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Bhaugolik Chintan Ki Navin Pravratiyan

Bhaugolik Chintan Ki Navin Pravratiyan

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Special Price Rs. 180

10%

  • Pages: 171p
  • Year: 2007
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126713356
  •  
    इस पुस्तक में भूगोल विषय की संकल्पनात्मक, सैद्धांतिक एवं क्रियाविधिक स्वरूप का विवेचन एवं विमर्श मुख्य रूप से द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के काल के संदर्भ में किया गया है। द्वितीय विश्वयुद्ध भौगोलिक चिन्तन के विकास में मील का पत्थर है, क्योंकि इसके बाद विश्व के राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक क्षितिज पर एक नए युग का सूत्रपात हुआ। उपनिवेशवाद का चरमराता स्वरूप, स्वतंत्र देशों में नए सरकार एवं समाज के विकास के लिए नवीन सोच एवं उत्साह ने भौगोलिक चिंतकों को भी इस बात की ओर सोचने के लिए प्रेरित किया कि विषय को जीवंत एवं उपयोगी बाने के लिए नई विचारधाराओं का विकास किया जाए। इसी पृष्ठभूमि में प्रत्यक्षवाद, मात्रात्मक क्रान्ति, व्यवहारवाद, उग्रसुधारवाद, मानववाद, कल्याणकारी भूगोल, उत्तर-आधुनिकतावाद आदि विचारधाराओं का विकास भूगोल में हुआ। भूगोल की इन्हीं नवीन प्रवृत्तियों का इस पुस्तक में विवेचन किया गया है। यह कृति इस अर्थ में विलक्षण है कि भूगोल के सबसे गम्भीर पक्ष - ‘भौगोलिक विचारधारा’ की नवीनतम प्रवृत्तियों पर नितान्त सुगम, परिष्कृत एवं प्रवाहपूर्ण ढंग से प्रकाश डाला गया है।

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    PoornimaShekhar Singh

    जन्म: 11 मार्च, 1958।

    वर्तमान में कॉलेज ऑफ कॉमर्स, पटना में व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं। एक दशक से अधिक अध्यापन के अनुभव में इन्होंने भूगोल विषय में गहरी पैठ बनाई है। आपने बी.ए. (ऑनर्स) पटना विश्वविद्याालय से किया। अपनी उच्चतर शिक्षा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सी.एस.आर.डी. (प्रादेशिक विकास अध्ययन केेन्द्र) से प्राप्त की । पी. एच. डी. करने के लिये  आई. सी. एस. एस. आर., नई दिल्ली की डॉक्टरेट फेलोसिप  भी इन्हांेने प्राप्त की हैं। आपने एसोशियन ऑफ ज्योग्राफर एवं एशोसिएशन ऑफ ज्योग्राफर्स ऑफ इंडिया (छ।ळप्) के सेमिनार में लेख प्रस्तुत किए हैं।

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