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Faiz

Faiz

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  • Pages: 220p
  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126718214
  •  
    ‘‘फ़ैज़ की शाइरी ऐसे ज़िन्दा इशारों का पर्याय है जो दर्द की चीख़ और कराह को कसकर अन्दर ही अन्दर दबाए और छुपाए हुए हैं, मगर जो दरअस्ल दबाए दबते हैं न छुपाए छुपते।’’ ‘‘फ़ैज़ की शाइरी एक ऐसा संगीत है जो मालूम तो होता है रोमानी, मगर असलन् इज्तिहादी है - अपने रोमानी तेवर में भी ख़ालिसन् इन्क़्ि$लाबी। यानी संघर्षों में उसका जन्म हुआ है।’’ ‘फ़ैज़’ के कलाम में वह नर्मी और मिठास है जो मन को मोह लेती है। जिस गहरी समझ, भावनागत निश्छलता और कलात्मकता से प्रेमानुभूतियों को उन्होंने सामाजिक समस्याओं के साथ मिलाकर पेश किया है, वह अपने-आपमें अभूतपूर्व है। उनकी नज़्में उर्दू की बेहतरीन नज़्में हैं और नज़्म की सारी विशेषताएँ और भी निखर-सँवरकर उनकी ग़ज़लों में ढल गई हैं। ‘फ़ैज़’ मानवीय मूल्यों की गरिमा के महान नायक हैं। उनकी शाइरी में मानवीय सम्बन्धों की प्रेममय सहजता उजागर हुई है, जिसका लक्ष्य हर तरह के ज़ोर-ज़ुल्म और शोषण-व्यवस्था का उन्मूलन है। उनके दावों और अमल में, कथनी और करनी में कहीं टकराव नहीं, उनके व्यक्तित्व की यह विशिष्टता उनके काव्य की भी शक्ति और विशिष्टता है। भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ विश्व-भर में उनकी असाधारण लोकप्रियता इसका एक ज्वलन्त प्रमाण है।

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    Faiz Ahmed Faiz

    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

    जन्म: सन् 1911; सियालकोट (अविभाजित पंजाब) में। प्रारम्भिक शिक्षा उर्दू-फ़ारसी-अरबी में। अंग्रेज़ी और अरबी साहित्य में एम.ए.।

    अमृतसर में अंग्रेज़ी प्राध्यापक के रूप में कार्यारम्भ। कई महत्‍वपूर्ण पत्रों का सम्पादन। 1928 में पहली ग़ज़ल और 1929 में पहली नज़्म कही। पाक सरकार द्वारा 1951 और 1958 में गिरफ़्तार।

    सानफ्ऱान्सिस्को, जिनेवा, चीन, लन्दन, मास्को, हंगरी, क्यूबा, लेबनान, अल्जीरिया, मिस्र, फिलिपाइन और इंडोनेशिया की यात्राएँ। 1964 में अब्दुल्ला हारून कॉलेज, कराची के प्रिंसिपल। 1968 में इदारा-ए-यादगार-ए-ग़ालिब की स्थापना और 1969 में ग़ालिब-शती समारोह का आयोजन।

    1972 में राष्ट्रीय कला परिषद्, पाकिस्तान के अध्यक्ष। 1973 में अफ्रो-एशियाई लेखक सम्मेलन के अल्मा-अता (सोवियत संघ) और 1978 में लुआंडा (अंगोला) अधिवेशन में हिस्सेदारी। 1962 में ‘लेनिन शान्ति पुरस्कार’ से सम्मानित। अफ्रो-एशियाई लेखक संघ की पत्रिका ‘लोटस’ के सम्पादक।

    प्रमुख पुस्तकें: नक़्शे-फ़रियादी, दस्ते-सबा, ज़िन्दाँनामा, दस्ते-तहे-संग, सरे-वादिए-सीना, शामे-शह्रे-याराँ, मेरे दिल मेरे मुसाफ़िर (कविता-संग्रह); मीजान (लेख-संग्रह); सलीबें मेरे दरीचे में (पत्नी के नाम पत्र); मताए-लौहो-क़लम (भाषण, लेख, साक्षात्कार, भूमिकाएँ, पत्र, नाटक आदि)।

    निधन: 20 नवम्बर, 1984 को लाहौर में।

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