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Chitrakala Kavita Ke Deshe

Chitrakala Kavita Ke Deshe

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  • Pages: 304p
  • Year: 2014, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126725892
  •  
    बांग्ला के महान कथाकार सुनील गंगोपाध्याय प्रारम्भिक जीवन से ही भ्रमण-प्रेमी रहे । उन्होंने लिखा भी है, ‘बचपन से ही मेरा सपना विश्व-भ्रमण का रहा है । कई अलस दोपहरियों में उन्होंने कई देशों के नक्शे और ग्लोब रखकर पृथ्वी-परिक्रमा के दिवास्वप्न देखे है । ‘चित्रकला कविता के देशे’ (मूल नाम ‘छविर देशे : कवितार देशे’) पुस्तक में उनकी फ्रांस-यात्रा का रोचक वर्णन है । दरअसल इस पुस्तक का ढाँचा भ्रमण-वृत्तान्त का है किन्तु विधागत रूढ़ अर्थों में यह यात्रा-वृत्तान्त नहीं है । असल में उन्हें अपनी युवावस्था में आयोबा विश्वविद्यालय में आयोजित कविता कार्यशाला में नौ मास रहने की वृत्ति मिली थी । यह आमंत्रण प्रसिद्द कवि पॉल ऐजेल की ओर से मिला था । इन नौ महीनों में सुनील गंगोपाध्याय ने वहाँ के कवियों, चित्रकारों, संगीतज्ञों, नाटककारों, नर्तकियों से जो भेंट की, इस पुस्तक में उन्ही का वर्णन है । किसी ने कहा था, हर शिल्पी की दो मातृभूमियाँ होती हैं-एक उसका अपना देश और दूसरा फ़्रांस । शिल्पी से सिर्फ चित्रकार थे, वैसे ही यहाँ रिम्बो, वेर्लेन, बोदलेयर, मालार्मे, वेलरी, अपोलिनियर और ऑरि मिसोर जैसे कवी भी हुए हैं । इसलिए फ्रांस ही ऐसा देश है जिसकी आत्मा का अगर वर्णन किया जाए तो उसमें छवि और कविता का संसार आना अनिवार्य है । इस पुस्तक की एक विशेषता और है, वह है इसमें अद्दंत प्रवाहित सुनील और एक फ्रांसीसी युवती की प्रेम कहानी, जिसे सुनील ने बिना कुछ छिपाए बयान किया है । यह पुस्तक भ्रमण का तो आनन्द देती ही है, साथ ही फ्रांसीसी साहित्य, संस्कृति, कला, संगीत और कविता से जुड़े जीवन के रहस्यों को भी खोलती है ।

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    Sunil Gangopadhyay

    सुनील गंगोपाध्याय

    शिक्षा : कोलकाता विश्वविद्यालय से एम.ए.।

    लेखन की शुरुआत कविताओं से हुई। 'कृत्तिवास’ पत्रिका के संस्थापक-सम्पादक। पहला उपन्यास 'आत्मप्रकाश’  जो 'देश’ पत्रिका के शारदीय विशेषांक में छपा।

    पहला कविता-संग्रह एका एवं कयेकजन (अकेले एवं कई लोग)। बच्चों के लेखक के रूप में भी उतने ही लोकप्रिय।

    'नील लोहित’ के नाम से भी काफी लिखा। 'सनातन पाठक’ तथा 'नील उपाध्याय’ आपके दो और लेखकीय छद्म नाम हैं।

    राजकमल प्रकाशन समूह से हिन्दी में प्रकाशित आपकी कृतियाँ हैं : सुदूर झरने के जल में, छविगृह में अँधेरा है, रानू और भानु, स्नेह वर्षा, बीता काल, चित्रकला कविता के देशे।

    सम्मान : 'आनन्द पुरस्कार’ दो बार प्राप्त। सन् 1983 में 'बंकिम पुरस्कार’। सन् 1985 में 'साहित्य अकादमी’ पुरस्कार।

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