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Pracheen Bharat Ka Samajik Evam Arthik Itihas

Pracheen Bharat Ka Samajik Evam Arthik Itihas

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  • Pages: 334p
  • Year: 2017, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126711895
  •  
    परम्परागत इतिहास लेखन राजनीतिक उथल-पुथल तक ही सीमित था। परन्तु पिछले कुछ दशकों से अतीत के समाज में झाँकने की कोशिशें तेज हुई हैं। राजा- महाराजाओं की जगह वंचितजनों को केन्द्र में रखकर इतिहास लिखने के जो प्रयत्न इधर हो रहे हैं, उनमें ओमप्रकाश प्रसाद का योगदान भी उल्लेखनीय है। इस पुस्तक में उन्होंने प्राचीन भारत की सामाजिक स्थिति, आर्थिक दशा और सांस्कृतिक उपलब्धियों पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला है। लेखक ने वर्णव्यवस्था और ब्राह्मण-क्षत्रिय संघर्ष के साथ-साथ प्राचीन भारत में शूद्रों की दशा पर भी विचार किया है और नगरीकरण तथा भारत-रोम व्यापार आदि के माध्यम से तत्कालीन आर्थिक हालात को सामने लाने का प्रयत्न किया है। लेखक ने इतिहास के विपुल स्रोतांे और शोध-संदर्भों का उपयोग करते हुए प्राचीन भारत का सामाजिक और आर्थिक इतिहास को व्यापक जानकारियों वाला बहुपयोगी ग्रंथ बनाने का प्रयत्न किया है। कोई दो हजार वर्षों के भारतीय जनजीवन को जानने-समझने के लिए यह एक जरूरी पुस्तक है।

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    Om Prakash Prasad

    डॉ. ओम् प्रकाश प्रसाद 1980 ई. से स्नातकोत्तर इतिहास विभाग, पटना विश्वविद्यालय (बिहार) में प्राध्यापक (ऐसोशिएट प्रोफ़ेसर) के रूप में कार्यरत हैं। प्रोसीडिंग्स ऑफ़ इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस में इनके क़रीब 10 शोध लेख प्रकाशित हैं। इसके गोल्डन जुबली वॉल्यूम (सम्पादक: वी.डी. चट्टोपाध्याय) में इनका चयनित शोध लेख प्रकाशित है। दिल्ली विश्वविद्यालय हिन्दी कार्यान्वयन निदेशालय (दिल्ली-7), खुदाबख्श पब्लिक ओरियंटल लाइब्रेरी (पटना), के.पी. जायसवाल शोध संस्थान, पटना एवं अन्य मान्यता प्राप्त प्रकाशनों से डॉ. प्रसाद की कई पुस्तकें प्रकाशित हैं। राजकमल प्रकाशन से कलियुग पर प्रकाशित पुस्तक को इस विषय पर प्रथम पुस्तक की मान्यता मिली है। इस प्रकाशन से प्रकाशित होनेवाली दूसरी पुस्तक प्राचीन विश्व का उदय एवं विकास है। डॉ. प्रसाद आजकल स्नातकोत्तर इतिहास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पढ़ाते हैं। डॉ. प्रसाद को इंडियन काउंसिल ऑफ़ हिस्टोरिकल रिसर्च, नई दिल्ली से स्टडी ग्रांट, ट्रैवल ग्रांट, फैलोशिप और पब्लिकेशन ग्रांट मिल चुका है। शोध-प्रबन्ध डिके एंड रिवाइवल ऑफ़ मिडिवल टॉउन्स इन कर्नाटका के परीक्षक प्रोफ़ेसर रामशरण शर्मा और प्रोफ़ेसर एम.जी.एस. नारायणन थे।

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