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  • Pages: 276
  • Year: 2016, 1st Ed.
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126728336
  •  
    गाँधी को लेकर एक बड़ा और चर्चित उपन्यास लिख चुके गिरिराज जी इस उपन्यास में कस्तूरबा गाँधी को लेकर आए हैं ! गाँधी जैसे व्यक्तित्व की पत्नी के रूप में एक स्त्री का स्वयं अपने और साथ ही देश की आजादी के आन्दोलन से जुदा दोहरा संघर्ष ! ऐसे दस्तावेज बहुत कम हैं जिनमे कस्तूरबा के निजी जीवन या उनकी व्यक्ति-रूप में पहचान को रेखांकित किया जा सका हो ! नहीं के बराबर ! इसी लिए उपन्यासकार को भी इस रचना के लिए कई स्तरों पर शोध करना पड़ा ! जो किताबें उपलब्ध थीं, उनको पढ़ा, जिन जगहों से बा का सम्बन्ध था उनकी भीतरी और बाहरी यात्रा की और उन लोगों से भी मेले जिनके पास बा से सम्बंधित कोई भी सूचना मिल सकती थी ! इतनी मशक्कत के बाद आकार पा सका यह उपन्यास अपने उद्देश्य में इतनी सम्पूर्णता के साथ सफल हुआ है, यह सुखद है ! इस उपन्यास से गुजरने के बाद हम उस स्त्री को एक व्यक्ति के रूप में चीन्ह सकेंगे जो बापू के बापू बनने की ऐतिहासिक प्रक्रिया में हमेशा एक खामोश ईंट की तरह नींव में बनी रही ! और उस व्यक्तित्व को भी जिसने घर और देश की जिम्मेदारियों को एक धुरी पर साधा ! उन्नीसवीं सादी के भारत में एक कम उम्र लड़की का पत्नी रूप में होना और फिर धीरे-धीरे पत्नी होना सीखना, उस पद के साथ जुडी उसकी इच्छाएं, कामनाएं और फिर इतिहास के एक बड़े चक्र के फलस्वरूप एक ऐसे व्यक्ति की पत्नी के रूप में खुद को पाना जिसकी ऊंचाई उनके समकालीनों के लिए भी एक पहेली थी ! यह यात्रा लगता है कई लोगों के हिस्से की थी जिसने बा ने अकेले पूरा किया ! यह उपन्यास इस यात्रा के हर पड़ाव को इतिहास की तरह रेखांकित भी करता है और कथा की तरह हमारी स्मृति का हिस्सा भी बनाता है ! इस उपन्यास में हम खुद बापू के भी एक भिन्न रूप से परिचित होते हैं ! उनका पति और पिता का रूप ! घर के भीतर वह व्यक्ति कैसा रहा होगा, जिसे इतिहास ने पहले देश और फिर पूरे विश्व का मार्गदर्शक बनते देखा, उपन्यास के कथा-फ्रेम में यह महसूस करना भी एक अनुभव है !

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    Giriraj Kishore

    जन्म : 1937, मुजफ्फरनगर (उ.प्र.)।

    शिक्षा : एम.एस.डब्ल्यू.। 1995 में दक्षिण अफ्रीका एवं मॉरीशस की यात्रा।

    प्रकाशित कृतियाँ : लोग, चिड़ियाघर, जुगलबन्दी, दो, तीसरी सत्ता, दावेदार, यथा-प्रस्तावित, इन्द्र सुनें, अन्तर्ध्वंस, परिशिष्ट, यात्राएँ, ढाईघर, गिरमिटिया (उपन्यास); नीम के फूल, चार मोती बेआब, पेपरवेट, रिश्ता और अन्य कहानियाँ, शहर-दर-शहर, हम प्यार कर लें, गाना बड़े गुलाम अली खाँ का, जगत्तारणी, वल्दरोजी, आन्द्रे की प्रेमिका और अन्य कहानियाँ (कहानी-संग्रह); नरमेध, घास और घोड़ा, प्रजा ही रहने दो, जुर्म आयद, चेहरे-चेहरे किसके चेहरे, केवल मेरा नाम लो, काठ की तोप (नाटक); गुलाम-बेगम-बादशाह (एकांकी-संग्रह); कथ-अकथ, लिखने का तर्क, संवाद सेतु, सरोकार (निबंध-संग्रह)।

    सम्मान : हिन्दी संस्थान उत्तर प्रदेश का नाटक पर 'भारतेन्दु पुरस्कार’; मध्यप्रदेश साहित्य परिषद का परिशिष्ट उपन्यास पर 'वीरसिंह देव पुरस्कार’; उत्तर प्रदेश हिन्दी सम्मेलन द्वारा 'वासुदेव सिंह स्वर्ण पदक’; 1992 का 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार’; 'ढाईघर’ के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा 'साहित्य भूषण सम्मान’; महात्मा 'गांधी सम्मान’, हिन्दी संस्थान, उत्तर प्रदेश; 'व्यास सम्मान’, के.के. बिडला न्यास, नई दिल्ली; 'जनवाणी सम्मान’, हिन्दी सेवा न्यास, इटावा।

    आजकल 'कस्तूरबा’ पर उपन्यास लिखने में व्यस्त।

    सम्पर्क : 11/210, सूटरगंज, कानपुर-28001 (उ.प्र.)

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