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Hindi Dalit Sahitya Sanchayita

Hindi Dalit Sahitya Sanchayita

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  • Pages: 424
  • Year: 2015, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728718
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    सवर्णवाद के सामाजिक-सांस्कृतिक वर्चस्व को चुनौती देनेवाले दलित साहित्य का आधार आधुनिक संवैधानिक मूल्य, मानव की सार्वभौमिक समानता और प्रजातंत्र में विश्वास है, और प्रेरणा का स्रोत उस अनंत पीड़ा में है जो इस देश की दलित जातियों ने सदियों-सदियों अकारण और बिना कोई प्रतिरोध किए सही है ! सन 1914 में 'सरस्वती' में प्रकाशित हीरा डोम की कविता 'अछूत की शिकायत' से आरम्भ मानी जानेवाली दलित साहित्य की यात्रा अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी के सामाजिक-राजनितिक अदालतों और आजादी के बाद संविधान से मिले नए स्पेस से होती हुई आज एक स्थापित धारा का रूप ले चुकी है ! मात्र प्रतिरोध और आक्रोश की कलाहीन अभिव्यक्ति के आरोपों को झुठलाते हुए अपनी रचनात्मकता को उसने एक भिन्न सौंदर्यशास्त्रीय जमीन भी दी है ! प्रस्तुत संचयिता पिछली पूरी शताब्दी की दलित मनीषा के प्रमुख पड़ावों को संकलित करने का हिंदी में संभवतः पहला सर्वांगीण प्रयास है ! विद्रोह की तीव्र आकांक्षा को बेलाग स्वर में वाणी देनेवाली कविता, दलित जन के संघर्ष को गहराई से रेखांकित करनेवाली कहानी, दलित जीवन के अंतर्बाह्य रेशों की व्याख्या करनेवाले उपन्यासों की स्वानुभूत पीड़ा की प्रमाणिक अभिव्यक्ति, आत्मकथा और अपनी पहचान के लिए लड़ रही रचना को ठोस वैचारिक आधार प्रदान करनेवाली आलोचना, सभी विधाओं का सम्यक प्रतिनिधित्व इसमें हुआ है ! उद्देश्य यही है कि दलित साहित्य के पाठकों, अध्येताओं और छात्रों को पीड़ा और प्रतिकार से उपजी संदर्भमूलक रचनाएँ एक जिल्द में उपलब्ध हो सके; और दलित साहित्य का मूल स्वर कुछ प्रमुख रचनाओं के माध्यम से सामने लाया जाए ! संचयिता में उनतीस कवियों की कविताएँ, तेरह कहानियां, सैट महत्तपूर्ण उपन्यास-अंश, छह आत्मकथा-अंश और आठ आलोचनात्मक आलेख शामिल हैं !

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    Dr. Preeti Sagar

    प्रीती सागर

    प्रकाशित सामग्री : मैथिलीशरण गुप्त के काव्य पर महाभारत का प्रभाव (पुस्तक), पत्र-पत्रिकाओं में शोध-पत्र, लेख, कविताएँ, गजलें एवं समीक्षाएँ प्रकाशित !

    सम्प्रति : एसोसिएशन प्रोफ़ेसर, साहित्य विभाग, साहित्य विद्यापीठ, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय !

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