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Itihas Mein Abhage

Itihas Mein Abhage

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  • Pages: 126
  • Year: 2017, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126729807
  •  
    दिनेश कुशवाह हमारे समय के महत्त्वपूर्ण कवि हैं। उनकी काव्य प्रतिभा का क्या कहना! निरन्तर अमूर्त, नीरस, उजाड़ और अपठनीय होती हिन्दी कविता को उन्होंने 'इसी काया में मोक्ष' जैसा मुहावरा दिया जो समकालीन हिन्दी कविता के लिए नया अध्याय साबित हुआ। उनका दूसरा कविता-संग्रह 'इतिहास में अभागे' मानुष सत्यों की बेजोड़ कविताई है। दिनेश जी 'असिधाराव्रती' हैं। तलवार की धार पर चलने में उन्हें मजा आता है। अद्भुत कथन शैली, देशी मिठास और शास्त्रीय परिर्माजन से भरी भाषा का जो मणिकांचन योग दिनेश कुशवाह की कविता में उपस्थित होता है, अन्यत्र दुर्लभ है। कल्पना, प्रतीकों और बिम्बों से सज्जित अपनी कविता में वे वैज्ञानिक-दार्शनिक तर्कों के साथ ऐसी सरसता न जाने कहाँ से लाते हैं! जबकि वैचारिक आधार और राजनीतिक दृष्टि ही उनकी कविता के पाथेय हैं। प्रेम एवं करुणा की जो पुकार दिनेश कुशवाह की कविता में मिलती है, उसके अनुकरण में बार-बार अनेक कवि कंठ फूट पड़ते हैं। वे कबीर की तरह सच को सबसे बड़ा तप मानते हैं, और मुक्तिबोध की तरह अभिव्यक्ति के खतरे उठाना जानते हैं। 'चल्लू भर पानी का सनातन प्रश्न', 'भूमंडलीकृत आषाढ़ का एक दिन', 'महारास', 'आज भी खुला है अपना घर फूँकने का विकल्प', 'उजाले में आजानुबाहु', 'इतिहास में अभागे', 'मैंने रामानन्द को नहीं देखा', 'बहेलियों को नायक बना दिया', 'अच्छे दिनों का डर', 'विश्वग्राम की अगम अँधियारी रात', 'भय सेना', 'प्रेम के लिए की गई यात्राएँ', 'ईश्वर के पीछे', 'प्राणों में बाँसुरी' 'हर औरत का एक मर्द है', 'हरिजन देखि', 'यह पृथ्वी बच्चों के लिए है' तथा 'पूछती है मेरी बेटी' आदि कविताएँ इस बात का प्रमाण हैं। काव्य विषयों के नवाचार के मामले में तो दिनेश कुशवाह का कोई शानी नहीं है। वे वाणी के उद्भट पंडित और काव्य के मर्मज्ञ कवि हैं। रूढिय़ों, अवैज्ञानिक धारणाओं, अन्धविश्वासों, अविचारित आस्थाओं, नियोजित पाखंडों, सुनियोजित षड्यंत्रों तथा कपट कुचालों पर कठिन कुठाराघाट करने से वे कभी नहीं चूकते। कविता और जीवन दोनों में उनकी वाक्शक्ति से हत्प्रभ विरोधी भी सहज बैर बिसराकर उनका बखान करने लगते हैं। —शिवमूर्ति

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    Dinesh Khuswaha

    दिनेश कुशवाह
    जन्म : 8 जुलाई, 1961 । ग्राम–गहिला, सतराँव, देवरिया (उ–प्र–) में ।
    शिक्षा : एम–ए–, पी–एच–डी– (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) ।
    कृतित्व : कविताएँ हिन्दी की सभी शीर्षस्थ पत्र–पत्रिकाओं में प्रकाशित । कुछ कविताएँ दूसरी भारतीय भाषाओं में अनूदित । एक दशक तक साम्यवादी छात्र राजनीति के पूर्णकालिक कार्यकर्ता । राहुल सांकृत्यायन पर लम्बे समय तक शोध कार्य । 1985 से काव्य–रचना और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय । पहली बार कविताएँ सोमदत्त द्वारा सम्पादित ‘साक्षात्कार’ के अंक अप्रैल–जून 1989 में प्रकाशित । खूब घुम्मकड़ी की । फिलहाल कविता को लोगों के बीच ले जाने के आन्दोलन ‘‘अलावों के बीच मशाल की लौ पर कविता’’ को लेकर सक्रिय । राहुल के कथा साहित्य पर एक आलोचना–पुस्तक प्रकाशित ।
    सम्मान : सन् 1994 के ‘निराला सम्मान’ से सम्मानित ।
    सम्प्रति : अध्यक्ष, हिंदी विभाग, प्रभारी आचार्य, जनजातीय अध्ययन केन्द्र, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा (म–प्र–) । निदेशक, महाकवि केशव अध्यापन एवं अनुसंधान केन्द्र, ओरछा ।
    सम्पर्क : एफ–1, विश्वविद्यालय परिसर, रीवा–486003 (म–प्र–) ।

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