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Dharti Adhkhila Phool Hai

Dharti Adhkhila Phool Hai

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  • Pages: 136p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126724376
  •  
    एकान्त नवें दशक में उभरे उन महत्त्वपूर्ण कवियों में एक हैं जिन्होंने अपनी कविताओं में अपने समय के लोक समाजों के सुख-दुख, हँसी-खुशी, करुण-आश्चर्य, चीख-चीत्कार आदि भावों को दर्ज किया है। आधुनिकता के दबाव में ग्रामीण समाजों में बढ़ रही ‘भावों की गरीबी’ को भी उन्होंने बखूबी अपनी कविताओं में जगह दी है। न केवल लोक के मानवीय भाव बल्कि धीरे-धीरे भारतीय समाज में हो रहे ग्रामीण समाजों के वंचितीकरण, बाजार-संस्कृति के आक्रामक प्रसार में अपने को बचाए रखने की जद्दोजहद, इस जद्दोजहद से निकलती भारतीय समाज के इस ‘बहुजन की राजनीति’ उनकी कविताओं में दर्ज है। उनकी कविताएँ आधुनिकता के टकराव से छिन्न-भिन्न हो रहे मानवीय भावों के जीवन्त दस्तावेज हैं। पिछले दिनों हिन्दी समाज, हिन्दी कविता, भारतीय राजसत्ता एवं उसके विमर्श से गाँव, किसान, एवं उसकी चिन्ताएँ गायब होती गई हैं। एकान्त ने उन गायब होते समूहों को अपनी कविताओं में दर्ज किया है। उनकी कविताएँ समाज में हो रहे अनेक सूक्ष्म परिवर्तनों, उस पर आम आदमी की प्रतिक्रियाओं को डॉक्यूमेंट कर उन्हें अत्यन्त सहज एवं मानवीय लोकेसन में अवस्थित कर आज के समय में प्रभावी हस्तक्षेप करती दिखती हैं। इस संकलन में एक लम्बी कविता ‘डूब’ संकलित है जो भारत में जनजातीय समाजों के विस्थापन की पीड़ा को कविता-विमर्श का विषय बनाती है। वे एक समर्थ कवि हैं। अपने समय को कविता में लाना वे बखूबी जानते हैं। प्रिंट एवं मीडिया के शोर में आज जब हिन्दी काव्य परिदृश्य में काव्य विहीन कविताएँ अच्छी कविताओं की जगह आकर काबिज हो गई हैं, एकान्त के इस संकलन की कविताएँ हिन्दी की बेहतरीन कविताओं का नमूना प्रस्तुत करती हैं। - बद्री नारायण

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    Ekant Shrivastava

    जन्म: 8 फरवरी, 1964, जिला: रायपुर (छत्तीसगढ़) का एक कस्बा छुरा।

    शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी), एम.एड., पी-एच.डी.

    कृतियाँ: अन्न हैं मेरे शब्द (1994), मिट्टी से कहूँगा धन्यवाद (2000), बीज से फूल तक (2003) (कविता-संग्रह); कविता का आत्मपक्ष (2006), शेल्टर फ्रॉम दि रेन (अंग्रेजी में अनूदित कविताएँ-2007), मेरे दिन मेरे वर्ष (स्मृति कथा-2009), बढ़ई, कुम्हार और कवि (लम्बी कविता-2013), पानी भीतर फूल (उपन्यास-2013); धरती अधखिला फूल है (कविता-संग्रह-2013)।

    अनुवाद: कविताएँ अंग्रेजी व कुछ भारतीय भाषाओं में अनूदित। लोर्का, नाजिम हिकमत और कुछ दक्षिण अफ्रीकी कवियों की कविताओं का अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद।

    सम्पादन: नवम्बर 2006 से दिसम्बर 2008 तक तथा जनवरी 2011 से पुनः ‘वागर्थ’ का सम्पादन।

    पुरस्कार: शरद बिल्लौरे, रामविलास शर्मा, ठाकुर प्रसाद, दुष्यन्त कुमार, केदार, नरेन्द्र देव वर्मा, सूत्र, हेमन्त स्मृति, जगत ज्योति स्मृति, वर्तमान साहित्य-मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरस्कार।

    सम्पर्क: द्वारा - श्रीमती मंजुल श्रीवास्तव, एल.आई.सी., सी.बी.ओ. 21, चौथा तल, हिन्दुस्तान बिल्डिंग एनेसी, 4, सी.आर. एवेन्यू, कोलकाता-700072

    मो.: 09433135365

    ई-मेल: shrivastava.ekant@gmail.com

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