोशिश कर रहा है। नाभिक से फूटकर वृत्त की परिधि रेखा की तरफ ताबड़तोड़ बढ़ता यह विस्फोट हर उस दीवार, मठ और शक्ति-केन्द्र को ध्वस्त करना चाहता है जो एक उगते हुए अंकुर के विकास को लगभग अपना कर्त्तव्य मानकर बाधित करना चाहते हैं। एक तरह से यह बीसवीं सदी के आखिरी दशक में उभरी प्रतिरोध की वह युवा-मुद्रा है जिसे अपना हर रास्ता या तो अवरुद्ध मिला या फिर बेहद चुनौतीपूर्ण। समाज में बाजार अपनी चकाचौंध के साथ पसरा हुआ था और भाषा में संवेदना, परदुख और सरोकार आदि शब्दों के बड़े व्यापारी अपनी उतनी ही चमकीली दुकानें फैलाए बैठे थे! इस संग्रह में शामिल तीनों लम्बी कविताएँ - ‘कबूलनामा’, ‘मैं में हम, हम में मैं’ और ‘फिलहाल साँप कविता’ - इन सब आक्रान्ता बाजारों-दुकानों के पिछवाड़े टँगे खाली कनस्तरों को पीटने और पीटते ही चले जाने का उपक्रम है। उम्मीद है यह कर्ण-कटु ध्वनि आपको रास आएगी। साथ में हैं ‘कोलकाता’ और विभिन्न चित्रकारों की चित्रकृतियों पर केन्द्रित दो कविता-शृंखलाएँ जिनमें निशान्त का कवि अपनी काव्य-भूमि को नई दिशाओं में बढ़ाते हुए अपने पाठक को अनुभूति की अपेक्षाकृत दूसरी दुनिया में ले जाता है।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Nishant

    जन्म: 4 अक्टूबर, 1978, लालगंज, बस्ती (उ.प्र.)। निशान्त का शैक्षणिक नाम ‘बिजय कुमार साव’ है और घर का ‘मिठाईलाल’। पहली कविता 1993 में मिठाईलाल के नाम से ‘जनसत्ता’ में प्रकाशित। कुछ दिन इसी नाम से कविताएँ छपती और प्रशंसित होती रहीं। कई कविताओं के बांग्ला व अंग्रेज़ी सहित विभिन्न भाषाओं में अनुवाद।

    पचीस साल तक पश्चिम बंगाल में रहते हुए वहाँ की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के सक्रिय कार्यकर्त्ता। बांग्ला संस्कृति और बांग्ला फिल्मों से लगाव, बांग्ला कवि जय गोस्वामी और बुद्धदेव दासगुप्ता की कविताओं का हिन्दी में अनुवाद। कोलकाता विश्वविद्यालय से ‘स्नातक’। रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय से ‘अनुवाद’ में डिप्लोमा।

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के लिए महाश्वेता देवी के उपन्यास ‘अरण्येर अधिकार’ (जंगल के दावेदार) पर आधारित एम.ए. के पाठ्यक्रम के लिए पाठ्य-सामग्री का अनुवाद। अनन्त कुमार चक्रवर्ती की पुस्तिका ‘वन्दे मातरम् का सुर: उत्स और वैचित्रय’ का अनुवाद। ज्ञानरंजन की आठ कहानियों के संग्रह के हिन्दी से बांग्ला में अनुवाद में सहायक।

    पेट और पढ़ाई के लिए विभिन्न नौकरियों, व्यवसाय एवं विश्वविद्यालयों से होते हुए, वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अध्ययन। भारतीय ज्ञानपीठ की युवा पुरस्कार योजना के अन्तर्गत पहला काव्य-संग्रह ‘जवान होते हुए लड़के का कबूलनामा’ प्रकाशित!

    रवीन्द्रनाथ टैगोर की 13 कविताओं पर आधारित फिल्म- त्रयोदशी में अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त फिल्मकार-कवि बुद्धदेव दासगुप्ता के साथ बतौर सहायक निर्देशक और अभिनेता कार्य।

    सम्पर्क: 09868099983

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144