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  • Pages: 235p
  • Year: 2019, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789389577198
  •  
    स्त्री के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून हैं, लेकिन उन कानूनों के रहते हुए भी स्त्रियों के लिए समाज में समानता, सुरक्षा और सम्मान से जीना दुश्वार है। यह उपन्यास न्यायिक विफलताओं, क़ानूनी पेचीदगियों और सामाजिक पारिवारिक विडम्बनाओं को बहुत स्पष्टता से हमारे सामने लाता है। Quote: “भगवानदास मोरवाल के लेखन से मैं तब से परिचित हूँ जब वे 1992 में ढहाए गए विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के उपरान्त अपना पहला उपन्यास ‘काला पहाड़’ लिख रहे थे। यह महज़ एक संयोग नहीं कि उनके सभी उपन्यासों की केन्द्रीय चिन्ता स्त्री है। ‘वंचना’ उपन्यास हमारे वर्तमान समय का वह आख्यान है जिसमें पीछे लाशें हैं और आगे अँधेरा। उपन्यास पढ़ते हुए समझ में आता है कि भले ही वर्तमान भारतीय समाज का राजनीतिक नारा है ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, मगर सामाजिक-सांस्कृतिक आकांक्षा है ‘आदर्श बहू’।” –अरविंद जैन

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    Bhagwandas Morwal

    भगवानदास मोरवाल

    जन्म : 23 जनवरी, 1960 नगीना, जिला-मेवात (हरियाणा)।
    शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) एवं पत्रकारिता में डिप्लोमा।
    प्रकाशित कृतियाँ : काला पहाड़ (1999), बाबल तेरा देस में (2004), रेत (2008) उर्दू में अनुवाद, नरक मसीहा (2014) मराठी में अनुवाद, हलाला (2015) उर्दू व अंग्रेजी में अनुवाद, सुर बंजारन (2017), वंचना (2019) तथा शकुंतिका (2020) (उपन्यास); सिला हुआ आदमी (1986), सूर्यास्त से पहले (1990), अस्सी मॉडल उर्फ़ सूबेदार (1994), सीढ़ियाँ, माँ और उसका देवता (2008), लक्ष्मण-रेखा (2010), दस प्रतिनिधि कहानियाँ (2014) (कहानी-संग्रह); पकी जेठ का गुलमोहर (2016) (स्मृति-कथा); लेखक का मन (2017) (वैचारिकी); दोपहरी चुप है (1990) (कविता); बच्चों के लिए कलयुगी पंचायत (1997) एवं अन्य दो पुस्तकों का सम्पादन।
    सम्मान : वनमाली कथा सम्मान (2019), भोपाल; स्पंदन पुरस्कार (2017), भोपाल; श्रवण सहाय एवार्ड (2012); जनकवि मेहरसिंह सम्मान (2010), हरियाणा साहित्य अकादमी; अन्तरराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान (2009), लन्दन; शब्द साधक ज्यूरी सम्मान (2009); कथाक्रम सम्मान (2006), लखनऊ; साहित्यकार सम्मान (2004), हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार; साहित्यिक कृति सम्मान (1994), हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार; साहित्यिक कृति सम्मान (1999), हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार; पूर्व राष्ट्रपति श्री आर. वेंकटरमण द्वारा मद्रास का राजाजी सम्मान (1995); डॉ. अम्बेडकर सम्मान (1985), भारतीय दलित साहित्य अकादमी; पत्रकारिता के लिए प्रभादत्त मेमोरियल एवार्ड(1985) तथा शोभना एवार्ड (1984)।
    जनवरी 2008 में ट्यूरिन (इटली) में आयोजित भारतीय लेखक सम्मेलन में शिरकत।
    पूर्व सदस्य, हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार एवं हरियाणा साहित्य अकादमी।

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