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Bidhar

Bidhar

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  • Pages: 367p
  • Year: 2003
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 10: 8126702982
  •  
    ‘बिढार’ का मतलब है - अपने कंधे पर अपनी गृहस्थी का बोझ लादे हुए भटकना। इस दिक्-काल से परे की भटकन का मक़सद है, शायद, गौतम बुद्ध की तरह संबोधि प्राप्त करना। अपने आपको, अपनों को, अपनापे को पाना। बिढार के चांगदेव की यह भटकन, भाषा-प्रदेश और काल को लाँघकर सार्वजनीन और बीसवीं शताब्दी के डॉक्युमेन्ट्स को लेकर सार्वकालिक बन जाती है। यह कहीं भी ख़त्म न होनेवाली भटकन, जिसका प्रारम्भ 1962 में हुआ था, वह बिढार (1975), ‘जरीला’ (1977) और ‘झूल’ (1979) को पार कर अब अपने आगे के मुकाम ‘हिन्दु’ की ओर अग्रसर है। यह परकाया प्रवेश करनेवाले एक की आपबीती है जो अपने विस्तार में अनेक को समाहित करने का सामर्थ्य रखती है। यह मानव-सभ्यता की कैसी विडम्बना है कि सृजन-क्षमता के विनाश को स्वीकार किए बिना मनुष्य को समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं होती। विपात्र बनो और प्रतिष्ठा प्राप्त करो। सत् (बिईंग) और कर्तृत्व (बिकमिंग) का घोर कुरुक्षेत्र नेमाडे जी के उपन्यास-चतुष्ट्य का दहला देनेवाला अंतःसूत्र है। जीवन के नैतिक और सांस्कृतिक दायित्व की व्यग्रता का भाव नेमाडे जी के ‘बिढार’ में जिस अभिनिवेश शून्य परन्तु रचनात्मक स्वरूप में पाया जाता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। - रंगनाथ तिवारी

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    Bhalchandra Nemade

    भालचन्द्र नेमाड़े

    महाराष्ट्र के सांगवी, जिला—जलगाँव में 27 मई, 1938 को जन्म। पुणे तथा मुंबई विश्वविद्यालयों से एम.ए. और औरंगाबाद विश्वविद्यालय से पी-एच.डी.। औरंगाबाद, लंदन, गोआ तथा मुंबई विश्वविद्यालयों में अध्यापन। मुंबई विश्वविद्यालय के गुरुदेव टैगोर चेयर ऑफ कम्पॅरेटिव लिटरेचर में प्रोफेसर तथा विभाग प्रमुख। सन् 1998 में अवकाश प्राप्त।

    प्रमुख कृतियाँ : उपन्यास : कोसला, बिढ़ार, हूल, जरीला  तथा झूल; काव्य : मेलडी तथा देखणी; आलोचना : साहित्याची भाषा, टीका स्वयंवर, साहित्य संस्कृति आणि जागतिकीकरण, ञ्जह्वद्मड्डह्म्ड्डद्व (साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित); The influence of English on Marathi; Indo-Anglian Writings; Frantz Kafka : A Country Doctor; Nativism : Deshivad अनेक भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद।

    सम्मान एवं पुरस्कार : बिढ़ार  (उपन्यास)—महाराष्ट्र साहित्य परिषद का ह.ना. आपटे पुरस्कार; झूल  (उपन्यास)—यशवंतराव चव्हाण पुरस्कार; साहित्याची भाषा (आलोचना)—कुरुंदकर पुरस्कार; टीका स्वयंवर (आलोचना)—साहित्य अकादमी पुरस्कार; देखणी (कविता-संग्रह)—कुसुमाग्रज पुरस्कार; समग्र साहित्यिक उपलब्धियों के लिए महाराष्ट्र फाउंडेशन का गौरव पुरस्कार; शिक्षा एवं साहित्यिक योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान; कुसुमाग्रज जनस्थान पुरस्कार; एन.टी. रामाराव नेशनल लिटरेरी अवार्ड; बसवराज कट्टिमणि नेशनल अवार्ड, महात्मा फुले समता पुरस्कार; समग्र कृतित्व के लिए 50वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार।

    डॉ. गोरख थोरात

    महाराष्ट्र के संगमनेर, जिला—अहमदनगर में सन् 1969 को जन्म। पुणे विश्वविद्यालय से एम.ए. तथा पी-एच.डी.।

    प्रकाशित कृतियाँ : 'चित्रा मुद्गल के कथा साहित्य का अनुशीलन’, 'प्रयोजनमूलक हिंदी’, 'ऐसा सहारा और कहाँ’;  अनुवाद : भालचन्द्र नेमाड़े के 'हिन्दू’ व 'झूल’ (उपन्यास) तथा 'देखणी’ (कविता-संग्रह) के अलावा कई शैक्षिक पुस्तकों के अनुवाद; सम्प्रति : सर परशुरामभाऊ महाविद्यालय, पुणे (महाराष्ट्र) में एसो. प्रोफेसर (हिंदी) के रूप में कार्यरत।

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