• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

Bharat Ki Atma

Bharat Ki Atma

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 195

Special Price Rs. 175

10%

  • Pages: 186p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126706082
  •  
    भारत की आत्मा इस पुस्तक का लेखक अठारहवीं सदी तक जाकर भारतीय संस्कृति में फ्रांसीसी बुद्धिजीवियों की दिलचस्पी की लंबी परंपरा का स्मरण कराता है । तोकोविली स्थानीय शासन पर किताब लिखना चाहता था और रोमां रोलां ने महात्मा गांधी को विश्वप्रसिद्ध बना दिया । आज अपनी भौतिक प्रगति के बावजूद पश्चिम मोहभंग की स्थिति में है । पश्चिम में जो चीज़ अनुपस्थित है उसे खोजने के लिए गाय सोर्मन ने भारत की यात्रा की और इस उपमहाद्वीप का सही चेहरा देखने की कोशिश की जिसको अक्सर ग़लत समझा गया है । क्या भारत में सचमुच लोकतंत्र है ? जाति व्यवस्था तथा गुरुओं का मौजूदा रूप कैसा है ? भारत ने भुखमरी पर कैसे विजय पाई ? कैसे ये देश चीन से भी ज्यादा तेज़ रफ्“तार से तरक्की कर रहा है ? क्या दुनिया को देने के लिए आधुनिक भारत के पास कोई संदेश है ? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनकी पड़ताल इस फ्रांसीसी लेखक ने इस पुस्तक में की है । मूल रूप से फ्रांसीसी में लिखी गई ला जेनी ला इंडि का अंग्रेजी सहित स्पानी, जापानी तथा कोरियाई भाषा में अनुवाद हो चुका है । सोर्मन हमें बताते हैं कि उन्हें भारत में उदारता की भावना एवं वह जीवनी–शक्ति मिली जो कि यूरोप में नहीं है । ‘‘भारत हमें बताता है कि कैसे जिएँ ।’’ मालरॉक्स के ये शब्द आज पहले से कहीं ज्यादा सच्चे लगते हैं । या फिर जैसा कि जूल मिशलेट ने अपनी किताब ला बाइबल डि ला ह्यूमनाइट में लिखा था, कहा जा सकता है कि ‘‘पश्चिम में सब कुछ कितना तंग–सा है ! ग्रीस छोटा है, मेरा दम घुटता है । जूडी सूखा है और मैं हाँफने लगता हूँ । मुझे एशिया के शिखरों से पूर्व की गहराइयों को देखने दो ।’’ पुस्तक पूछती है कि ऐसा क्यों है कि कबीर का काव्य और शास्त्रीय संगीत भारत की स्थायी बौद्धिकता तथा विश्व को उसके संदेश का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि गांधी की परंपरा पश्चिम में अति भोगवाद तथा मैकियावेलीवाद को सन्तुलित करने का काम कर सकती है ।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Mukesh Kumar

    मुकेश कुमार

    जन्म : 1 अक्टूबर, 1964, शहडोल, मध्यप्रदेश में।

    शिक्षा : प्राणिशास्त्र में एम.एस-सी. और जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक। टेलीविज़न न्यूज़ एवं बाज़ार के संबंधों में टीआरपी की भूमिका पर शोध।

    लगभग अट्ठाईस वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक समय, देशबंधु, माया, सेंटिनल, दैनिक नईदुनिया और समय सूत्रधार में काम करने के बाद बीस साल से टेलीविज़न पत्रकारिता।

    टेलीविज़न की दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा। परख, फिलहाल, कही अनकही, सुबह सवेरे, साहित्य भारती और आपकी बैठक जैसे कार्यक्रमों में बतौर प्रस्तोता, निर्माता, निर्देशक कार्य किया। छह न्यूज़ चैनलों (सहारा-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़, एस-1, वॉयस ऑफ इंडिया मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़, वॉयस ऑफ इंडिया-राजस्थान, मौर्य टीवी एवं न्यूज़ एक्सप्रेस) की सफलतापूर्वक शुरूआत की। भैरव प्रसाद गुप्त की कहानी पर आधारित टेलीफिल्म कंठा का सह निर्देशन एवं उसमें अभिनय भी किया। टीवी टुडे द्वारा निर्मित आज की नारी धारावाहिक के लिए पटकथा लेखन भी किया। इसके अलावा कई वृत्त चित्रों का निर्माण भी किया।

    पुस्तकें : टेलीविज़न पत्रकारिता पर लंबी शृंखला के तहत दो पुस्तकें टेलीविज़न की कहानी और ख़बरें विस्तार से प्रकाशित।

    अनुवाद की दो पुस्तकें प्रकाशित। फ्रांसीसी लेखक गाय सोर्मन की किताब जीनियस ऑफ इंडिया का हिंदी में भारत की आत्मा के नाम से और रक्षा विशेषज्ञ श्रीधर द्वारा लिखित किताब अफगानिस्तान बुज़कशी का लहूलुहान अफगानिस्तान के नाम से।

    कविता संकलन 'साधो! जग बौराना’ ।

    छिटपुट कहानियाँ एवं व्यंग्य लेखन।

    संपर्क : सी-1302 एपेक्स ग्रीन वैली, सेक्टर-9, वैशाली, $गाजि़याबाद, उत्तरप्रदेश।

    मोबाइल : 09811818858

    ई-मेल : mukeshkabir@gmail.com

    वीडियो : mukeshkumar.info

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144