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Char Natak

Char Natak

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  • Pages: 352p
  • Year: 2013
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126725175
  •  
    Digital Edition Available Instantly on Pajkamal Books Library on
    चार नाटक पुस्तक में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की चार अनूदित रचनाएँ प्रकाशित हैं । ये रचनाएँ हैं–घर बाहर, विसर्जन, लाल कनेर और शेषरक्षा । अनुवाद एवं नाट्यरूपान्तर सुप्रसिद्ध रंग–मर्मज्ञ प्रतिभा अग्रवाल ने किया है । उनके अनुसार इन ‘अनुवादों का एक इतिहास है जो पाँच दशकों के कालखंड में फैला हुआ है’ । इन नाटकों को पढ़ते हुए अनुभव किया जा सकता है कि अनुवाद और रूपान्तर ने मूल रचना की आत्मा को सुरक्षित रखा है । अनुवाद वैसे भी परकाया प्रवेश सरीखा नाम है, फिर गुरुदेव की अद्भुत और निहितार्थों से भरी रचनाओं का अनुवाद! प्रतिभा अग्रवाल के शब्दों में–रवीन्द्रनाथ की रचनाओं का अनुवाद कड़ी परीक्षा की तरह होता है । कथ्य के गूढ़ार्थ को समझना, उसे हृदयंगम करना, किसी अन्य भाषा में उसके लिए उपयुक्त शब्दावली पाना, लेखक के कवित्व को बरकरार रखते हुए और शिल्प के सौन्दर्य को सुरक्षित रखते हुए अनुवाद करना साहसपूर्ण नहीं वरन् एक साहसिक काम होता है । फिर भी लोग करते रहते हैं । कथा और शिल्प की दृष्टि से चारों नाटकों में पर्याप्त भिन्नता मिलती है । सबकी अपनी–अपनी विशेषताएँ हैं । नाट्यालेखों के साथ इन पर संक्षिप्त चर्चा की गई है । रंगप्रेमियों के लिए एक संग्रहणीय पुस्तक ।

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    Ravindranath Thakur

    जन्म: 7 मई, 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी। रवीन्द्रनाथ ठाकुर को गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। वे एकमात्र कवि हैं जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं -  भारत का राष्ट्रगान जन गण मन और बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान आमार सोनार बांग्ला गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।

    कृतियाँ: गीतांजलि, गीताली, गीतिमाल्य, कथा ओ कहानी, शिशु, शिशु भोलानाथ, कणिका, क्षणिका, खेया आदि प्रमुख हैं।

    सम्मान: ‘गीतांजलि’ के लिए उन्हें सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।

    निधन: 7 अगस्त, 1941

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