• (011) 23274463
  • Help
INR
 
Shopping Cart (0 item)
My Cart

You have no items in your shopping cart.

You're currently on:

Aspatal Ke Bahar Telephone

Aspatal Ke Bahar Telephone

Availability: In stock

-
+

Regular Price: Rs. 150

Special Price Rs. 135

10%

  • Pages: 126p
  • Year: 2009
  • Binding:  Hardbound
  • Language:  Hindi
  • Publisher:  Rajkamal Prakashan
  • ISBN 13: 9788126717682
  •  
    ‘पिता की आँख में पराई औरत’, ‘उधारीलाल’, ‘स्कूटर’ और ‘मुझ नातवाँ के बारे में: पाँच प्रेम कविताएँ’ इस संग्रह में शामिल ये कुछ ही कविताएँ पवन करण के कवि की गहराई और ऊँचाई, दोनों का प्रमाण दे देती हैं। ये कविताएँ एक व्यक्ति के रूप में उनकी विस्तृत चेतना और कवि के रूप में उस चेतना को शब्दों में बाँधने, साधने और जन-मन की धारा में प्रवाहित कर देने की क्षमता की साक्षी हैं। यह विस्मयकारी है कि अक्सर मुख्यधारा की चर्चा में बने रहनेवाले पवन करण कविता के प्रचलित मुहावरों से बिलकुल भी प्रभावित न होते हुए, जीवन के जिस भी इलाके में जाते हैं, एक कतई अपनी तरह की कविता लेकर आते हैं। विषय के चुनाव में भी वे किसी रूढ़ि को आगे नहीं बढ़ाते, न ही किसी धारा का अनुकरण करते; जीवन का सबकुछ उनके लिए कविता है, और हर क्षण वे कवि हैं, हर सम्भव विषय उनके लिए कविता का विषय है। बाजार हो, राजनीति हो या सरकारी पाखाना-घर, चाँद हो, वकील हो या अस्पताल के बाहर लगा एक अदना-सा टेलीफोन, वे हर कहीं एक लय तलाश कर लेते हैं जिसमें ये चीजें पुनः, और इस बार एक कविता के रूप में, हमारे सामने से गुजरती हैं। संग्रह की लगभग प्रत्येक कविता इसका सबूत है। ये कविताएँ उन्हीं लोगों के शब्दों और मुहावरों में बात करती हैं जिनकी ये कविताएँ हैं यानी हम और आप। यहीं हमारे सामने से शुरू होकर और हमारे देखते-ही-देखते हमारी दृष्टि-सीमा से ऊँचे, कहीं अबूझ और अपार होती व्यवस्था के प्रति हमारी प्रतिक्रिया भी इन कविताओं में है, और विषाद भी। हमारे जीने का उछाह भी इनमें है और अवसाद भी। इनमें हमारा बड़ा होना भी है और छोटा होना भी, हमारी हिंसा भी और हमारी करुणा भी।

    Customer Reviews

    There are no customer reviews yet.

    Write Your Own Review

    Pawan Karan

    जन्म : 18 जून, 1964,  ग्वालियर (म. प्र.)।
    शिक्षा : पी-एच.डी. (हिन्दी) जनसंचार एवं मानव संसाधन विकास में स्नातकोत्तर पत्रोपाधि।
    प्रकाशन : स्त्री मेरे भीतर, अस्पताल के बाहर टेलीफोन, कहना नहीं आता, कोट के बाजू पर बटन, कविता-संग्रह प्रकाशित।
    कविता-संग्रह 'स्त्री मेरे भीतर' मलयालम, मराठी, उडिय़ा, पंजाबी, उर्दू तथा बांग्ला में प्रकाशित। संग्रह की कविताओं का नाट्य-मंचन।
    संग्रह का मराठी अनुवाद नांदेड विश्वविद्यालय महाराष्ट्र के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में शामिल एवं इसी अनुवाद पर गांधी स्मारक निधि, नागपुर का अनुवाद पुरस्कार।
    सम्मान : रामविलास शर्मा पुरस्कार, रजा पुरस्कार, वागीश्वरी सम्मान, शीला सिद्धान्तकर स्मृति सम्मान, परम्परा ऋतुराज सम्मान, केदार सम्मान, पुश्किन सम्मान।
    सम्प्रति : नवभारत एवं नई दुनिया ग्वालियर में साहित्यिक पृष्ठ 'सृजन' का सम्पादन। साप्ताहिक साहित्यिक स्तम्भ 'शब्द-प्रसंग' का लेखन।
    सम्पर्क : 'सावित्री', आई-10, साइट नं. 01, सिटी सेंटर, ग्वालियर, म. प्र.-474002

    pawankaran64@rediffmail.com

    loading...
      • Sarthak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Chahak An Imprint of Rajkamal Prakshan
      • Funda An Imprint of Radhakrishna
      • Korak An Imprint of Radhakrishna
    Location

    Address:1-B, Netaji Subhash Marg,
    Daryaganj, New Delhi-02

    Mail to: info@rajkamalprakashan.com

    Phone: +91 11 2327 4463/2328 8769

    Fax: +91 11 2327 8144