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Vasu Ka Kutum

Vasu Ka Kutum

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  • Pages: 119
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728145
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    'वसु का कुटुम' लेखिका की अब तक लिखी गई कहानियों से एकदम अलग हटकर है ! अलग इसलिए कि अभी तक उनकी लगभग सारी कहानियां मुख्य रूप से स्त्री-पुरुष संबंधो के कथ्य के इर्द-गिर्द घुमती रही हैं लेकिन पहली बार हमारा साक्षात्कार एक बड़े सामाजिक परिवेश और उससे जुडी रोजमर्रा की छोटी-बड़ी समस्याओं से होता है ! उदहारण के लिए पर्यावरण, अतिक्रमण, एन. जी. ओ., कालाधन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे जिनसे हममें से हरेक को प्रतिदिन दो-चार होना पड़ता है ! यदि लेखिका ने कथ्य के स्तर पर एक नई पगडंडी पर कदम रखा है तो उसी के अनुरूप कहानी के शिल्प और संरचना को भी बिलकुल नए तेवर, नए मुहावरे और नए अंदाज में प्रस्तुत किया है ! सबसे पहले तो उन्होंने कहानी कहने के लिए कथावाचक की भूमिका में एक तटस्थ मुद्रा को अपनाया है, दूसरे समसामयिक घटनाओं को इतने गहरे में जाकर चित्रित किया है कि वे घटनाएँ जानी-पहचानी होकर भी 'फैंटेसी' सी लगने लगती हैं अर्थात यथार्थ को अति-यथार्थ की हद तक जाकर उद्घाटित करना कहानी को 'सुरियालिज्म' की सीमा तक पहुंचा देता है ! यह तथ्य और सत्य अलग से रेखांकित किया जाना चाहिए कि लेखिका ने भाषा के स्तर पर भी एक बहुत ही सहज, सरल और अनायास ही संप्रेषित हो जानेवाला रास्ता चुना है अपने लिए-एक बातचीत की, एक संवाद की या एक वार्तालाप की ऐसी शैली, जिसमे हम कब स्वयं शिरकत करने लगते हैं पता ही नहीं चलता ! किसी हद तक तमाम स्थितियों-परिस्थियों के चित्रण में व्यंग्य की पैनी धार कहीं हमें हंसा-हँसाकर लोट-पोट कर देती है तो कहीं गहरे में मर्म को आहत भी करती है ! यह कहानी न तो मात्र हास्य-व्यंग्य है, और न ही मात्र त्रासदी-शायद इसे अंग्रेजी में प्रचलित 'डार्क ह्यूमर' कहा जा सकता है !

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    Mridula Garg

    मृदुला गर्ग के रचना संसार में लगभग सभी गद्य विधाएँ सम्मिलित हैं। उपन्यास, कहानी, नाटक, निबन्ध, यात्रा संस्मरण, कटाक्ष आदि।
    प्रकाशित पुस्तकें
    उसके हिस्से की धूप, वंशज, चित्तकोबरा, अनित्य, मैं और मैं, कठगुलाब  और मिलजुल मन (उपन्यास)। कुल प्रकाशित कहानियाँ-90, 2003 तक प्रकाशित 8 कहानी-संग्रहों की सम्पूर्ण कहानियाँ संगति-विसंगति नाम से प्रकाशित। हाल में लिखी लम्बी कहानी वसु का कुटुम राजकमल से शीघ्र प्रकाश्य (कहानी-संग्रह)। एक और अजनबी, जादू का कालीन, साम दाम दण्ड भेद, कैद-दर-कैद (चार नाटक)। रंग-ढंग, चुकते नहीं सवाल, कुछ अटके कुछ भटके (निबन्ध-संग्रह)। मेरे साक्षात्कार, कृति और कृतिकार, संस्मरणात्मक आलोचना (यात्रा संस्मरण)। कर लेंगे सब हज़म, खेद नहीं है (व्यंग्य-संग्रह)।
    अनूदित कृतियाँ : चित्तकोबरा : 'द जिफ्लेक्टे कोबरा' नाम से जर्मन में तथा 'चित्तकोबरा' नाम से अंग्रेज़ी में प्रकाशित। कठगुलाब : 'कन्ट्री ऑफ गुड्बाइज़' नाम से अंग्रेज़ी में, 'कठगुलाब' शीर्षक से मराठी और मलयालम में और 'वुडरोज़' नाम से जापानी में प्रकाशित। अनित्य : 'अनित्य हाफवे टु नोवेह्यर' नाम से अंग्रेज़ी में और 'अनित्य' नाम से मराठी में प्रकाशित। अनेक कहानियाँ अंग्रेज़ी, जर्मन, चेक, जापानी व भारतीय भाषाओं में अनूदित।
    पुरस्कार सम्मान : अन्य अनेक पुरस्कारों के साथ कठगुलाब उपन्यास को 2004 में व्यास सम्मान और मिलजुल मन को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2013 प्राप्त।
    'कठगुलाब' दिल्ली वि.वि. के बी.ए. पाठ्यक्रम तथा अनेक विश्वविद्यालयों में स्त्री रचना/विमर्श पाठ्यक्रमों में शामिल है।

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