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Bisat Par Jugnu

Bisat Par Jugnu

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  • Pages: 303p
  • Year: 2020, 1st Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789389598261
  •  
    बिसात पर जुगनू सदियों और सरहदों के आर-पार की कहानी है । हिंदुस्तान की पहली जंगे-आजादी के लगभग डेढ़ दशक पहले के पटना से शुरू होकर यह 2001 की दिल्ली में ख़त्म होती है । बीच में उत्तर बिहार की एक छोटी रियासत से लेकर कलकत्ता और चीन के केंटन प्रान्त तक का विस्तार समाया हुआ है । गहरे शोध और एतिहासिक अंतर्दृष्टि से भरी इस कथा में इतिहास के कई विलुप्त अध्याय और उनके वाहक चरित्र जीवंत हुए हैं । यहाँ 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की त्रासदी है तो पहले और दूसरे अफीम युद्ध के बाद के चीनी जनजीवन का कठिन संघर्ष भी । इनके साथ-साथ चलती है, समय के मलबे में दबी पटना कलम चित्र-शैली की कहानी, जिसे ढूंढती हुई ली-ना, एक चीनी लड़की, भारत आई है । यहाँ फिरंगियों के अत्याचार से लड़ते दोनों मुल्कों के दुखो की दास्तान एक-सी है और दोनों जमीनों पर संघर्ष में कूद पड़नेवाली स्त्रियों की गुमनामी भी एक सी है । ऐसी कई गुमनाम स्त्रियाँ इस उपन्यास का मेरुदंड है । बिसात पर जुगनू कालक्रम से घटना-दर-घटना बयान करनेवाला सीधा (और सादा) उपन्यास नहीं है । यहाँ आख्यान समय में आगे-पीछे पेंगें मारता है और पाठक से, अक्सर ओझल होते किंवा प्रतीत होते कथा-सूत्र के प्रति अतिरिक्त सजगता की मांग करता है । --संजीव कुमार

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    Vandana Rag

    वन्दना राग

    वन्दना राग मूलत: बिहार के सीवान जिले से हैं। जन्म इन्दौर मध्य प्रदेश में हुआ और पिता की स्थानान्तरण वाली नौकरी की वजह से भारत के विभिन्न शहरों में स्कूली शिक्षा पाई । 1990 में दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. किया। पहली कहानी हंस में 1999 में छपी और फिर निरंतर लिखने और छपने का सिलसिला चल पड़ा । तब से कहानियों की चार किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं --यूटोपिया, हिजरत से पहले, खयालनामा अरु मैं और मेरी कहानियां । इसके अलावा अनेक अनुवाद कर चुकी है जिनमें प्रख्यात इतिहासकार ई. जे. हॉब्सबाम की किताब एज ऑफ़ कैपिटल का अनुवाद पूँजी का युग शीर्षक से किया है । यदा-कदा अख़बारों में सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लिखती रहती हैं । बिसात पर जुगनू इनका पहला उपन्यास है ।

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