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Borunda Diary

Borunda Diary

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  • Pages: 156p
  • Year: 2014
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126726950
  •  
    बिज्जी बिरले आधुनिक लेखक थे ! वे पूर्व-आधुनिक से उसकी वाणी नहीं छिनते, उसका 'प्रतिनिधि' बनने की, उसे अपने अधीन लाने की और इस तरह अपने को श्रेष्ठतर जताने की औपनिवेशिक कोशिश नहीं करते ! जैसे 'वाइट मेन' स बर्डन' होता है वैसे ही एक 'मॉडर्न मेन 'स बर्डन' भी होता है ! बिज्जी के कथा-लोक में, उनकी 'बातां री फुलवाड़ी में, जो उनके लेखन का सबसे सटीक रूपक भी है और उनका मैग्नम ओपस भी, पूर्व-आधुनिक भी फूल हैं, 'पिछड़े', 'गंवार' नहीं ! बिज्जी ताउम्र बोरुन्दा में रहे, वहीँ एक प्रेस स्थापित किया, प्रणपूर्वक राजस्थानी में लिखा और अपने गाँव में अपने प्रगतिशील, आधुनिक विचारों और नास्तिकताके बावजूद विरोधी भले माने गए हों, 'बाहरी' कभी नहीं माने गए ! चौदह खंडो में 'बातां री फुलवाड़ी' रचकर उन्होंने भारतीय और विश्वसाहित्य के इतिहास में जिस युगांतकारी परिवर्तन का सूत्रपात किया था, वह अब भी हिंदी पाठकों को अपनी समग्रता में उपलब्ध नहीं था ! बिज्जी के स्नेहाधिकारी और द्विभाषी लेखक मालचन्द्र तिवाड़ी उसके बड़े हिस्से का अनुवाद करने के लिए एक साल तक बिज्जी के साथ बोरुन्दा में रहे, वही एक साल जो बिज्जी के जीवन का अंतिम एक साल सिद्ध हुआ ! इस डायरी में बिज्जी का वह पूरा साल है जब वे शारीरिक रूप से परवश होकर अपनी स्वभावगत सक्रियता का अनंत भार अपने मन पर संभाले रोग-शय्या पर थे ! यह भी एक अर्थ-बहुल विदाम्बना है कि बिज्जी के शाहकार का अनुवाद एक ऐसे लेखकीय आत्म के हाथों संपन्न हुआ जो इस डायरी-वृत्तान्त में एक आस्तिक ही नहीं, एक पूर्व-आधुनिक की तरह प्रस्तुत है ! इस डायरी-वृत्तान्त को पढना, डायरीकार को पढना दरअसल बिज्जी के अपने रचे समाज को, उनके कथा-संसार को पढना है जिसके साथ बिज्जी के द्वान्दात्मकलेकिन करुणामय सम्बन्ध का एक उदहारण इस डायरीकार के साथ बिज्जी का-और बिज्जी के साथ डायरीकार का-अपना निजी, जटिल और रागात्मक सम्बन्ध है !

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    Malchand Tiwari

    जन्म : 19 मार्च, 1958, बीकानेर (राजस्थान)।

    शिक्षा : एम.ए., हिन्दी साहित्य (प्रथम श्रेणी) महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, अजमेर।

    प्रकाशित पुस्तकें : हिन्दी—पर्यायवाची (उपन्यास), पानीदार तथा अन्य कहानियाँ, सुकान्त के सपनों में, जालियाँ और झरोखे, त्राण तथा अन्य कहानियाँ (कहानी संग्रह)। राजस्थानी—भोळावण (उपन्यास) धड़न्द, सेलिब्रेशन (कहानी संग्रह), उतर्यो है आभो (कविता संग्रह)।

    अनेक भारतीय भाषाओं में हिन्दी तथा राजस्थानी रचनाओं के अनुवाद प्रकाशित।

    अनुवाद : एच.जी. वेल्स की कालजयी कथाकृति टाइम मशीन का काल की कल शीर्षक से हिन्दी में अनुवाद; गीतांजलि का मूल बांग्ला से राजस्थानी में गीति छन्द में अनुवाद; विजयदान देथा कृत बातां री फुलवाड़ी (चौदह में से दस भागों) का हिन्दी में अविकल अनुवाद।

    सम्मान/पुरस्कार : रास्थानी कविता-संग्रह उतर्यो है आभो पर केन्द्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली का साहित्य अकादमी पुरस्कार; गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद’ पद्य पुरस्कार (राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर); डॉ. एल.पी. टैस्सीटोरी गद्य पुरस्कार (नगर विकास न्यास, बीकानेर); सूर्यमल मीसण शिखर पुरस्कार (राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर)।

    सम्पर्क : 'प्रहेलिका’, सोनगिरी कुआँ, बीकानेर-334005

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