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Rat Baki Evam Anya Kahaniyan

Rat Baki Evam Anya Kahaniyan

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Special Price Rs. 180

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  • Pages: 136p
  • Year: 2010
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126719044
  •  
    रणेन्द्र की कहानियाँ ‘मार्जिनालाइजेशन’ की प्रक्रिया का ‘मेटाफर’ रचती हैं। आदिवासी इनके यहाँ ‘कन्सर्न’ के रूप में मौजूद हैं। इस संग्रह की कहानियों से गुजरते हुए इनके सरोकारों की शिनाख्त की जा सकती है और कहा जा सकता है कि ये यथार्थ की आँच पर सीझती जीवन की कहानियाँ हैं। इन कहानियों के पात्रों की बेबसी और विफलता जिस त्रासदी को रचते हैं, वह व्यवस्थाजन्य है। व्यवस्था की उस क्रूरता और उदासीनता से उस अयाचित यातना (अनडिजर्रब्ड सफरिंग) का जन्म होता है जिसकी गहरी छाप कहानियों को पढ़ने के बाद भी दिलो-दिमाग पर काबिज रहती है। ये कहानियाँ ऐसे इलाके से सिर उठाने की जुर्रत करती हैं जहाँ अशिक्षा, गरीबी और बदहाली के घने जंगलों में व्यवस्था के हिंसक नरभक्षी मनमाना शिकार किया करते हैं। रणेन्द्र का यथार्थबोध जीवन-जगत के प्रत्यक्ष अनुभवों से जन्मा और विकसित हुआ है। इस कारण यथार्थ की जटिलता और उसकी संश्लिष्टता को परत-दर-परत उघाड़ते हुए वे जब यथार्थ के प्रकृत रूप का प्रत्यक्षीकरण करते हैं तो कोई-कोई कहानी कहीं-कहीं औपन्यासिकता का भी आभास कराती है। इनकी कहानियों में प्रकृति, संस्कृति और मिथक जहाँ एक ओर मिलकर एक ‘देशज किस्म का जादुई यथार्थवाद’ रचते जान पड़ते हैं तो वहीं दूसरे स्तर पर प्रेम एवं अंतरंगता के क्षणों में ऐंद्रिकता के चित्रण में प्रयुक्त होने वाली बिंबात्मकता, काव्यात्मकता की प्रतीति कराती है। रणेन्द्र की कहानियाँ सम्भावनाओं और संसाधनों से परिपूर्ण उस प्रदेश की कहानियाँ हैं जहाँ बंजरता धीरे-धीरे अपने पाँव पसार रही है। अपने समय के लकवाग्रस्त होने और समाज के बंजर होने की प्रक्रिया को रणेन्द्र ने पूरी शिद्दत और ईमानदारी से इतिहास में दर्ज करने का काम किया है।

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    Ranerndra

    रणेन्द्र
    सम्पादन :
    पंचायती राज : हाशिये से हुकूमत तक
    झारखण्ड एन्साइक्लोपीडिया (चार खंड)
    रचनाएँ :
    रात बाकी एवं अन्य कहानियाँ
    ग्लोबल गाँव के देवता (उपन्यास)
    थोड़ा सा स्त्री होना चाहता हूँ (कविता संग्रह)– प्रकाशनाधीन ।
    पता : डी–8, ए–टी–आई–, मेयर्स रोड, राँची (झारखण्ड) ।
    फोन : 94313–91171, 0651–2280333

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