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Dhuppal

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  • Pages: 104p
  • Year: 2015
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728800
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    ‘धुप्पल’ यह एक निर्विवाद तथ्य है कि अपने कथा-कृतित्व में अनेकानेक व्यक्ति-चरित्रों को उकेर्नेवाले सधानाशील रचनाकारों का अपना जीवन भी किसिस महान कृति से कम महत्व नहीं रखता, इसलिए उन विविध जीवानानुभवों को यथार्थतः कागज पर उतार लाना एक महत्तपूर्ण सृजनात्मक उपलब्धि ही माना जाएगा ! इस नाते सुविख्यात कृति-व्यक्तित्व भगवतीचरण वर्मा की यह कथा-कृति आत्मकथात्मक उपन्यासों में एक उल्लेखनीय स्थान की हक़दार है ! कस्बे का एक बालक कैसे भगवतीचरण वर्मा के रूप में स्वनामधन्य हुआ, इसे वह स्वयं भी नहीं जानता ! जानता है तो सिर्फ उस जीवन-संघर्ष को, जिसे वह ‘धुप्पल’ करार देता है ! आत्मकथा न लिखकर भगवती बाबू ने यह उपन्यास लिखा, यह बात उनके रचनाशील मनन की अनवरत सृजनात्मक सक्रियता की ही सूचक है ! ‘धुप्पल’ में जो गंभीरता है, वह भगवती बाबू के चुटीले भाषा-शिल्प के बावजूद, अपनी तथ्यात्मकता का स्वाभाविक परिणाम है ! लेखक के साथ-साथ इसमें एक युग मुखर हुआ है, जिसके अपने अंतर्विरोध अगर लेखकीय अंतर्विरोध भी रहे तो उन्होंने उसके सृजन को ही धारदार बनाया ! इसलिए धुप्पल सिर्फ ‘धुप्पल’ ही नहीं, लेखकीय संघर का सार्थक दस्तावेज भी है !

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    Bhagwaticharan Verma

    भगवतीचरण वर्मा

    30 अगस्त, 1903 को उन्नाव जिले (उ.प्र.) के शफीपुर गाँव में जन्म।

    शिक्षा : इलाहाबाद से बी.ए., एल.एल.बी.।

    प्रारम्भ में कविता-लेखन। फिर उपन्यासकार के नाते विख्यात भगवती बाबू 1933 के करीब प्रतापगढ़ के राजा साहब भदरी के साथ रहे। 1936 के लगभग फिल्म कार्पोरेशन, कलकत्ता में कार्य किया। कुछ दिनों ‘विचार’ नामक साप्ताहिक का प्रकाशन-सम्पादन और इसके बाद बम्बई में फिल्म-कथा लेखन तथा दैनिक ‘नवजीवन’ का सम्पादन। आकाशवाणी के कई केन्द्रों में भी कार्य। बाद में, 1957 से मृत्यु-पर्यन्त स्वतंत्र साहित्यकार के रूप में लेखन।

    उनके बेहद लोकप्रिय उपन्यास ‘चित्रलेखा’ पर दो बार फिल्में बनीं। ‘भूले-बिसरे चित्र’ साहित्य अकादेमी से सम्मानित। पद्मभूषण तथा राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त।

    प्रकाशित पुस्तकें

    अपने खिलौने, पतन, तीन वर्ष, चित्रलेखा, भूले-बिसरे चित्र, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, सीधी सच्ची बातें, सामथ्र्य

    और सीमा, रेखा, वह फिर नहीं आई, सबहिं नचावत राम गोसाईं, थके पाँव, प्रश्न और मरीचिका, युवराज चूण्डा, चाणक्य धुप्पल (उपन्यास); प्रतिनिधि कहानियाँ, मेरी कहानियाँ, मोर्चाबन्दी तथा सम्पूर्ण कहानियाँ (कहानी-संग्रह); मेरी कविताएँ, सविनय और एक नाराज़ कविता (कविता-संग्रह); वसीयत, सम्पूर्ण नाटक (नाटक); अतीत के गर्त से, कहि न जाय का कहिए (संस्मरण); साहित्य के सिद्धान्त तथा रूप (साहित्यालोचन)।

    निधन : 5 अक्टूबर, 1981

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