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Bahudha aur 9/11 ke baad ki dunia

Bahudha aur 9/11 ke baad ki dunia

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Special Price Rs. 495

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  • Pages: 418p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126716746
  •  
    इधर आतंकवाद और पुनरुत्थानवाद के उदय के कारण वैश्विक राजनीति में कुछ अहम परिवर्तन आए हैं। ये अभूतपूर्व चुनौतियाँ विश्व के नेताओं से एक नई, साहसी और कल्पनाशील राजनीति की माँग कर रही हैं। शान्ति की सदियों पुरानी तकनीकों से ऊपर उठने और विमर्श की हमारी भाषा की पुनर्रचना करने की जरूरत को रेखांकित करते हुए यह पुस्तक ‘बहुधा’ की अवधारणा को प्रस्तुत करती है; ‘बहुधा’- यानी एक शाश्वत सच्चाई, एक सातत्य; शान्तिपूर्ण जीवन और सौहार्द का संवाद। यह अवधारणा बहुजातीय समाजों और बहुवाद के अन्तर को बताती है, वैचारिक आदान-प्रदान की गुंजाइश देती है और सामूहिक कल्याण की समझ को प्रोत्साहित करती है। पुस्तक को पाँच भागों में विभाजित किया गया है। पहले भाग में 1989 से 2001 की अवधि में घटी घटनाओं और विभिन्न देशों, संस्कृतियों और अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति पर पड़े उनके प्रभावों पर विचार किया गया है। मसलन- बर्लिन की दीवार का गिरना, हांगकांग का चीन में जाना और सितम्बर 11 को अमेरिका में हुआ हमला। दूसरे भाग में वेदों और पुराणों के उदाहरणों और अशोक, कबीर, गुरु नानक, अकबर व महात्मा गांधी की नीतियों के विश्लेषण के द्वारा बहुवादी चुनौतियों से निबटने के भारतीय अनुभवों को परखा गया है। आगे के भागों में लेखक ने ‘बहुधा’ को सामूहिक सौहार्द की एक नीति के रूप में रेखांकित करते हुए विश्वस्तर पर इस दृष्टिकोण के अनुकरण पर विचार किया है। एक सद्भावनापूर्ण समाज की रचना के लिए लेखक शिक्षा और धर्म की भूमिका को केन्द्रीय मानते हैं और वैश्विक विवादों को हल करने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ को शक्तिशाली बनाने की वकालत करते हैं। लेखक की मान्यता है कि आतंकवाद का जवाब मानवाधिकारों के सम्मान और विभिन्न संस्कृतियों और मूल्य-व्यवस्थाओं के सम्मान में छिपा है। शान्तिपूर्ण विश्व के निर्माण के लिए आवश्यक संवाद-प्रक्रिया को आरम्भ करने के लिए यह जरूरी है। कई-कई विषय-क्षेत्रों में एक साथ विचरण करनेवाली यह कृति विद्यार्थियों, विद्वानों और इतिहास, दर्शन, राजनीति तथा अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के शोधार्थियों के लिए समान रूप से रुचिकर साबित होगी।

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    Balmiki Prasad Singh

    सिक्किम के राज्यपाल बाल्मीकि प्रसाद सिंह एक मान्य विद्वान, विचारक और प्रशासक हैं। आपको ‘जवाहरलाल फैलोशिप’ (1982-84), ‘क्वीन एलिजाबेथ फैलोशिप’ (1989-90) और ‘महात्मा गांधी फेलोशिप’ सहित अनेक सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इनमें विशिष्ट प्रशासनिक सेवा के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘गुलजारी लाल नंदा अवार्ड’ (1998) और माननीय दलाई लामा द्वारा ‘मैन ऑफ लैटर्स’ अवार्ड (2008) भी शामिल हैं।

    पिछले चार दशकों में आप अतिरिक्त सचिव (पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, 1993-95), संस्कृति सचिव (1995-97) और गृह सचिव (1997-99) जैसे विभिन्न महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। 1999-2002 की अवधि में आप विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक और राजदूत भी रहे।

    प्रकाशित रचनाएँ: द प्रॉब्लम ऑफ चेंज: ए स्टडी ऑफ नॉर्थ ईस्ट इंडिया (1987); इंडिया’ज कल्चर: द स्टेट, द ऑर्ट्स एंड बियांड (1998); (‘संस्कृति: राज्य, कलाएँ और उनसे परे’ शीर्षक से राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित) सहित पाँच पुस्तकें।

    ‘द मिलेनियम बुक ऑन न्यू डल्ही’ (2001) के मुख्य सम्पादक।

     

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