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Hum Nahin Change...Bura Na Koy

Hum Nahin Change...Bura Na Koy

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  • Pages: 422p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388933254
  •  
    लगभग 300 उपन्यास लिखने वाले सुरेंद्र मोहन पाठक ने पल्प फिक्शन को एक नया आयाम देने का काम किया है। इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज़ की नौकरी करते हुए हिंदी पल्प फिक्शन की एक मजबूत धुरी बन जाना एक असाधारण बात थी। ऐसी सफलता रातोरात नहीं आती। इन्हें भी असफलताओं ने चुनौती दी लेकिन निरंतर संघर्ष करते हुए ये लोकप्रिय साहित्य के सिरमौर बने। न केवल अपने लिए एक बड़ा पाठक वर्ग तैयार किया, बल्कि हिंदी लोकवृत्त में पढ़ने की संस्कृति के बढ़ावे पर बात करते रहे। यह किताब उनकी आत्मकथा का एक तरह से दूसरा भाग है। बचपन से कॉलेज के दिनों तक की कथा ‘न बैरी न कोई बेगाना’ किताब में है। उससे आगे बढ़ते हुए संघर्ष के दिनों, जवानी, रोजगार, लेखन और गृहस्थी तक की कथा इस खंड 'हम नहीं चंगे बुरा न कोय' में है.

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    Surendra Mohan Pathak

    सुरेन्द्र मोहन पाठक

    सुरेन्द्र मोहन पाठक का जन्म 19 फ़रवरी, 1940 को खेमकरण, अमृतसर, पंजाब में हुआ। विज्ञान में स्नातक की उपाधि लेने के बाद आप ‘इंडियन टेलीफ़ोन इंडस्ट्रीज़’ में नौकरी करने लगे। पढऩे के शौक़ीन पाठक जी ने मात्र 20 वर्ष की उम्र में ही अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त उपन्यासकार इयान फ्लेमिंग रचित ‘जेम्स बांड’ सीरीज़ और जेम्स हेडली चेज़ (James Hadley Chase) के उपन्यासों का अनुवाद करना शुरू कर दिया था।

    सन् 1949 में आपकी पहली कहानी, ‘57 साल पुराना आदमी’, ‘मनोहर कहानियाँ’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई। आपका पहला उपन्यास ‘पुराने गुनाह नए गुनाहगार’ सन् 1963 में ‘नीलम जासूस’ नामक पत्रिका में छपा था। 1963 से 1969 तक आपके उपन्यास विभिन्न पत्रिकाओं में छपते रहे।

    सुरेन्द्र मोहन पाठक के सबसे प्रसिद्ध उपन्यास ‘असफल अभियान’ और ‘खाली वार’ थे। इनके प्रकाशन के बाद पाठक जी प्रसिद्धि के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच गए। इसके बाद अब तक पीछे मुडक़र नहीं देखा है। 1977 में छपे आपके उपन्यास ‘पैंसठ लाख की डकैती’ की अब तक ढाई लाख प्रतियाँ बिक चुकी हैं। जब इसका अनुवाद अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ तब इसकी ख़बर ‘टाइम’ मैगज़ीन में भी प्रकाशित हुई। पाठक जी के अब तक 300 से अधिक उपन्यास छप चुके हैं और वे अपने शुरुआती जीवन की कथा ‘न बैरी न कोई बेगाना’ नाम से लिख चुके हैं।

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