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Hindi Upanyas Ka Itihas

Hindi Upanyas Ka Itihas

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  • Pages: 497p
  • Year: 2016, 6th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126704019
  •  
    हिन्दी उपन्यास का इतिहास बीसवीं शताब्दी के अन्त के साथ हिन्दी उपन्यास की उम्र लगभग 130 वर्ष की हो चुकी है। बड़े ही बेमालूम ढंग से 1970 ई. में पं. गौरीदत्त की देवरानी-जेठानी की कहानी के रूप में इसका जन्म हुआ, जिसकी तरफ लगभग सौ वर्षों तक किसी का ध्यान भी नहीं गया। लेखक ने पुष्ट तर्कांे के आधार पर देवरानी-जेठानी की कहानी को हिन्दी के प्रथम उपन्यास के रूप में स्वीकार किया है और 1970 ई. से 2000 ई. तक की अवधि में हिन्दी उपन्यास के ऐतिहासिक विकास को समझने का प्रयास किया है। हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकों के प्रामाणिक विवरण का अभिलेख सुरक्षित रखने की समृद्ध और विश्वसनीय परम्परा प्रायः नहीं है। इस कारण हिन्दी साहित्य के इतिहास-लेखन में अनेक प्रकार की मुश्किलें आती हैं। इस पुस्तक में पहली बार लगभग 1300 उपन्यासों का उल्लेख उनके प्रामाणिक प्रकाशन-काल के साथ किया गया है। यह दावा तो नहीं किया जा सकता कि इस किताब में कोई महत्त्वपूर्ण उपन्यासकार या उपन्यास छूट नहीं गया है, पर इस बात की कोशिश जरूर की गई है। साहित्य के इतिहास में सभी लिखित-प्रकाशित रचनाओं का उल्लेख न सम्भव है न आवश्यक, इसलिए सचेत रूप में भी अनेक उपन्यासों का जिक्र इस पुस्तक में नहीं किया गया है। साहित्य के इतिहास में पुस्तकों की प्रकाशन-तिथियों की प्रामाणिकता के साथ-साथ यह भी जरूरी होता है कि सम्बद्ध विधा के विकास की धाराओं की सही पहचान की जाए। विधा के रूप में हिन्दी उपन्यास का विकास अभी जारी है। विकास ‘ऐतिहासिक काल’ में ही होता है और इतिहास में प्रामाणिक तथ्यों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। कोशिश यह की गई है कि यह पुस्तक हिन्दी उपन्यास का मात्र ‘इतिहास’ न बनकर ‘विकासात्मक इतिहास’ बने।

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    Gopal Ray

    जन्म : 13 जुलाई, 1932 को बिहार के बक्सर जिले के एक गाँव, चुन्नी में, (मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र के अनुसार)।

    शिक्षा : आरम्भिक शिक्षा गाँव और निकटस्थ कस्बे के स्कूल में। माध्यमिक शिक्षा बक्सर हाई स्कूल, बक्सर और कॉलेज की शिक्षा पटना कॉलेज, पटना में। स्नातकोत्तर शिक्षा हिन्दी-विभाग पटना विश्वविद्यालय, पटना में। पटना विश्वविद्यालय से ही 1964 में 'हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव’ विषय पर डी.लिट. की उपाधि।

    21 फरवरी, 1957 को पटना विश्वविद्यालय, पटना में हिन्दी प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति और वहीं से 4 दिसम्बर, 1992 को प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्ति।

    प्रकाशित पुस्तकें : हिन्दी कथा साहित्य और उसके विकास पर पाठकों की रुचि का प्रभाव (1966), हिन्दी उपन्यास कोश: खंड-1 (1968), हिन्दी उपन्यास कोश: खंड-2 (1969), उपन्यास का शिल्प (1973), अज्ञेय और उनके उपन्यास (1975), हिन्दी भाषा का विकास (1995)। हिन्दी कहानी का इतिहास-1 (2008), हिन्दी कहानी का इतिहास-2 (2011), हिन्दी कहानी का इतिहास-3 (2014)।

    'उपन्यास की पहचान’ शृंखला के अन्तर्गत : शेखर: एक जीवनी (1975), गोदान : नया परिप्रेक्ष्य (1982), रंगभूमि: पुनर्मूल्यांकन (1983), मैला आँचल (2000), दिव्या (2001), महाभोज (2002), हिन्दी उपन्यास का इतिहास (2002), उपन्यास की संरचना (2005),  अज्ञेय और उनका कथा-साहित्य (2010)।

    सम्पादन : पं. गौरीदत्त कृत देवरानी-जेठानी की कहानी (1966), हिन्दी साहित्याब्द कोश : 1967-1980 (1968-81), राष्ट्रकवि दिनकर (1975)।

    सम्प्रति : हिन्दी साहित्य का इतिहास लेखन में सक्रिय। जुलाई, 1967 से समीक्षा का सम्पादन-प्रकाशन (जारी)।

    सम्पर्क : द्वारा डॉ. सत्यकाम, एच-2, यमुना, इ.गा.रा.मु. विश्वविद्यालय आवासीय परिसर, मैदानगढ़ी,

    नई दिल्ली-110068

    मो. नं. 9868006001

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