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Gapodi se Gapshap : Kashinath Singh se Samvad

Gapodi se Gapshap : Kashinath Singh se Samvad

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  • Pages: 191p
  • Year: 2013, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126724918
  •  
    ‘गपोड़ी से गपसप’ विख्यात कथाकार काशीनाथ सिंह के साक्षात्कारों का संकलन है | विविध विधाओं में रचने के बाद भी बहुत कुछ ऐसा है जो अनकहा रह जाता है | कई बार जब लेखक प्रश्नों से घिरता है अथवा जब प्रश्न-प्रतिप्रश्न की प्रक्रिया प्रारंभ होती है तब वह अनकहा व्यक्त होने लगता है | प्रस्तुत पुस्तक के संपादक पल्लव के अनुसार— कथाकार की बातें कैसी होती है? अलबत्ता इससे भी पहले यह पूछना चाहिए कि क्या है जो कहने से रह गया? काशीनाथ सिंह से की गई बातचीतों को संजोते हुए इन सवालों का उभरना अस्वाभाविक तो नहीं है | कहना चाहिए कि ये बातचीतें बहुधा उनके पाठकों, प्रशंसकों या उनके साहित्य में दिलचस्पी रखने वाले जिज्ञासुओं के कारण संभव हुई | इन बातचीतों का समय भी बहुत व्यापक है | लगभग तीस सालों का सफ़र पूरा करतीं ये मुलाकातें अपने स्वाभाव में आत्मीय गपशप हैं | लेखक का संकोच और प्रश्नकर्ता की तमाम जिज्ञासाएँ मिलकर बातचीत को उत्तेजक नहीं बनातीं, न ही ये कथाकार के श्रीमुख से निकले आप्त-वचनों का सुसंकलन बन रही हैं | अपितु संशय, आत्मालोचना और जनतांत्रिकता इन संवादों को पठनीय बनाते हैं | लेखक इनमें औपचारिक होने से बचता है और जो कहा है सीधे-बेलाग | पाठक जानते है कि काशीनाथ सिंह विचारों को व्यक्त करते समय ‘भाषा को दरेरा’ देते रहते हैं | यही कारन है कि विभिन्न विषयों पर उनकी टिप्पणियाँ व्यापक विमर्शों का आधार बनती रही हैं | यह भी कि इन साक्षात्कारों से गुजरने के बाद काशीनाथ सिंह के व्यक्तित्व-कृतित्व के प्रति पाठक का दृष्टिकोण संशोधित-परिष्कृत होता है |

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    Pallav

    कथा आलोचना में घनघोर दिलचस्पी रखने वाले पल्लव पेशे से अध्यापक हैं और बनास जन नाम से एक पत्रिका का सम्पादन-प्रकाशन भी करते हैं। राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार से सम्बन्ध रखने वाले पल्लव ने अब तक जिन किताबों का लेखन किया है उनमें 'मीरा : एक पुनर्मूल्यांकन’, 'कहानी का लोकतंत्र’ और 'लेखकों का संसार’ मुख्य हैं। उन्होंने काशीनाथ सिंह के साक्षात्कारों का एक संकलन 'गपोड़ी से गपशप’ के नाम से तैयार किया है। कुछ पुरस्कारों और सम्मानों के धनी पल्लव कहानी आलोचना के क्षेत्र में उन उत्सुक युवाओं में से हैं जो लगातार अपने काम से पाठकों का ध्यान आकृष्ट करते रहे हैं। कहानीकार स्वयं प्रकाश और कथाकार काशीनाथ सिंह की कृतियों पर आए उनकी पत्रिका के अंक इसकी गवाही देते हैं। एक से ज्यादा डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की पटकथा लिख चुके पल्लव समीक्षा कर्म को रचनात्मक चुनौती मानते हैं और नियमित रूप से अखबारों-लघु पत्रिकाओं में लिखना उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी लगता है।

    सम्पर्क : 393, डीडीए, कनिष्क अपार्टमेंट, ब्लॉक-सी एंड डी, शालीमार बाग़, दिल्ली-110088

    फोन : +९१ -११- २७४९८८७६

    ई-मेल : pallavkidak@gmail.com

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