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Chalte To Achchha Tha

Chalte To Achchha Tha

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  • Pages: 144p
  • Year: 2019, 2nd Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126714728
  •  
    चलते तो अच्छा था ईरान और आज़रबाईजान के यात्रा-संस्मरण हैं। असगर वजाहत ने केवल इन देशों की यात्रा ही नहीं की बल्कि उनके समाज, संस्कृति और इतिहास को समझने का भी प्रयास किया है। उन्हें इस यात्रा के दौरान विभिन्न प्रकार के रोचक अनुभव हुए हैं। उन्हें आज़रबाईजान में एक प्राचीन हिन्दू अग्नि मिला। कोहे काफ की परियों की तलाश में भी भटके और तबरेज़ में एक ठग द्वारा ठगे भी गए। यात्राओं का आनन्द और स्वयं देखने तथा खोजने का सन्तोष चलते तो अच्छा था में जगह-जगह देखा जा सकता है। असगर वजाहत ने ये यात्राएँ साधारण ढंग से एक साधारण आदमी के रूप में की हैं जिसके परिणामस्वरूप वे उन लोगों से मिल पाए हैं, जिनसे अन्यथा मिल पाना कठिन है। भारत, ईरान तथा मध्य एशिया के बीच प्राचीन काल से लेकर मध्य युग तक बड़े प्रगाढ़ सम्बन्ध रहे हैं। इसके चलते आज भी ईरान और मध्य एशिया में भारत की बड़ी मोहक छवि बनी हुई है। लेकिन 19वीं और 20वीं शताब्दी में अपने पड़ोसी देशों के साथ भारत का रिश्ता शिथिल पड़ गया था। आज के परिदृश्य में यह ज़रूरी है कि पड़ोस में उपलब्ध सम्भावनाओं पर ध्यान दिया जाए। चलते तो अच्छा था यात्रा-संस्मरण के बहाने हमें कुछ गहरे सामाजिक और राजनीतिक सवालों पर सोचने के लिए भी मजबूर करता है।

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    Asghar Wajahat

    जन्म : 1946, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश।

    शिक्षा : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए., पी-एच.डी. और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से पोस्ट डाक्टोरल रिसर्च। 1971 से जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली के हिन्दी विभाग में अध्यापन। पाँच वर्षों तक ओत्वोश लोरांड विश्वविद्यालय, बुडापेस्ट, हंगरी में अध्यापन। यूरोप और अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में व्याख्यान।

    पाँच उपन्यास, दो लघु उपन्यास, छह पूर्णकालिक नाटक, यात्रा संस्मरण की तीन पुस्तकें, नुक्कड़ नाटकों का एक संग्रह और साहित्यिक आलोचना की एक पुस्तक प्रकाशित।

    प्रमुख प्रकाशन : सात आसमान, कैसी आगी लगाई, बरखा रचाई, मनमाटी (उपन्यास), मैं हिन्दू हूँ, डेमोक्रेसिया (कहानी संग्रह)।

    रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद। नाटकों के मंचन देश-विदेश की कई भाषाओं में हैं।

    रचनात्मक लेखन के अलावा नियमित रूप से विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेखन। 2007 में बीबीसी हिन्दी के अतिथि सम्पादक। 'हंस’ पत्रिका के लिए विशेष अतिथि सम्पादक के रूप में 'भारतीय मुसलमान : वर्तमान और भविष्य’ विषय पर और 'वर्तमान साहित्य’ के लिए 'प्रवासी साहित्य’ पर विशेषांकों का सम्पादन।

    फिल्मों के लिए पटकथाएँ लिखने के अलावा धारावाहिक और डॉक्यूमेंटरी फिल्में भी बनाई हैं।

    कथा यूके सम्मान और हिन्दी अकादेमी, दिल्ली से सम्मानित; कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित।

    चित्रकला और पर्यटन में गहरी रुचि।

    सम्प्रति : प्रोफेसर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली।

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