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  • Pages: 156p
  • Year: 2019, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126715848
  •  
    एक जनजाति के अन्तःसत्त्व में जो परिवर्तन होते हैं और उनके मूल्यों के बीच जो संघर्ष होते हैं, उनको केवल इतिहास ही नहीं, साहित्य और दर्शन भी अपने-अपने माध्यमों से पहचानते हैं | इस अन्तःसत्त्व को केंद्र बनाकर एम. वीरप्पा मोइली द्वारा कन्नड़ में लिखे गए उपन्यास 'तेम्बरे' का हिंदी अनुवाद है--'ढोल' ! यह उपन्यास 'एज ऑफ टाइम' नाम से अंग्रेजी में भी छप चूका है | ढोल कन्नड़ साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास है, जो कर्नाटक के तटीय इलाके में रहनेवाले सीमान्त समुदाय ‘पम्बद’ के जीवन की जटिल सांस्कृतिक प्रक्रिया - ‘भूताराधना’ की गहरी छानबीन करता है। यह जटिल संस्कृति 'पम्बद' की वंशगत वृत्ति के रूप में प्रचलित है। प्रस्तुत उपन्यास में कथाकार ने इस अद्भुत और पारम्परिक वृत्ति को दो पम्बद भाइयों के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया है, जहाँ एक भाई इस परम्परा के खिलाफ विद्रोह करता है तो दूसरा भाई 'भूताराधना' की पद्धति को पुनर्स्थापित करने में सच्चे मन से जुट जाता है। यह उपन्यास न केवल अपनी संस्कृति को बचाए रखनेवाले की सांस्कृतिक अस्मिता का आईना है, वरन उनपर भी प्रहार करता है, जो आतंक के माध्यम से न्याय पाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं | कथाकार ने परम्परा और आधुनिकता के द्वन्द्व से भरी इस कथा को रोचकता के साथ वृत्तान्त शैली में प्रस्तुत किया है। दलित और स्त्री चेतना के प्रति गहरी प्रतिबद्धता इस उपन्यास को जहाँ महत्त्वपूर्ण बनाती हैं, वहीँ एक वैश्विक धरातल पर नए सामाजिक यथार्थ के साथ उपस्थित करती हैं। यह उपन्यास केवल पढने के लिए नहीं है, बल्कि अध्ययन, बोध और गहरे आत्मचिंतन के लिए भी है | - डॉ. बी.ए. विवेका राय कुलपति, कन्नड़ विश्वविद्यालय, हम्पी (कर्नाटक)

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    M. Veerappa Moily

    एम. वीरप्पा मोइली

    तटीय कर्नाटक में जन्मे एम. वीरप्पा मोइली एक प्रतिष्ठित राजनेता, कुशल प्रशासक, समाज-सुधारक, अर्थशास्त्री और प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। वकालत का पेशा अपनाने के बाद आप पिछले चार दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं। आप कर्नाटक के मुख्यमन्त्री रहे हैं। आपने कर सुधार आयोग व राजस्व सुधार आयोग, कर्नाटक सरकार के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दी हैं। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (भारत सरकार) तथा ओवरसाइट कमिटी (भारत सरकार) के लिए भी आपने अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दी हैं।

    भारत सरकार के कानून एवं न्यायमंत्री रहते हुए आपने न्यायपालिका में सुधार की एक दूरगामी प्रक्रिया आरम्भ की। आप सिद्ध लेखक हैं। आपने कन्नड़ और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में लेखन किया है।

    आपकी प्रकाशित पुस्तकों में प्रमुख हैं - 

    ‘श्रीरामायण महान्वेषणम्’ (पाँच खंड); ‘म्यूजिंग्स ऑफ इंडिया’ (दो खंड); ‘कोट्टा’ (कन्नड़); ‘तेम्बरे’ (कन्नड़); ‘कविता-संग्रह’ (पाँच खंड); ‘सुलिगलि’ (कन्नड़ उपन्यास); ‘अनलेशिंग इंडिया - रोड मैप फॉर अग्रेरियन वेल्थ क्रिएशन’; ‘अनलेशिंग इंडिया - वाटर एलेक्जिर ऑफ लाइफ’; ‘अनलेशिंग इंडिया - पावरिंग द नेशन’ एवं ‘अनलेशिंग इंडिया - द फायर ऑफ नॉलेज’।

    आपके अब तक के लेखन में सबसे महत्त्वाकांक्षी कृति ‘श्रीरामायण महान्वेषणम्’ है जिसे भारतीय ज्ञानपीठ का सम्मानजनक मूर्तिदेवी पुरस्कार प्राप्त हुआ। वर्तमान में आप ‘द्रौपदी’ पर एक महाकाव्य की रचना में व्यस्त हैं।

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