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Keshar Kasturi

Keshar Kasturi

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  • Pages: 140
  • Year: 2015, 4th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728954
  •  
    शिवमूर्ति को पढने का अर्थ है-उत्तर भारत के गांवों को समग्रता में जानना ! गाँव ही शिवमूर्ति की प्रकृत लीला-भूमि है ! इसी पर केन्द्रित होकर उनका कथाकार दूर-दूर तक मंडराता है ! गाँव के रीति-रिवाज, ईर्ष्या-द्वेष, राग-विराग, जड़ों में धंसे संस्कार, प्रकृत यौन-बुभुक्षा, परत-दर-परत उजागर होता वर्णवादी-वर्गवादी शोषण, मूल्यहीन राजनीति और उनके बीच भटकती लाचार जिंदगियां...प्रकृतवाद में शिवमूर्ति जोला के आस-पास दीखते हैं तो पात्रों के जिवंत चित्रण में गोर्की के समीप ! संवादों की ध्वन्यात्मकता से वे सतीनाथ भादुड़ी और रेणु की याद दिलाते हैं तो बिम्ब-विधान में जैक लंडन की ! पर इन सबके बावजूद शिवमूर्ति का जो ‘अपना’ है, वह कहीं और नहीं ! लोग हैरान रह जाते हैं यह देखकर कि जब स्वयं जनवादियों की कहानियों से ‘जन’ दिनों-दिन दूर होते जा रहे हैं, बिना घोषित जनवादी हुए शिवमूर्ति की कहानियां जन के इतने करीब कैसे हैं ? शिवमूर्ति के साथ ही हिंदी कहानी में पुनः कथारस की वापसी हुई है ! आज जब कहानी में पठनीयता के संकट का सवाल उठा हुआ है, शिवमूर्ति इस सवाल का मुकम्मल जवाब हैं !

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    Shivmurti

    शिवमूर्ति

    कथाकार शिवमूर्ति का जन्म मार्च, 1950 में सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) जिले के गाँव कुरंग में एक सीमान्त किसान परिवार में हुआ। पिता के गृहत्यागी हो जाने के कारण शिवमूर्ति को अल्प वय में ही आर्थिक संकट तथा असुरक्षा से दो-चार होना पड़ा। इसके चलते मजमा लगाने, जड़ी-बूटियाँ बेचने जैसे काम करने पड़े।

    कथा-लेखन के क्षेत्र में प्रारम्भ से ही प्रभावी उपस्थिति दर्ज करानेवाले शिवमूर्ति की कहानियों में निहित नाट्य सम्भावनाओं ने दृश्य-माध्यम को भी प्रभावित किया। कसाईबाड़ा, तिरिया चरित्तर, भरतनाट्यम तथा सिरी उपमाजोग पर फिल्में बनीं। तिरिया चरित्तर तथा कसाईबाड़ा और भरतनाट्यम के हजारों मंचन हुए। अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद हुए । साहित्यिक पत्रिकाओं यथा--मंच, लमही, संवेद तथा इंडिया इनसाइड ने इनके साहित्यिक अवदान पर विशेषांक प्रकाशित किए ।

    प्रकाशित पुस्तकें :

    कहानी संग्रह : केसर कस्तूरी, कुच्ची का कानून । उपन्यास : त्रिशूल, तर्पण, आखिरी छलांग । नाटक : कसाईबाड़ा, तिरिया चरित्तर, भरतनाट्यम । सृजनात्मक गद्य : सृजन का रसायन । साक्षात्कार : मेरे साक्षात्कार (सं. सुशील सिद्धार्थ)।

    प्रमुख सम्मान : तिरिया चरित्तर कहानी 'हंस’ पत्रिका द्वारा सर्वश्रेष्ठ कहानी के रूप में पुरस्कृत। आनन्दसागर स्मृति कथाक्रम सम्मान, लमही सम्मान, सृजन सम्मान एवं अवध भारती सम्मान।

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