• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Bindu Sindhu Ki Oor

Bindu Sindhu Ki Oor

Availability: Out of stock

Regular Price: Rs. 250

Special Price Rs. 225

10%

  • Pages: 303p
  • Year: 2004
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 8126708220
  •  
    भारतीय साहित्य के वर्तमान युग के शलाका-पुरुष कमलेश्वर जी के शब्दों में - ‘समकालीन कविता परिदृश्य पर तमिल कवि वैरमुत्तु ने जिस तरह अपने अनुवाद के साथ हिन्दी में उपस्थिति दर्ज की है उससे साबित होता है कि कविता भाषाओं की सीमा में बँधी नहीं रह सकती। इन कविताओं में वैरमुत्तु अपनी सम्पूर्ण प्रतिभा और कलात्मक प्रखरता के साथ मौजूद हैं। वह शब्दों को ध्वजा की तरह फहरा कर कविता नहीं बुनते, वरन् समय को पकड़कर कविता में ही भविष्य का सपना गूँथ देते हैं। वे जीवन में शेष हो चली आस्थाओं की पुनर्रचना करते हैं। उनके शब्दों में संवेदना की छायाएँ झाँकती हैं।...कवि के रचना-संसार में वह सब कुछ है जिसके माध्यम से वह आत्मा की क्षत-विक्षत स्मृतियों में जाकर समय की संवेदना और खुद की सृजनशीलता के मानवीय स्रोतों को खोजता है, तब ही कविता क्लासिकी रंगत के साथ पाठकों को झकझोरने लगती है।’ हिन्दी में विचार-कविताओं के प्रवर्तक तथा संत साहित्य अकादमी की स्थापना के स्वप्नदर्शी चिंतक डॉ. बलदेव वंशी का निरीक्षण है - ‘कविताओं में सर्वाधिक मुखर स्वर प्रकृतिपरक कविताओं, प्रकृति-तत्त्वों, प्रकृति-सत्यों, लयों-रंगतों-गतियों एवं विभिन्न बिम्ब-प्रतीकों आदि का है। इसी से कवि की समृद्ध अनुभूतिशीलता, संवेदना, दृष्टिबोध की व्यापकता का परिचय मिलता है और इसी के आधार पर उसके स्वर की प्रामाणिकता भी सिद्ध होती है; क्योंकि प्रकृति अपने आप में एक सत्य है।...निसर्ग (प्रकृति) के साथ ऐसा एकात्म भाव वैरमुत्तु के कवि की ऐसी विरल विशेषता है, जो उन्हें भिन्न एवं महत्त्वपूर्ण बनाती है। युग की बाज़ारवादी, आर्थिक भूमंडलीकरण की अमानवीयता एवं संवेदना-विहीनता के विपरीत वे आत्मिक एवं संवेदनात्मक आग्रहों को लेकर अपनी और भारतीय विश्वदृष्टि की विधेयता सिद्ध कर रहे हैं...‘माटी की गंध’ से भरपूर मस्ती और संघर्ष की साहसिक उत्फुल्लता, तथा मज़दूर-गरीब-शोषित के प्रति अक्षय आत्मीयता उन्हें बृहत्तर आयामों से जोड़ती है।’

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Vairamuthu

    पद्मश्री वैरमुत्तु
    जन्म : 13 जुलाई, 1953, वडुगपट्टि, तेनी जिला, तमिलनाडु
    शिक्षा : एम.ए. (तमिल साहित्य), विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक विजेता।
    कविता में रुचि : बारह वर्ष की आयु से।
    पहली कृति : ‘वैगरै मेघंगल्’ (प्रभात के बादल) कविता संग्रहµ19 वर्ष की आयु में।
    प्रकाशित पुस्तकें : 32 (कविता-संग्रह 10; जीवनी 1; उपन्यास 8; निबंध 8; साक्षात्कार 1; यात्रा-वृत्तांत 1; गीत 2; आत्मकथा 1)
    फिल्मी गीत : 5500
    पुरस्कार एवं सम्मान : ‘सर्वश्रेष्ठ गीतकार’ के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कारµ5 बार
    स    पावेन्दर उपाधि  (फिल्मी उद्योग में सराहनीय सेवा के लिए) तमिल सरकार 1989
    स    कलैमामाणि उपाधि (साहित्य सेवा के लिए) तमिलनाडु सरकार 1990
    स    ‘ओनिडा पिनाकल’ (अखिल भारतीय स्तर पर श्रेष्ठ कवि पुरस्कार) ओनडिा इंडिया द्वारा प्रदत्त, 1995
    स    पावेन्दर उपाधि (श्रेष्ठ कवि के उपलक्ष्य में) तमिलनाडु सरकार, 1995
    स    ‘पद्मश्री’ उपाधि (साहित्य क्षेत्रा में श्रेष्ठ अवदान हेतु) भारत सरकार, 2003
    विदेश यात्राएँ : अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, सिंगापुर, मलेशिया, थाइलैंड, श्रीलंका, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, आस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, कुवैत, मालद्वीप आदि।
    संपर्क : 22, फोर्थ क्रास रोड, ट्रस्टपुरम, चेन्नई-600024

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144