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Vande Mataram

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  • Pages: 135p
  • Year: 2008
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126715305
  •  
    राष्ट्रगान वंदे मातरम् आरंभ से ही विवाद के केंद्र में है। इसकी रचना, लोकप्रियता और विवाद तीनों का इतिहास एक ही है। इतिहासकार और समाजशास्त्री सब्यसाची भट्टाचार्य ने वंदे मातरम् पुस्तक में इसी इतिहास-कथा को सिलसिलेवार और सप्रमाण बतलाने का सार्थक यत्न किया है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने सन् 1870 के दशक के शुरुआती वर्षों में इसे वंदना-गीत के रूप में रचा। 1881 में इसे उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया। कथा-संदर्भ के भीतर इस गीत ने विस्तृत रूपाकार में हिन्दू-युद्धघोष का रूप धारण कर लिया। सन् 1905 में बंगाल के आंदोलन ने इस गीत को राजनीतिक नारे में तब्दील कर दिया। कहा जाता है कि जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में इसे पहली बार गाया। 1920 तक विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित होकर यह राष्ट्रीय हैसियत पा चुका था। 1930 में गीत के बिंब-विधान, व्यंजना और बुतपरस्ती को लेकर व्यापक विरोध हुआ। सन् 1937 में गीत के उन अंशों को छाँट दिया गया, जिनको लेकर आपत्तियाँ थीं तथा शेषांश को राष्ट्रगान के रूप में अपना लिया गया। विभिन्न समय और संदर्भों में गीत के ‘पाठ’ और ‘पाठक’ के बीच जारी संवाद में निरंतरता और परिवर्तन को जानना इस पुस्तक का सबसे दिलचस्प पहलू है। लेखक इसमें संवाद की ऐतिहासिकता को रेखांकित करता है।

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    Sabyasachi Bhattacharya

    सब्यसाची भट्टाचार्य

    जन्म: 21 अगस्त, सन् 1938 को कोलकाता में हुआ।

    शिक्षा: एम.ए., डी-फिल.।

    जादवपुर विश्वविद्यालय में (1960-61); इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कोलकाता (1965-68) तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली (1971-75) में सहायक प्राध्यापक।  शिकागो  विश्वविद्यालय  (1968-69); ऑक्सफोर्ड (1969-71) तथा मैक्सिको (1977-78) में प्राध्यापन और शोध-कार्य।

    भारतीय इतिहास कांग्रेस के आधुनिक इतिहास विभाग के सभापति (1982)।

    कृतियाँ: भारत में 1857 की क्रांति के बाद के दो दशकों में ब्रिटिश राज की वित्तीय नीतियों पर केंद्रित शोध-प्रबंध फाइनेंशियल फाउंडेशंस ऑफ ब्रिटिश राज अंग्रेजी (1971), बंगाली (1978) और हिंदी (1981) में प्रकाशित। संपादित पुस्तकें: इकोनॉमिक हिस्ट्री (मुंशीराम मनोहर लाल, 1987) तथा सिचुएटिंग इंडियन हिस्ट्री (सहयोग प्रो. रोमिला थापर)।

    संप्रति: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आर्थिक इतिहास के प्राध्यापक तथा स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन।

    भारत सरकार के इंडियन हिस्टॉरिकल रेकाडर्स कमीशन के सदस्य।

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