• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Ek Mamooli Adami

Ek Mamooli Adami

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 125

Special Price Rs. 112

10%

  • Pages: 95p
  • Year: 2006
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126709367
  •  
    ‘एक मामूली आदमी’ का केन्द्रीय चरित्र म्यूनिसिपैलिटी का एक साधारण-सा हेडक्लर्क है। तीस साल पहले उसकी पत्नी का देहान्त हुआ था, तभी से जिन्दगी में उसकी दिलचस्पी भी जाती रही। बेटा-बहू भी दूर हो गए और काम-काज भी छूट गया। सेवानिवृत्त होने के कुछ ही महीने पहले उसे पता चलता है कि उसे कैंसर है और अब बहुत ज्यादा वक़्त उसके पास नहीं बचा है। तब मृत्यु के आमने-सामने खड़े होकर सहसा उसे अहसास होता है कि जीवन के ये सारे साल उसने बिना जिए ही तो गुजार दिए, मुर्दे की तरह ही तो वह जिया; और तब मरने से पहले वह जी कर देखने का फैसला करता है। विषयवस्तु से संकेत मिलता है कि यह एक गुरु-गम्भीर नाटक है। एक अर्थ में है भी लेकिन, नाटककार ने कहानी को इस तरह से बुना है कि ज़्यादातर समय दर्शक हँसते रहते हैं। जीवन की वही विडम्बनाएँ जो हम सबके लिए चिन्ता और चिन्तन का विषय बनती हैं, देखते-देखते ज़िन्दगी को एक आनन्ददायी अनुभव में ढालने का कारण बन जाती हैं। नाटक हमारे सामाजिक, पारिवारिक रिश्तों, नौकरशाही और मानवीय मूल्यों के बारे में भी कुछ सवाल उठाता है, लेकिन सबसे ऊपर उसका जोर इस तथ्य पर है कि साधारणता भी एक सार्थक और उल्लासमय जीवन का साधन बन सकती है। रंगकर्मियों, दर्शकों और आलोचकों द्वारा एक स्वर में प्रशंसित यह नाटक देश के अनेक शहरों में सफलतापूर्वक खेला जा चुका है। अनेक दर्शकों का कहना है कि नाटक देखकर उन्हें अपनी जिन्दगी के लिए एक नया नजरिया मिला।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Ashok Lal

    जन्म: 6 मई, 1946, शायरों, कलाकारों और सरकारी मुलाज़िमों के मध्यवर्गीय परिवार में। पिता विनोद ‘तालिब शायर थे तो माँ राज प्रभाकर, हिन्दी की विदूषी। आठ भाई बहनों में एक अशोक लाल की पहली ज़रूरत थी पढ़-लिखकर नौकरी करना। भौतिकशास्त्र और मैनेजमेंट के स्नातक लाल ने कोई पच्चीस बरस नौकरी की। इेटरनैशनल मार्केटिंग के व्यवसाय के ऊँचे पदों पर भी रहे। 2000-2010 के दशक में एम.डी.आई. गुड़गाँव और अन्य मैनेजमेंट स्कूलों में प्रोफ़ेसर रहे और अब विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हैं।

    शायरी बचपन से शुरू कर दी थी, नाटक लिखना 1975 में शुरू किया। पत्नी कुमकुम से मुलाक़ात मंच पर हुई। नाटक लिखने का हुनर लगता है श्वसुर जगदीश माथुर से दहेज़ में मिला। 80 के दशक में टी.वी. और फि़ल्मों में लेखन शुरू किया। ‘तेरा नाम मेरा नाम’, ‘अपना सपना’, और ‘निमंत्रण’ आदि फि़ल्में और टी.वी. के लिये ‘बनफूल’, ‘समय’, ‘अनुपमा’ वग़ैरह के लिये लेखन किया। 13वीं सदी के महान चीनी नाटककार कुआन हान चिन्ग के नाटकों पर आधारित रेडियो सीरीज़ ‘चीनी चाशनी’ आकाशवाणी के लिये।

    नाट्य रचनाएँ: ‘शत्रु’, दिल्ली साहित्य कला परिषद से पुरस्कृत, ‘रवि और रवि’, ‘राजा नाहर सिंह’, ‘आठवाँ फेरा’, ‘सर जी’, ‘दो दुनी एक’ वग़ैरह मौलिक नाटकों में से हैं, और ‘चर्चा गली गली’, ‘देखा अनदेखा’, ‘जन्तु परन्तु’ (मृणाल पाण्डे के साथ), ‘ख़ूबसूरत’, और ‘माँ रिटायर होती है’ अनूदित नाटकों में से कुछ।

    प्रकाशित: ग्रामीण और शहरी सतत शिक्षा की मुहीम के तहत दो पुस्तिकाएँ ‘सहारा एक दूजे का’, और ‘बड़े बाबू’; दो अनूदित पुस्तकें ‘सृजनशील जीवन और शिक्षा’ और ‘अपनी दुनिया आप बदलिये। नाटक ‘एक मामूली आदमी’। अंग्रेज़ी में मज़मून ‘बुद्ध ग़ालिब’ और नाटक ‘दि एनिमी विदिन’ (‘शत्रु’ का तर्जुमा)।

    प्रकाशन प्रक्रिया में: कुआन हान चिन्ग के नाटकों का रूपान्तरण ‘चीनी चाशनी’।

    संपर्क: 164, मुनीरका एन्कलेव, नई दिल्ली-110067 फ़ोन: 26106891

    ईमेल: ashokumkum@gmail.com

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144