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Do Panktiyon Ke Beech

Do Panktiyon Ke Beech

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  • Pages: 111p
  • Year: 2019, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126708383
  •  
    राजेश जोशी भाषा को लिरिकल बनाते हुए उस संगीत तक ले जाते हैं, जहाँ से अर्थों की उड़ान शुरू होती है। वह थियेटर की सभी तकनीकें, प्रश्नाधारित संवाद, लय और गीतात्मकता का सीधा इस्तेमाल करते हैं। किंतु कविता की मूल प्रतिज्ञा, सूक्ष्मता और संवेदनीयता से नहीं डिगते। राजेश की कविता की ताकत रेटारिक का अर्थ ही बदल देती है। वह देखते-देखते भाषा को वस्तु और वस्तु को उसकी अन्तर्वस्तु में बदल देती है। भोपाल राजेश की कविताओं में एक आर्गेनिक संरचना की तरह गुँथा है। वह उनकी बोली, बानी, मिज़ाज, मौसम सभी कुछ में व्याप्त है। शायद इसी को लक्ष्य कर ऋतुराज ने लिखा था, वह अपने अनुभव को सिरजते वक्त शोकगीत की लयात्मकता नहीं छोड़ते। लय उनकी कविताओं में सहज भाव से आती है, जैसे कोई कुशल सरोदवादक आलाप में भोपाल राग का विस्तार कर रहा हो! राजेश की राजनीतिक चेतना किताबी नहीं है। उनके मंतव्य स्पष्ट हैं। निष्कर्षों को लेकर दुविधा नहीं है। राजेश की राजनीतिक सम्मान की कविताएँ रेटारिक या स्थूल होने की जगह बारीकी और नफासत का नमूना पेश करती हैं। माक्र्सवाद के संस्पर्श से जिन कवियों ने अपनी समझ और संवेदना को गहरा किया है, राजेश जोशी को उनमें अलग से चिह्नित किया जा सकता है। समय, स्थान और गतियों के अछूते सन्दर्भों से भरी है राजेश की कविता। यहाँ काल का बोध गहरा और आत्मीय है। अपने मनुष्य होने के अहसास और उसे बचाए रखने की जद्दोजहद हैं राजेश की कविताएँ। नरेश सक्सेना की एक टिप्पणी से कुछ पंक्तियाँ।

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    Rajesh Joshi

    जन्म: 18 जुलाई, 1946 नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश।

    किस्सा कोताह (उपन्यास), समरगाथा (एक लम्बी कविता) के साथ ही पाँच कविता संग्रह: एक दिन बोलेंगे पेड़, मिट्टी का चेहरा, नेपथ्य में हँसी, दो पंक्तियों के बीच, चाँद की वर्तनी

    धूप घड़ी (एक दिन बोलेंगे पेड़ और मिट्टी का चेहरा का संयुक्त संस्करण), गंेद निराली मीठू की (बच्चों के लिए कविताएँ), ब्रह्मराक्षस का नाई (बच्चों के लिए नाटक), सोमवार और अन्य कहानियाँ तथा कपिल का पेड़: कहानी संग्रह।

    जादू जंगल, अच्छे आदमी, तुम सआदत हसन मंटो हो, पाँसे, सपना मेरा यही सखी, हमें जवाब चाहिए: नाटक;

    एक कवि की नोटबुक तथा एक कवि की दूसरी नोटबुक: समकालीनता और साहित्य: आलोचनात्मक टिप्पणियों का संग्रह।

    पतलून पहिना बादल (मायकोव्स्की की कविताओं का अनुवाद), भूमि का कल्पतरु यह (भर्तृहरि की कविताओं की अनुरचना); कविताओं का अनेक भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद।

    इसलिए पत्रिका का कुछ वर्ष तक प्रकाशन एवं संपादन। नया पथ के निराला शताब्दी अंक के साथ ही पाँच अंक तथा वर्तमान साहित्य के कविता विशेषांक का संपादन।

    त्रिलोचन के कविता संग्रह ताप के ताए हुए दिन, नागार्जुन संचयन, शरद बिल्लौरे का कविता संग्रह तय तो यही हुआ था तथा नाटक अमरू का कुर्ता का संपादन।

    साहित्य अकादेमी सम्मान 2002, श्रीकान्त वर्मा स्मृति सम्मान, पहल सम्मान, शमशेर सम्मान, मुक्तिबोध सम्मान, माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार तथा शिखर सम्मान।

    आजकल स्वतन्त्र लेखन।

    संपर्क: 11 निराला नगर, भदभदा रोड, भोपाल-462003 (म.प्र.) दूरभाष: 0755-2770046

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