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Chanakya

Chanakya

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  • Pages: 128p
  • Year: 2018, 5th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126716753
  •  
    चाणक्य सुविख्यात उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा की अन्तिम कथाकृति है । मगध-सम्राट महापदम नन्द और उसके पुत्रों द्वारा प्रजा पर जो अत्याचार किए जा रहे थे, राज्यसभा में आचार्य विष्णुगुप्त ने उनकी कडी आलोचना की; फलस्वरूप नन्द के हाथों उन्हें अपमानित होना पडा । विष्णुगुप्त का यही अपमान अन्तत: उस महाभियान का आरम्भ सिख हुआ, जिससे एक और तो आचार्य विष्णुगुप्त 'चाणक्य' के नाम से विख्यात हुए और दूसरी ओर मगध-साम्राज्य को चन्द्रगुप्त-जैसा वास्तविक उत्तराधिकारी प्राप्त हुआ । भगवती बाबू ने इस उपन्यास में इसी ऐतिहासिक कथा की परतें उधाडी हैं । लेकिन इस क्रम में उनकी दृष्टि एक पतनोन्मुख राज्य-व्यवस्था के वेभव-विलास और उसकी उन विकृतियों का उद्घाटन करती है जो उसे मूल्य-स्तर पर खोखला बनाती हैं और काल-व्यवधान से परे आज भी उसी तरह प्रासंगिक हैं । इस उपन्यास की प्रमुख विशेषता यह भी है कि चाणक्य यहाँ पहली बर अपनी समग्रता में चित्रित हुए हैं । उनके कठोर और अभेद्य व्यक्तित्व के भीतर भगवती बाबू ने नवनीत-खंड की भी तलाश की है । अपने महान जीवन-संघर्ष में स्वाभिमानी, संकल्पशील, दूरद्रष्टा और अप्रतिम कूटनीतिज्ञ के साथ-साथ वे एक सुहृद प्रेमी और सदगृहस्थ के रूप में भी हमारे सामने आते हैं । निश्चय ही, 'चित्रलेखा' और 'युवराज चुंडा' जैसे ऐतिहासिक उपन्यासों के क्रम में लेखक की यह कृति भी स्मरणीय है ।

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    Bhagwaticharan Verma

    भगवतीचरण वर्मा

    जन्म : 30 अगस्त, 1903; उन्नाव जिले (उ.प्र.) का शफीपुर गाँव ।

    शिक्षा : इलाहाबाद से बी.ए., एल.एल.बी.।

    प्रारम्भ में कविता-लेखन। फिर उपन्यासकार के नाते विख्यात । 1933 के करीब प्रतापगढ़ के राजा साहब भदरी के साथ रहे। 1936 के लगभग फिल्म कार्पोरेशन, कलकत्ता में कार्य किया। कुछ दिनों ‘विचार’ नामक साप्ताहिक का प्रकाशन-सम्पादन । इसके बाद बम्बई में फिल्म-कथालेखन तथा दैनिक ‘नवजीवन’ का सम्पादन। फिर आकाशवाणी के कई केन्द्रों में भी कार्य। बाद में, 1957 से मृत्यु-पर्यन्त स्वतंत्र साहित्यकार के रूप में लेखन। 'चित्रलेखा' उपन्यास पर दो बार फिल्म-निर्माण और ‘भूले-बिसरे चित्र’ साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित। पद्मभूषण तथा राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त।

    प्रकाशित पुस्तकें : अपने खिलौने, पतन, तीन वर्ष, चित्रलेखा, भूले-बिसरे चित्र, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, सीधी सच्ची बातें, सामर्थ्य

    और सीमा, रेखा, वह फिर नहीं आई, सबहिं नचावत राम गोसाईं, प्रश्न और मरीचिका, युवराज चूण्डा, धुप्पल (उपन्यास); प्रतिनिधि कहानियाँ, मेरी कहानियाँ, मोर्चाबन्दी तथा सम्पूर्ण कहानियाँ (कहानी-संग्रह); मेरी कविताएँ, सविनय और एक नाराज़ कविता (कविता-संग्रह); मेरे नाटक, वसीयत (नाटक); अतीत के गर्त से, कहि न जाय का कहिए (संस्मरण); साहित्य के सिद्धान्त तथा रूप (साहित्यालोचन) भगवतीचरण वर्मा रचनावली-14 खंड (सम्पूर्ण रचनाएँ) ।

    निधन : 5 अक्टूबर, 1981

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