• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Hindi Aalochana Ki Paaribhashik Shabdavali

Hindi Aalochana Ki Paaribhashik Shabdavali

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 395

Special Price Rs. 356

10%

  • Pages: 400p
  • Binding:  Textbook
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126722075
  •  
    आधुनिक हिंदी आलोचना की आयु भले ही सौ-सवा सौ वर्ष हो किंतु उसने इतनी तेजी से डग भरे कि इस अल्प अवधि में ही दुनिया की किसी भी दूसरी समृद्ध भाषा से होड़ लेने में सक्षम है। आज हिंदी आलोचना में जो पारिभाषिक शब्द प्रचलित हैं, उनके मुख्यतः तीन स्रोत हैं। उनमें सबसे प्रमुख स्रोत हमारा संस्कृत काव्यशास्त्र है, जिसकी समृद्धि तद्युगीन विश्वसाहित्य में अतुलनीय है। हिंदी आलोचना की समृद्धि के पीछे उसकी अपनी यही विरासत है। दूसरा स्रोत यूरोप का साहित्यशास्त्र है, जिससे हमारे लगभग साढ़े तीन सौ वर्ष से संबंध हैं। पिछले कुछ दशकों में उदारीकरण और भूमंडलीकरण के चलते यूरोप से अनेक नए पारिभाषिक शब्द हिंदी में आए हैं, जिन्हें हिंदी ने पूरी उदारता से ग्रहण किया है। इसी के साथ हिंदी आलोचना ने अनेक शब्द स्वयं भी विकसित किए हैं। इस समृद्धि के बावजूद हिंदी आलोचना में प्रचलित बहुतेरे पारिभाषिक शब्दों की अवधारणा को रेखांकित करनेवाली पुस्तक की कमी लगातार महसूस की जा रही थी। समकालीन हिंदी आलोचना की इस अनिवार्य आवश्यकता को पूरी करनेवाली यह अकेली पुस्तक है - हिंदी साहित्य के सुधी अध्येताओं के लिए अनिवार्यतः संग्रहणीय।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Amarnath

    डॉ. अमरनाथ

    सुधी आलोचक और प्रतिष्ठित भाषाविद् के रूप में ख्यात डॉ. अमरनाथ (वास्तविक नाम डॉ. अमरनाथ शर्मा) का जन्म गोरखपुर जनपद (सम्प्रति महाराजगंज) के रामपुर बुजुर्ग नामक गाँव में सन् 1954 में हुआ। उनकी आरंभिक शिक्षा गाँव के आस-पास के विद्यालयों में और उच्च शिक्षा गोरखपुर विश्वविद्यालय में हुई जहाँ से उन्होंने एम.ए. और पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। कविता से अपनी रचना-यात्रा शुरू करने वाले डॉ. अमरनाथ सामाजिक-आर्थिक विषमता से जुड़े सवालों से लगातार जूझते रहे हैं। उनका विश्वास है कि लेखन में शक्ति सामाजिक संघर्षों से आती है। इसी विश्वास ने उन्हें ‘नारी का मुक्ति संघर्ष’ जैसे साहित्येत्तर विषय पर पुस्तक लिखने को बाध्य किया। ‘आचार्य रामचंद्र शुक्ल और परवर्ती आलोचना’, ‘आचार्य रामचंद्र शुक्ल का काव्य-चिंतन’, ‘समकालीन शोध के आयाम’ (सं.), ‘हिंदी का भूमंडलीकरण’ ( सं.), ‘हिंदी भाषा का समाजशास्त्र’ (सं.), ‘सदी के अन्त में हिंदी’ (सं.), ‘बाँसगाँव की विभूतियाँ’ (सं.), ‘हिंदी जाति’ आदि उनकी अन्य प्रकाशित पुस्तकें हैं।

    हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के बीच सेतु निर्मित करने एवं भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के उद्देश्य से ‘अपनी भाषा’ नामक संस्था के गठन और संचालन में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले डॉ. अमरनाथ, संस्था के अध्यक्ष हैं एवं उसकी पत्रिका ‘भाषा विमर्श’ का सन् 2000 से संपादन कर रहे हैं। वे नवें दशक से ही जनवादी लेखक संघ से जुड़े हैं तथा भारतीय हिंदी परिषद् के उपसभापति रह चुके हैं। हिंदी परिवार को टूटने से बचाने और उसकी बोलियों को हिंदी के साथ संगठित रखने के उद्देश्य से गठित संगठन ‘हिंदी बचाओ मंच’ के संयोजक के रूप में डॉ. अमरनाथ निरंतर संघर्षरत हैं। वे श्री चंद्रिका शर्मा फूलादेवी स्मृति सेवा ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी तथा उसकी पत्रिका ‘गाँव’ के भी सम्पादक हैं।

    कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर तथा अध्यक्ष पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद वे स्वतंत्र लेखन तथा सामाजिक कार्यों में संलग्न हैं।

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144