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Beghar

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  • Pages: 157p
  • Year: 2018, 5th Ed.
  • Binding:  Paperback
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9789388183024
  •  
    हिन्दी उपन्यास पुनर्परिभाषा के जिस बिन्दु पर आ पहुँचा है, वहीं बेघर की कथा आरम्भ होती है। महानगरों में रहते युवा वर्ग के संघर्ष, सफलता और अन्तर्सम्बन्धों को आधुनिक, बेधक शिल्प में रेखांकित करता यह उपन्यास वर्तमान समय का दस्तावेज बन जाता है। परमजीत अकस्मात् संजीवनी से टकरा जाता है। एक दिन उन दोनों के जिस्म घुलमिल जाते हैं पर इस मिलन से ही नए सवाल जन्म लेते हैं। प्रेमी परमजीत को लगता है कि प्रेमिका संजीवनी असूर्यपश्या नहीं है, उसके जीवन का पहला पुरुष परमजीत नहीं है। यह वह क्षण है जब परमजीत प्रेमी की जगह पुरुष अहं को साकार करते हुए संजीवनी को छोड़ देता है। कौमार्य के मिथ की मार झेेलती संजीवनी वापस अपने सूनेपन में सीमित रह जाती है जबकि परमजीत रमा से पारम्परिक विवाह कर लेता है। इस बार उसे तकनीकी तौर पर विशुद्ध 'कुँवारीÓ पत्नी मिलती है। 'सुन्दर, सुशील और गृह-कार्य में दक्षÓ वर्ग में उसका शुमार होता है पर वह अपनी मानसिकता और जीवन-शैली में इतनी जड़ और जकड़बन्द है कि उसे बदलना परमजीत के लिए सम्भव नहीं है; बल्कि वह स्वयं, भावात्मक, दैहिक और मानसिक धरातल पर एकाकी होता चला जाता है। यह अकेलापन अन्तत: एक क्राइसिस पर समाप्त होता है। स्त्री को लेकर पुरुष-समाज में आज भी जो रूढ़ धारणाएँ, अमानवीय और अवैज्ञानिक सोच हैं, ममता कालिया का उपन्यास बेघर इन्हीं रूढिय़ों पर चोट करता है। समकालीन उपन्यासों में लेखिका की यह कथाकृति विशेष रूप से चर्चित व प्रशंसित रही है।

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    Mamta Kaliya

    ममता कालिया

    ममता कालिया का जन्म 2 नवम्बर, 1940 को बृन्दावन में  हुआ । शिक्षा दिल्ली, मुम्बई, पुणे, नागपुर और इन्दौर में ।  कहानी, नाटक, उपन्यास, निबन्ध, कविता और पत्रकारिता  अर्थात साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन । हिन्दी  कहानी के परिदृश्य पर उनकी उपस्थिति सातवें दशक से  निरन्तर बनी हुई है । वे महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी  विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका 'हिन्दी' की सम्पादक  रही हैं ।

    दो खडॉ में अब तक को सम्पूर्ण कहानियों ममता कालिया र्का कहानियाँ शीर्षक से प्रकाशित हैं । बेघर, नरक दर नरक, प्रेम कहानी, छुटकारा, दौड़, प्रतिदिन, उसका यौवन, आपकी छोटी लड़की, दुक्खम सुक्खम चर्चित पुस्तकें हैं ।

    अंग्रेजी में ट्रिब्यूट टू पापा एंड अदर पोयम्स प्रकाशित है । कई राष्ट्रीय सम्मानों से विभूषित । हिन्दी को चर्चित रचनाकार ।

    सम्पर्क : बी 3ए /3/3, सुशान्त एक्वापोलिस, क्रॉसिंग रिपब्लिक के सामने, एन. एच. 24, गाजियाबाद- 203016

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