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Bhartiya Darshan : Saral Parichaya

Bhartiya Darshan : Saral Parichaya

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  • Pages: 232p
  • Year: 2016, 5th Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788171186121
  •  
    भारत जैसे बहुभाषी, सामासिक समाज में राष्ट्रीय मानस को समझने के लिए भारतीय दर्शन का अनुशीलन आवश्यक है । यह और भी जरूरी है क्योंकि भारतीय दर्शन की एक सुदीर्घ परंपरा रही है । इसमें आस्था, विश्वास, अंधविश्वास, धर्म जैसे अवयव भी घुले-मिले हैं । मोटे तौर पर दर्शन में दो परस्परविरोधी धाराएँ तो सक्रिय रही ही हैं । विविधता इतनी विपुल है कि कुछ पंक्तियों में भारतीय दर्शन को परिभाषित करना कठिन है । इसीलिए तर्कसंगत, वैज्ञानिक, दार्शनिक दृष्टिकोण का विकास जरूरी हो जाता है । हम अक्सर अपने दार्शनिक सिद्धांतों, प्राचीन संस्कृति और सभ्यता के प्रति मोहवादी अतिवाद के शिकार हो जाते हैं । पुस्तक के लेखक विख्यात मनीषी देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने इस संदर्भ में न केवल संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है बल्कि जहाँ आवश्यक हुआ, वहाँ अवैज्ञानिक और अतार्किक मान्यताओं का खंडन छ किया है । दर्शन हवा में नहीं बल्कि यथार्थ के ठोस धरातल पर जन्म लेते हैं । देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भारतीय आदर्शवाद, मायावाद के पीछे सक्रिय सामाजिक शक्तियों, कर्मवाद के बजाय परलोकवाद का पाठ पढ़ानेवाले निहित स्वार्थों और भारतीय विज्ञान के विकास में बाधा बननेवाले हितों पर भी विमर्श करते हैं; वहीं वे सकारात्मक शक्तियों को चिन्हित करते हैं । इस तरह पुस्तक में भारतीय दर्शन सही परिप्रेक्ष्य में उपस्थित होता है । भारतीय दर्शन : सरल परिचय न केवल सामान्य बल्कि सुविज्ञ पाठकों के लिए बहुविध उपयोगी सिद्ध होगी ।

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    Devi Prasad Chattopadhyay

    देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय

    देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय (जन्म: 1918) ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.ए., डी.लिट्. किया तथा मॉस्को एकेडेमी ऑफ साइंसेज से मानद डी.एससी. की उपाधि से सम्मानित हुए। वे जर्मन एकेडेमी ऑफ साइंसेज के अकादमीशियन तथा भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय फैलो भी रहे। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की शोध परियोजना ‘प्राचीन भारत में विज्ञान एवं टैक्नोलॉजी का इतिहास’ में अतिथि वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया।

    उनके द्वारा लिखित और संपादित ग्रंथों की संख्या 40 से अधिक है, जिनमें से अनेक ग्रंथों का अनुवाद चीनी, रूसी, जर्मन, जापानी और अन्य विदेशी भाषाओं में हो चुका है। उनके कुछ महत्त्वपूर्ण प्रकाशन हैं: लोकायत, ह्वाट इज लिविंग एंड ह्वाट इज डेड इन इंडियन फिलॉसफी, इंडियन एथीज्श्म, साइंस एंड सोसायटी इन एनशिएंट इंडिया, इंडियन फिलॉसफी, हिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी इन एनशिएंट इंडिया, द बिगिनिंग्स इत्यादि।

    निधन: 8 मई, 1993

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